Grameen Sthaniya Prashaasan Evam Grameen Vikas
ग्रामीण स्थानीय प्रशासन एवं ग्रामीण विकास
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ग्रामीण स्थानीय प्रशासन और विकास योजनाओं का विस्तृत विवेचन। यह पुस्तक पंचायती राज के क्रमिक विकास, संरचना, वित्त और ग्रामीण विकास के प्रतिमानों को गहराई से उजागर करती है, छात्रों, शोधकर्ताओं और नीति-नियोजकों के लिए अत्यंत उपयोगी।
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प्रस्तुत पुस्तक में पंचायती राज के क्रमिक विकास, दर्शन, संगठनात्मक एवं कार्यात्मक स्वरूप, उनकी आय के साधन व उन पर राजकीय नियंत्रण का विस्तार से विवेचन किया गया है, साथ ही ग्रामीण विकास की विभिन्न योजनाओं की विवेचना की गई है। यथास्थान विभिन्न राज्यों में पंचायती राज का तुलनात्मक अध्ययन व आलोचनात्मक अध्ययन सम्बन्धी महत्त्वपूर्ण बिन्दु प्रस्तुत किये गये हैं।
वस्तुतः प्रस्तुत पुस्तक भारत में ग्रामीण स्थानीय प्रशासन एवं ग्रामीण विकास की विभिन्न योजनाओं के समग्र दिव्य दर्शन की दिशा में एक प्रयास है।
पुस्तक में वर्तमान तक पंचायती राज संस्थाओं और नवीन विकास की योजनाओं में किये गये विधिक परिवर्तन/संशोधनों का समावेश करने के साथ ही द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (छठा प्रतिवेदन, 2006) में अनुशंसाएँ को यथास्थान प्रस्तुत किया गया है। विभिन्न राज्य सरकारों जिसमें राजस्थान में सम्मिलित है द्वारा पंचायती राज संस्थाओं में जन- प्रतिनिधियों की शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता व पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत का आरक्षण की व्यवस्थाओं को यथास्थान प्रस्तुत किया गया है।
भारतीय ग्रामीण स्थानीय प्रशासन (पंचायती राज) एवं ग्रामीण विकास के प्रतिमानों को प्रकट करने वाली यह पुस्तक विश्वविद्यालयों के स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के लोक-प्रशासन व राजनीति विज्ञान व वाणिज्य के छात्रों के लिए एवं विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं, विशेष रूप से ग्राम सेवक एवं पंचायत सचिव पद हेतु बैठने वाले, शोधकर्ताओं, पाठकों एवं नीति-नियोजकों के साथ-साथ पंचायती राज के जन-प्रतिनिधियों आदि के लिए यह उपयोगी । सिद्ध होगी, ऐसी हमारी मान्यता है।
| Weight | 705 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2.5 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |









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