Jaliya Sarisrap Kosh
जलीय सरीसृप कोश (साँप, कछुआ, मगर आदि जीवों का विश्वकोश)
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Jaliya Sarisrap Kosh ‘जलीय सरीसृप कोश’ सरीसृपों के संबंध में प्रचलित भ्रांतियों का खंडन करती है और नवीनतम शोधों से प्राप्त रोचक तथ्यों का वैज्ञानिक ढंग से परिचय देती है। डॉ. परशुराम शुक्ल द्वारा लिखित यह विश्वकोश साँप, छिपकली, कछुआ और नक्रगण जैसे जीवों की शारीरिक संरचना, ठंडे खून की प्रकृति और उनके व्यवहार की विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।
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सरीसृपों को ठण्डे खून वाले ऐसे रीढ़धारी जीवों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जिनकी त्वचा सामान्यतया शल्कों वाली होती है, जबड़ों में साधारण दाँत होते हैं, ये वास्तविक समागम करते हैं तथा इनके गुर्दे मल के समान गाढ़ा मूत्र निकालते हैं। सरीसृपों में मगर को छोड़कर सभी जीवों के तीन कक्षीय हृदय होता है।
सरीसृप धरती पर रहने वाले जीवों का एक महत्त्वपूर्ण वर्ग है। इन्होंने एक लम्बे समय तक हवा, पानी और जमीन पर शासन किया तथा अपना प्रभुत्व बनाये रखा।
सरीसृप वर्ग के अन्तर्गत मुख्य रूप से चार जीव आते हैं-साँप, छिपकली, कछुआ और नक्रगण। नक्रगण के चार जीव हैं-मगर, घड़ियाल, एलीगेटर और कैमान।
सरीसृपों के सम्बन्ध में जनसामान्य में अनेक भ्रान्तियाँ प्रचलित हैं। उदाहरण के लिए साँप दूध पीते हैं, छिपकलियाँ विषैली होती हैं, कछुए हजारो वर्ष जीवित रहते हैं। सभी मगर मानव पर आक्रमण करते हैं और उन्हें खा जाते हैं आदि। ये सभी भ्रामक तथ्य हैं। वास्तव में सौंप दूध नहीं पीते। विश्व में केवल दो छिपकलियों में विष होता है। कछुओं की सामान्य आयु 150 वर्ष होती है तथा मगर की कुछ जातियाँ ही मानव पर आक्रमण करती हैं।
‘जलीय सरीसृप कोश’ में सरीसृपों के सम्बन्ध में प्रचलित तथ्यों का खण्डन किया गया है तथा नवीनतम शोधों से प्राप्त रोचक तथ्यों का वैज्ञानिक ढंग से परिचय दिया गया है।
| Weight | 420 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Genre |














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