Karyalay Deepika
कार्यालय दीपिका
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Karyalay Deepika राजभाषा हिन्दी के व्यवहारिक रूप को प्राप्त करने और उसके प्रचार-प्रसार में आने वाली समस्याओं पर केंद्रित यह पुस्तक, जब्बरमल शर्मा द्वारा प्रस्तुत है। यह राजभाषा संबंधी व्यावहारिक कठिनाइयों के समाधान सुझाती है, जिसमें विश्व के विद्वानों का हिन्दी व्याकरण, शब्दकोशों, मानक हिन्दी वर्णमाला, और इंटरनेट पर हिन्दी साइटों पर जानकारी शामिल है।
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14 सितम्बर, 1949 को संविधान सभा ने यह प्रस्ताव पारित किया कि भारतीय गणराज्य की राजभाषा हिन्दी होगी जो देवनागरी लिपि में लिखी जाएगी। इसके बाद इस सम्बन्ध में राष्ट्रपति अध्यादेश, अधिनियम व नियम जारी हुए हैं। राजनैतिक अन्तर्विरोधों के कारण संविधान में व्यवस्था होने के बावजूद हिन्दी को व्यवहारिक रूप से अभी तक राजभाषा का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ है। यद्यपि हिन्दी की उत्तरोत्तर प्रगति हुई है और उसके प्रयोग की दिशा में भी अभिवृद्धि हुई है।
इस सम्बन्ध में अनेक विद्वानों ने पुस्तकें लिखी हैं जिनमें राजभाषा सम्बन्धी जानकारियाँ दी गयी हैं। फिर भी राजभाषा के संदर्भ अनेक प्रश्न ऐसे रह गये हैं जिन पर ये पुस्तकें हमारी बहुत मदद नहीं कर पातीं। इस दिशा में प्रस्तुत पुस्तक एक विनम्र प्रयास है जो राजभाषा से जुड़ी सभी समस्याओं पर सम्यक् प्रकाश डालती है। पुस्तक इस प्रसंग में उठने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों के समाधान सुझाती है। राजभाषा से सम्बन्धित कई नए विषयों को जोड़ने के प्रयास में प्रस्तुत पुस्तक में विश्व के विद्वानों का हिन्दी व्याकरण व शब्दकोषों पर जानकारी दी है। मानक हिन्दी वर्णमाला व अंक तथा इंटरनेट पर हिन्दी साइट आदि नए विषयों को भी लिया है। शब्द विवेचन तथा हिन्दी भाषाओं में प्रचलित विदेशी शब्दों की जानकारी देने का प्रयास किया है। इस प्रकार पुस्तक में सामान्य बोलचाल के शब्दों, समानार्थक शब्दों तथा दैनिक प्रयोग में आने वाले वाक्यांशों की संक्षिप्त जानकारी भी दी है।
| Weight | 360 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |







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