Charnam Sharnam Gachaami
चरणं शरणं गच्छामि
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चरणम् शरणम् गच्छामि’ अजय अनुरागी के विविधता एवं नवीनता से युक्त प्रभावी व्यंग्यों का ऐसा संग्रह है जिसमें उपेक्षित एवं आम आदमी की पीड़ा को जुबान मिली है। इन व्यंग्यों में विज्ञापन जगत की अस्थायी चकाचौंध से लेकर राजनीति के झूठे झांसों व वादों के अभ्यस्तों, समाज की वैषम्यपूर्ण सोच से लेकर वैयक्तिक नैतिक पतन के प्रशंसकों, शैक्षिक संसार की कुरूपताओं से लेकर स्वप्न बेचने वाले छलियाओं को समय के आईने में पूर्णरूपेण उतार दिया है। इसलिए कहीं-कहीं ये कटु व तीक्ष्ण हो गये हैं, जो व्यंग्यकार की ईमानदार कोशिश कही जा सकती है।
सही समय पर सही कटाक्ष व्यंग्य की प्रहारात्मक शक्ति को बढ़ाने में सफल होता है। इस दृष्टि से ‘चरणम् शरणम् गच्छामि’के व्यंग्य खरे हैं, जो पाठक के मन में देर तक व दूर तक तिलमिलाहट छोड़ जाते हैं।
प्रस्तुत संग्रह के व्यंग्यों में वैचारिक जनपक्षधरता को बल मिला है। अपने समय व समाज की सीधी-सच्ची पड़ताल प्रस्तुत की गयी है। निडर व निष्पक्ष लेखकीय निष्ठा प्रकट हुई है।
लेखक ने सामयिक विषयों को भी नये ढंग से व्यंग्य की कसौटी पर कसकर अपनी अनूठी व्यंग्य शैली का परिचय दिया है। व्यंग्यकार की सही पकड़ व गहरी अंतर्दृष्टि का ही परिणाम है कि कोई चीज छूटी भी नहीं है और टूटी भी नहीं है।
प्रस्तुत पुस्तक के व्यंग्य ‘व्यंग्य की भीड़ से अलग’ अपनी पहचान रखते हैं तथा व्यंग्यकार की पृथक् पहचान बनाने में भी समर्थ हैं।
| Weight | 315 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Genre |
















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