Mahatma Jyotirao Phule : Vyakti aur Vichar
महात्मा ज्योतिराव फुले: व्यक्ति और विचार
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भारतीय सामाजिक क्रांति के जनक महात्मा ज्योतिराव फुले के जीवन-संघर्ष, सामाजिक सरोकार और क्रांतिकारी विचारों का विस्तृत विवरण। यह कृति दलित शिक्षा, स्त्री शिक्षा, छुआछूत विरोध और ‘सत्यशोधक समाज’ की उपलब्धियों को गहराई से उजागर करती है।
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भारतीय सामाजिक क्रान्ति के जनक महात्मा ज्योतिराव फूले ने शिक्षा के महत्त्व को रेखांकित करते हुए समाज के हर वर्ग को शिक्षा उपलब्ध कराने की वकालत की। दलित शिक्षा और स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में फूले ने क्रान्तिकारी कार्य किये। भारत में रात्रि प्रौढ़शालाएँ आरम्भ करने का श्रेय उन्हीं को जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी धर्मपत्नी सावित्रीबाई फूले का योगदान भी अविस्मरणीय है।
भारत में पुनर्जागरण काल के दौरान महात्मा ज्योतिराव फूले ने समाज में व्याप्त धार्मिक रूढ़ियों और रीति-रिवाजों का डटकर विरोध किया। सती- प्रथा, विधवा-मुंडन, बाल-हत्या जैसी प्रथाओं को उन्होंने अमानवीय घोषित किया। विधवा-विवाह, नारी-शिक्षा, नारी स्वतंत्रता और नारी जागृति हेतु वे समर्पण के साथ जीवन पर्यन्त कार्य करते रहे।
छुआछूत, जातिभेद और जन्म के आधार पर मानव-मानव के भेद को महात्मा ज्योतिराव फूले ने घृणित माना। उन्होंने अपने विचारों और कार्यों को मूर्तरूप देने के लिए ‘सत्यशोधक समाज’ संस्था की स्थापना की। उनका उद्देश्य धार्मिक और सामाजिक गुलामी को जड़ से उखाड़ फेंकना था। महात्मा फूले की यह स्पष्ट अवधारणा थी कि समानता, स्वतंत्रता, मानवता, आर्थिक न्याय, शोषणमुक्त समाज और भाईचारे पर आधारित समाज ही सुखी और सम्पन्न हो सकता है। इस कृति में महात्मा ज्योतिराव फूले के जीवन-संघर्ष, सामाजिक सरोकार, लेखन में क्रान्तिकारी विचार और ‘सत्यशोधक समाज’ की उपलब्धियों के साथ-साथ स्त्री और दलित वर्ग के उद्धारक का विस्तृत विवरण है। उन्होंने किसान संगठन, वैज्ञानिक खेती, मजदूर-आन्दोलन और पानी जैसी समस्याओं पर उन्होंने मौलिक कार्य किया। इन सभी का सम्यक् विश्लेषण इस कृति में हुआ है।
| Weight | 335 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |















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