Chandragupta Vikramaditya – Chandrodai Bhag-1
चंद्रगुप्त विक्रमादित्य - चंद्रोदय भाग-1
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Chandragupta Vikramaditya – Chandrodai Bhag-1 प्राचीन भारत के इतिहास में गुप्तकाल को स्वर्ण युग माना जाता है। ओमप्रकाश शर्मा ‘महामौनी’ का यह वृहद ऐतिहासिक उपन्यास चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के चरित्र के विविध पक्षों का उद्घाटन करता है। ‘चंद्रोदय’ नामक यह प्रथम खंड भारतीय इतिहास के तीसरी से चौथी शताब्दी तक के विस्तृत काल-खंड की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक हलचलों को रचनात्मक दृष्टि से चित्रित करता है, जो पाठक को भारत के अतीत की चित्रवीथि में प्रवेश कराता है।
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प्राचीन भारत के इतिहास में गुप्तकाल राजनैतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक तथा ज्ञान और कला की दृष्टि से स्वर्ण युग माना जाता है। समुद्रगुप्त ने पूरे भारत पर विजय प्राप्त की और अपने राजनैतिक वर्चस्व को स्थापित किया जिसे उनके पुत्र चन्द्रगुप्त ने और आगे बढ़ाया। चन्द्रगुप्त का चरित्र अनेक रूपों में अद्वितीय था इसीलिए इतिहास में उसे विक्रमादित्य की उपाधि से विभूषित किया गया। चन्द्रगुप्त का पूरा जीवन संघषों और हलचलों से भरा था किन्तु अपने पराक्रम कौशल, उदात्त स्वभाव और संवेदनशील व्यवहार के कारण उसने आशातीत सफलताएं अर्जित कीं।
ओमप्रकाश शर्मा’ महामौनी’ का तीन खण्डों में प्रकाशित ‘चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य’ नामक वृहद उपन्यास एक ऐसा ऐतिहासिक उपन्यास है जो एक कालखण्ड को पाठकों के समक्ष जीवंत कर देता है। ‘चन्द्रोदय’, ‘अभिषेक’ तथा ‘दिग्विजय’ शीर्षकों से तीन खण्डों में विभाजित यह उपन्यास चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के चरित्र के विविध पक्षों का उद्घाटन तो करता ही है, भारतीय इतिहास के लगभग तीसरी शताब्दी से चौथी शताब्दी तक के विस्तृत काल-खण्ड की सभी प्रकार की हलचलों को रचनात्मक दृष्टि से चित्रित करना है। इसमें सन्देह नहीं कि लेखक ने इस कालखण्ड के भारतीय परिदृश्य को उसकी सम्पूर्णता में प्रस्तुत करने के लिए अद्भुत तैयारी की है। लेखक ने प्राचीन भारत के इतिहास का अपनी तरह से अवगाहन कर उसे औपन्यासिक रूप प्रदान किया है।
लेखक बराबर सावधान है कि वह इतिहास नहीं एक उपन्यास लिख रहा है, इसलिए पाठक इसे पढ़ते समय जैसे भारत के अतीत की चित्रवीथि में प्रवेश कर जाता है। ये चित्र प्राचीन भारत के जीवन की बहुरंगी छवि को बड़ी आत्मीयता और संवेदनशीलता से प्रस्तुत किए गये हैं। भाषा पर लेखक की गहरी पकड़ इस कृति को और विश्वसनीय और पठनीय बना देती है।
‘चन्द्रगुप्त विक मादित्य’ एक ऐसा ऐतिहासिक उपन्यास है जो अपने कथ्य और स्वरूप में महाकाव्यात्मक है।
| Weight | 350 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |










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