Bharatiya Samajik Vyavastha
भारतीय सामाजिक व्यवस्था
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Bharatiya Samajik Vyavastha ‘भारतीय सामाजिक व्यवस्था’ एक जटिल समग्र है जिसे समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से समझना आवश्यक है। वीरेंद्र प्रकाश शर्मा की यह पुस्तक भारतीय समाज और संस्कृति के समन्वय, भारतीय परंपरा, संस्कृतिकरण, पश्चिमीकरण, आधुनिकीकरण, और विभिन्न उप-सामाजिक व्यवस्थाओं—आश्रम, वर्ण, जाति, हिन्दू विवाह, संयुक्त परिवार—का विस्तृत विवेचन करती है। यह कृति भारतीय सामाजिक परिवर्तन की प्रमुख प्रक्रियाओं का व्याख्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
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भारतीय सामाजिक व्यवस्था एक जटिल समग्र है। इसको समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से समझने के लिए इसके विभिन्न पक्षों का गहन अध्ययन किया जाना आवश्यक है। प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय सामाजिक व्यवस्था के लगभग सभी महत्त्वपूर्ण आयामों एवं प्रकरणों का समाजशास्त्री परिप्रेक्ष्यानुसार परिभाषित करते हुए उनकी विशेषताओं और परिवर्तन के कारकों के प्रभावों का वर्णनात्मक एवं व्याख्यात्मक विवेचन प्रस्तुत किया गया है।
सर्वप्रथम भारतीय समाज और संस्कृति के समन्वय के प्रमुख घटकों पर प्रकाश डाला गया है तथा भारतीय परम्परा, संस्कृतिकरण, पश्चिमीकरण और आधुनिकीकरण की विवेचना की गई है। भारतीय सामाजिक व्यवस्था की विभिन्न उप सामाजिक व्यवस्थाओं आश्रम व्यवस्था, वर्ण व्यवस्था, जाति-व्यवस्था, हिन्दू विवाह और संयुक्त परिवार की व्याख्या की गई है। हिन्दू एवं मुस्लिम स्त्रियों की स्थिति, हिन्दू, मुस्लिम विवाह एवं परिवार आदि को समग्र रूप से प्रस्तुत किया गया है।
भारत में आर्थिक विकास और आधुनिकीकरण, जाति और राजनीति, भारत में सामाजिक परिवर्तन की प्रमुख प्रक्रियाएँ एवं उपागमों (उद्विकासीय, सांस्कृतिक, संरचनात्मक, द्वंद्वात्मक, ज्ञानात्मक, ऐतिहासिक और एकीकृत) की विवेचना की गई है। अन्त में भारत में सामाजिक परिवर्तन की विभिन्न प्रमुख प्रक्रियाओं का व्याख्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
आशा है कि प्रस्तुत पुस्तक ‘भारतीय सामाजिक व्यवस्था’ समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से चाही गई वर्णनात्मक एवं व्याख्यात्मक विवेचना की आवश्यकता को पूर्ण करने में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, प्रतियोगियों, जिज्ञासु रुचिशील पाठकों आदि के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
| Weight | 560 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2.5 cm |
| Textbook Genre |
















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