Bharat Ka Itihas (1760-1950)
भारत का इतिहास (1760-1950)
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विषय-सूची
अध्याय
- अंग्रेजों के आगमन के समय भारत की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति
भारत में यूरोपीय शक्तियों का प्रवेश – पुर्तगालियों का प्रवेश, डचों का प्रवेश, अंग्रेजों का आगमन, फ्रांसीसियों का आगमन। भारत की राजनीतिक स्थिति- औरंगजेब के अयोग्य उत्तराधिकारी, स्वायत्तशासी राज्यों का उदय- हैदराबाद, बंगाल, बिहार और उड़ीसा, अवध, गुजरात, मालवा, पंजाब और राजस्थान, मैसूर, मराठे- बालाजी विश्वनाथ, बाजीराव प्रथम, बालाजी बाजीराव। पानीपत का तीसरा युद्ध, युद्ध के परिणाम। अंग्रेज और फ्रांसीसी कम्पनियों की प्रतिस्पर्धा। अंग्रेजों के आगमन के समय भारत की आर्थिक स्थिति – कृषि, व्यापार एवं वाणिज्य, उद्योगों की स्थिति।
- बंगाल में ब्रिटिश विस्तार : प्लासी और बक्सर के युद्ध : इलाहाबाद की सन्धि
बंगाल की स्थिति। बंगाल में ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थिति। अलीवर्दी खाँ का शासनकाल। सिराजुद्दौला – अंग्रेजों के साथ संघर्ष के कारण, सैनिक कार्यवाही, काल-कोठरी की घटना, अलीनगर की सन्धि; प्लासी का युद्ध – कारण, युद्ध, युद्ध का महत्त्व; मीरजाफर और अंग्रेज; मीरकासिम – अंग्रेजों के साथ झगड़ा; बक्सर का युद्ध; बक्सर के युद्ध का महत्त्व। क्लाइव की दूसरी गवर्नरी; इलाहाबाद की सन्धि, इलाहाबाद की सन्धि का मूल्यांकन। बंगाल का दोहरा शासन; क्लाइव का मूल्यांकन।
- प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध और सालबाई की सन्धि
अंग्रेजों की मराठों के प्रति नीति। आंग्ल-मराठा सम्बन्ध। सूरत की सन्धि। प्रथम आंग्ल-मराठा संघर्ष। सालबाई की सन्धि; सन्धि का महत्त्व। वेलेजली और द्वितीय मराठा युद्ध। लार्ड हेस्टिंग्ज व तृतीय मराठा युद्ध, युद्ध का महत्त्व। मराठों के पतन के कारण।
- सहायक सन्धि और गोद-निषेध नीति : ब्रिटिश साम्राज्य विस्तार के साधन
सहायक सन्धि प्रथा-ब्रिटिश साम्राज्य विस्तार का साधन। पृष्ठभूमि। सहायक सन्धि प्रथा; सहायक सन्धि की शर्तें; सहायक सन्धि प्रथा की समीक्षा। सहायक सन्धियों की कार्यान्विति- हैदराबाद, अवध, मैसूर, मराठा, तंजौर, सूरत, कर्नाटक। वेलेजली के बाद। नीति का मूल्यांकन।
गोद-निषेध नीति-गोद-निषेध नीति, गोद निषेध नीति के अन्तर्गत विलीन किये गये राज्य- सतारा, जैतपुर और संबलपुर, बाघट, उदयपुर, झाँसी, नागपुर। गोद-निषेध नीति की समीक्षा।
- स्थायी बन्दोबस्त, रैयतवाड़ी और महलवाड़ी
भू-राजस्व व्यवस्था की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि। स्थायी बन्दोबस्त के पूर्व स्थिति। भूमि का स्थायी बन्दोबस्त; स्थायी भू-प्रबन्ध की विशेषताएँ; स्थायी बन्दोबस्त के गुण और दोष। स्थायी बन्दोबस्त का कृषकों पर प्रभाव। रैयतवाड़ी बन्दोबस्त; रैयतवाड़ी बन्दोबस्त का कृषकों पर प्रभाव। महलवाड़ी बन्दोबस्त; महलवाड़ी बन्दोबस्त का कृषकों पर प्रभाव। समीक्षा।
- कृषि का वाणिज्यीकरण और इसका प्रभाव
कृषि पर बढ़ता हुआ बोझ। कृषि का वाणिज्यीकरण। वाणिज्यीकरण के प्रभाव- किसानों की निर्धनता में बढ़ोतरी, अकाल का प्रकोप, किसान विद्रोह, अन्य प्रभाव।
- कुटीर उद्योगों का पतन : कारण और प्रभाव
अंग्रेजों के आगमन के समय भारतीय कुटीर उद्योग। कुटीर उद्योगों के प्रति ब्रिटिश नीति। कुटीर उद्योगों के विनाश के कारण। कुटीर उद्योगों के पतन का प्रभाव।
- उपयोगितावादी दर्शन और भारत में प्रशासनिक नीतियाँ : भू-राजस्व, सामाजिक सुधार, शिक्षा और न्यायपालिका
उपयोगितावादी दर्शन- बैन्थम का उपयोगितावादी दर्शन। उपयोगितावाद के मुख्य सिद्धान्त। जेम्स मिल के विचार। बैण्टिक और उपयोगितावाद। प्रशासनिक नीतियाँ- वारेन हेस्टिंग्ज की प्रशासनिक नीति, रेगूलेटिंग एक्ट, पिट्टस इंडिया एक्ट। लार्ड कार्नवालिस की प्रशासनिक नीति। प्रशासनिक स्थिरता का काल। व्यापक सुधारों का युग। प्रशासन का आधुनिकीकरण। लार्ड डलहौजी और भारत का आधुनिकीकरण। ब्रिटिश सरकार की प्रशासनिक नीति- प्रशासनिक परिवर्तन। उदारवाद का प्रतीक : लार्ड रिपन- स्थानीय स्वशासन की स्थापना, वित्तीय विकेन्द्रीकरण, वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट की समाप्ति, इल्बर्ट बिल विवाद, आर्थिक सुधार। रिपन के बाद- प्रान्तीय एवं जिला प्रशासन। भू-राजस्व। सामाजिक सुधार- सती-प्रथा, बाल-वध, विधवा-विवाह, बाल-विवाह और सहवास आयु, जाति-भेद। न्यायपालिका- कार्नवालिस के तिक न्यायिक सुधार, न्याय प्रणाली में संशोधन, विलियम बैण्टिक के न्यायिक सुधार; बैण्टिक के बाद न्यायिक सुधार।
- भारत में सामाजिक-धार्मिक आन्दोलन : मुख्य सिद्धान्त और प्रभाव
कारण- भारतीय समाज और धर्म में दोष, पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव, भारतीय समाचार-पत्रों का योगदान, बंगाल एशियाटिक सोसायटी के कार्य, पाश्चात्य सभ्यता का प्रभाव। राजा राममोहन राय और ब्रह्म-समाज, युवा बंगाल आन्दोलन, केशवचन्द्र सेन और भारतीय ब्रह्म-समाज, साधारण ब्रह्म-समाज, प्रार्थना समाज, स्वामी दयानन्द सरस्वती और आर्य-समाज, थियोसाफिकल सोसायटी, स्वामी विवेकानन्द और रामकृष्ण मिशन, मुस्लिम सुधार आन्दोलन, अन्य सुधार आन्दोलन। सामाजिक-धार्मिक आन्दोलनों का परिणाम।
- भारत में पाश्चात्य शिक्षा का प्रसार
प्राचीन एवं मध्यकालीन शिक्षा। प्रारम्भिक ईसाई मिशनरियों के शैक्षणिक कार्य। ईस्ट इण्डिया कम्पनी का शैक्षणिक कार्य, मैकाले की देन। शिक्षा का विकास (1813-53) प्रथम चरण- तकनीकी शिक्षा, शिक्षा के क्षेत्र में निजी प्रयास, शिक्षा की नई नीति (1854)। दूसरा चरण- विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा, स्त्री-शिक्षा, मुसलमानों की शिक्षा, विधि शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, इन्जीनियरिंग शिक्षा, कृषि एवं पशु विज्ञान चिकित्सा, वन विज्ञान शिक्षा, कला शिक्षा, शिक्षा विभाग की स्थापना, अंग्रेजी शिक्षा का विकास। तीसरा चरण- आयोग के सुझाव- प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, शिक्षा अनुदान प्रथा, स्त्री-शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, मुसलमानों व पिछड़ी जातियों की शिक्षा; शिक्षा विभाग में सुधार, शिक्षा आयोग का मूल्यांकन। शिक्षा विकास का चौथा चरण- प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, विश्वविद्यालयी शिक्षा, स्त्री-शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, पिछड़ी जातियों की शिक्षा।
- नारी की स्थिति। नारी और दलित वर्गों की निर्योग्यताएँ : इन्हें दूर करने के लिये उठाये गये कदम
आधुनिक काल के प्रारम्भ में नारी की स्थिति- सती प्रथा, कन्या-वध, डाकन-प्रथा, बाल-विवाह, पर्दा-प्रथा, अशिक्षा, आर्थिक परतन्त्रता, दासी प्रथा, निष्कर्ष। निर्योग्यताओं को दूर करने का प्रयास- भारतीय सुधारकों का योगदान, अंग्रेजी शिक्षा का योगदान, ब्रिटिश सरकार द्वारा सुधार- सती प्रथा का निषेध, बाल-विवाह एवं सहवास सम्बन्धी कानून, कन्या-वध पर रोक, विधवा पुनर्विवाह, डाकन-प्रथा पर रोक, दासी प्रथा पर रोक, महिलाओं में राजनीतिक चेतना, निष्कर्ष। दलित वर्ग की निर्योग्यताएँ, निर्योग्यताएँ दूर करने के प्रयास- महात्मा गाँधी, दादा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर। स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद समाज सुधार के कार्य।
- प्रेस का विकास
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि। भारत में छापाखाने का प्रारम्भ, भारत में समाचार-पत्रों का उदय, सरकारी प्रतिबन्ध, समाचार-पत्रों के भारतीय प्रयास, कलकत्ता जर्नल का स्थान, राजा राममोहन राय का योगदान, एडम का प्रेस नियन्त्रण, मैटकॉफ की उदार नीति। प्रसिद्ध समाचार-पत्रों का प्रकाशन आरम्भ, वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट, वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट का रद्द किया जाना, उन्नीसवीं सदी के अन्त में समाचार-पत्र।
- किसानों एवं आदिवासियों के आन्दोलन
भारत में किसान आन्दोलन के कारण- लगान वसूली की नई पद्धतियाँ, कृषि पर बढ़ता हुआ बोझ, व्यापारिक फसलों को प्रोत्साहन, भूमि का विखंडीकरण, भूमि से बेदखली, किसानों की ऋणग्रस्तता, कृषि विकास में ठहराव आना। किसान आन्दोलन- बंगाल के कृषक विद्रोह, मराठा किसानों का विद्रोह, पंजाब के किसानों का विद्रोह, पवना के किसानों का विद्रोह, असम में किसानों का विद्रोह, मोपला किसानों का विद्रोह, पूना और अहमदाबाद जिलों में आन्दोलन। आदिवासियों के आन्दोलन- पृष्ठभूमि : असैनिक विद्रोह, राज्य-अधिग्रहण के बाद के विद्रोह, आर्थिक शिकायतें। आदिवासियों के विद्रोह- संथालों का विद्रोह, नाईक दासों का विद्रोह, मुण्डा विद्रोह, कोलिया, कुन्बियों और रामोसियों के विद्रोह, रंपा विद्रोह, गाँड विद्रोह, अन्य वर्गों का विद्रोह। उपसंहार।
- 1857 ई. का विप्लव : कारण, स्वरूप और परिणाम
विप्लव के कारण- राजनीतिक कारण, प्रशासनिक सुधार, सामाजिक कारण, धार्मिक कारण, आर्थिक कारण, सैनिक कारण, तात्कालिक कारण। विप्लव की घटनाएँ एवं प्रसार। अंग्रेजों द्वारा विप्लव का दमन। विप्लव का स्वरूप। विप्लव की असफलता के कारण। विप्लव के परिणाम।
- बंगाल, बम्बई और पूना में राजनीतिक संगठनों का उदय
बंगाल में राजनीतिक संगठनों का उदय- लैंड होल्डर्स सोसाइटी, बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी, पेट्रियाटिक एसोसिएशन, देश हितैषिणी सभा, ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन, इंडियन लीग, इंडियन एसोसिएशन। बम्बई में राजनीतिक संगठनों का उदय- बाम्बे एसोसिएशन। पूना एसोसिएशन, पूना सार्वजनिक सभा। अन्य क्षेत्रों के राजनीतिक संगठन। इंडियन नेशनल कान्फ्रेंस।
- राजनीतिक चेतना का विकास : कांग्रेस का जन्म
कारण- सामाजिक एवं धर्म सुधार आन्दोलन, यंग बंगाल के प्रवर्त्तक, अंग्रेजी शिक्षा एवं साहित्य, पाश्चात्य प्रभाव, गैर-सरकारी अंग्रेजों की भूमिका, यूरोपीय विद्वानों द्वारा भारतीय संस्कृति का गुणगान, प्रजातीय विभेद की नीति, कर-विरोधी आन्दोलन, स्वदेशी आन्दोलन, सिविल सर्विस आन्दोलन, स्थानीय स्वायत्त शासन का प्रश्न, राजनीतिक एवं प्रशासनिक एकता, आर्थिक शोषण, यातायात एवं संप्रेषण के साधनों का विकास, विदेशी आन्दोलनों का प्रभाव, समाचार-पत्रों का योगदान, राष्ट्रीय साहित्य, किसानों के सशस्त्र विद्रोह, लार्ड लिटन की प्रतिक्रियावादी नीति, इल्बर्ट बिल विवाद, कांग्रेस के पूर्व की संस्थाओं का योगदान। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना- स्थापना की पृष्ठभूमि। ह्यूम और कांग्रेस की स्थापना। कांग्रेस के लक्ष्य। कांग्रेस की स्थापना किन उद्देश्यों से की गई? कांग्रेस का स्वरूप।
- उदारवादी
उदारवादी युग। उदारवादियों की विशेषताएँ। उदारवादियों की माँगें। उदारवादियों की रणनीति। उदारवादियों का कार्य करने का तरीका। इंग्लैण्ड में आन्दोलन। उदारवादियों के प्रति सरकार की नीति। उदारवादियों की उपलब्धियाँ। उदारवादियों की आलोचना। मूल्यांकन।
- उग्रवादी
उग्र राष्ट्रवादियों का उदय। उग्रवाद की उत्पत्ति के कारण। बंग-भंग आन्दोलन- सरकार की दमन नीति। आन्दोलन का महत्त्व और प्रभाव। उदारवादियों और उग्रवादियों के अलग-अलग रास्ते- सूरत की फूट। कांग्रेस की फूट का परिणाम। उग्रवादियों की कार्य विधि। उग्रवादी राष्ट्रीयता की विशेषताएँ। उदारवाद और उग्रवाद में अन्तर। उग्रवादी आन्दोलन का मूल्यांकन।
- क्रान्तिकारी आन्दोलन
उग्रवादियों से भिन्नता। क्रान्तिकारी आन्दोलन का उद्भव। क्रान्तिकारी आन्दोलन के उदय के कारण। क्रान्तिकारी आन्दोलन के उद्देश्य। क्रान्तिकारियों की कार्य-प्रणाली। क्रान्तिकारी आन्दोलन का विकास- बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली षड्यन्त्र केस, आगरा व अवध, बिहार और उड़ीसा, मद्रास। विदेशों में क्रान्तिकारी आन्दोलन- श्यामजी कृष्ण वर्मा, विनायक दामोदर सावरकर, राना और श्रीमती कामा, गदर पार्टी और इण्डिया लीग। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद क्रान्तिकारी आन्दोलन- नौजवान सभा, बंगाल में, अन्य क्षेत्रों में। क्रान्तिकारी आन्दोलन की असफलता के कारण। राष्ट्रीय आन्दोलन में क्रान्तिकारियों का योगदान।
- गाँधी का उदय और उनके आन्दोलन
जन्म और शिक्षा। दक्षिण अफ्रीका में संघर्ष। भारतीय राजनीति में प्रवेश- असहयोग आन्दोलन- रोलेट एक्ट, जलियाँ वाला बाग हत्याकाण्ड, खिलाफत आन्दोलन। असहयोग आन्दोलन और उसकी प्रगति- नागपुर अधिवेशन, आन्दोलन की प्रगति, आन्दोलन का स्थगित किया जाना, आन्दोलन की असफलता के कारण, आन्दोलन का महत्त्व। सविनय अवज्ञा आन्दोलन- सविनय अवज्ञा आन्दोलन के पूर्व वर्षों की राजनीति- स्वराज्य दल, साइमन कमीशन, नेहरू रिपोर्ट, पूर्ण स्वाधीनता का प्रस्ताव। सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कारण। आन्दोलन की तैयारी। आन्दोलन का कार्यक्रम। आन्दोलन की प्रगति, गाँधी-इरविन पैक्ट, दूसरा गोलमेज सम्मेलन। आन्दोलन का महत्त्व और प्रभाव। आन्दोलन के प्रति अन्य तत्त्वों की भूमिका। आन्दोलन की समीक्षा।
भारत छोड़ो आन्दोलन- आन्दोलन से पूर्व की गतिविधियाँ। भारत छोड़ो आन्दोलन के कारण। भारत छोड़ो प्रस्ताव, सरकार की दमन नीति, अन्य दलों का आन्दोलन के प्रति रवैया। आन्दोलन का महत्त्व और परिणाम। आन्दोलन की असफलता के कारण।
- उग्र वामपंथी आन्दोलन
कांग्रेस समाजवादी पार्टी- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, कांग्रेस समाजवादी पार्टी की स्थापना। कांग्रेस समाजवादी पार्टी की नीतियाँ एवं लक्ष्य। पार्टी का कार्यक्रम। पार्टी के प्रति कांग्रेस नेतृत्व का रुख। कांग्रेस समाजवादी दल की उपलब्धियाँ। भारत में साम्यवाद का उदय और विकास- साम्यवादियों की प्रारम्भिक प्रवृत्तियाँ- भारत में कम्युनिस्ट ग्रुप, कानपुर षड्यन्त्र केस। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना। कम्युनिस्ट पार्टी की गतिविधियाँ- किसान पार्टियों का गठन। मेरठ षड्यन्त्र केस। 1930 के बाद कम्युनिस्ट पार्टी का नया कार्यक्रम। कम्युनिस्ट पार्टी का गैर-कानूनी घोषित किया जाना। संयुक्त मोर्चे की स्थापना। द्वितीय विश्वयुद्ध और कम्युनिस्ट पार्टी। भारत छोड़ो आन्दोलन और कम्युनिस्ट पार्टी। युद्ध के बाद की घटनाएँ। सुभाषचन्द्र बोस और फॉरवर्ड ब्लाक। अन्य वामपंथी पार्टियाँ।
- मजदूर और किसान आन्दोलन : दलित वर्ग का आन्दोलन
मजदूर आन्दोलन- औद्योगिक मजदूरों की संख्या में वृद्धि। मजदूर वर्ग की हालत। मजदूर वर्ग के असन्तोष के प्रारम्भिक संकेत, श्रमिक संघों का उदय, हड़तालों का जुझारूपन, प्रथम महायुद्ध का प्रभाव, ट्रेड यूनियनवाद का उदय, अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस, संघर्ष की तैयारी, साम्यवादियों का प्रवेश। अखिल भारतीय मजदूर एवं किसान पार्टी, हड़तालों की धूम, मेरठ षड्यन्त्र केस, ट्रेड यूनियन कांग्रेस में दरार, विभिन्न ट्रेड यूनियनों का एकीकरण, भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस का जन्म। किसान आन्दोलन- चम्पारन का सत्याग्रह, खेड़ा सत्याग्रह आन्दोलन, उत्तर प्रदेश में किसान आन्दोलन, बारदौली सत्याग्रह आन्दोलन, स्वतन्त्र किसान संगठनों के निर्माण का प्रयास, ते भागा आन्दोलन, तेलंगाना किसान आन्दोलन, वर्ली आन्दोलन, राजस्थान में किसान आन्दोलन, निष्कर्ष। दलित वर्ग आन्दोलन।
- 1919 और 1935 के अधिनियम
भारत सरकार अधिनियम 1919- पृष्ठभूमि। अधिनियम को पारित करने के कारण। भारत सरकार अधिनियम, 1919- गृह सरकार- भारत सचिव, भारत परिषद्, हाई कमिश्नर। केन्द्रीय सरकार- गवर्नर जनरल और उसकी कार्यकारिणी, केन्द्रीय व्यवस्थापिका, विधान मंडल का कार्यक्षेत्र। शक्ति और राजस्व विभाजन, प्रान्तीय शासन व्यवस्था- प्रान्तीय कार्यपालिका, प्रान्तीय विधान मंडल, द्वैध शासन के दोष और उसकी असफलता के कारण।
भारत सरकार अधिनियम, 1935- पृष्ठभूमि। अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ- गृह सरकार के नियन्त्रण में ढील, अखिल भारतीय संघ की स्थापना, केन्द्र में द्वैध शासन की स्थापना, संघीय विधान मंडल की निर्बलता, अधिकारों के विभाजन की नई पद्धति, संघीय न्यायालय की स्थापना, प्रान्तीय स्वायत्तता की स्थापना, गवर्नरों और गवर्नर-जनरल की मनमानी शक्तियाँ। अधिनियम की आलोचना।
- साम्प्रदायिक राजनीति और विभाजन
साम्प्रदायिकता का अर्थ। सम्प्रदायिकता के उदय के कारण- मुसलमानों की प्रगति का अवरुद्ध हो जाना, 1857 का विप्लव और मुस्लिम समुदाय, अलीगढ़ आन्दोलन, उग्र हिन्दू धार्मिक आन्दोलन, ब्रिटिश नौकरशाही की भूमिका, मुस्लिम लीग का अस्तित्व में आना। लखनऊ समझौता और खिलाफत आन्दोलन। नेहरू रिपोर्ट और मुस्लिम दृष्टिकोण। साम्प्रदायिक पंचाट। 1937 के बाद लीग की भूमिका। मुक्ति दिवस का आयोजन। पृथक मुस्लिम राज्य की माँग। 1940 के बाद की स्थिति।
- सुभाषचन्द्र बोस और भारतीय राष्ट्रीय सेना
प्रारम्भिक जीवन। राजनीति में। कांग्रेस की अध्यक्षता। फॉरवर्ड ब्लाक की स्थापना। नजरबन्दी से पलायन। रासबिहारी बोस की आजाद हिन्द फौज। आजाद हिन्द फौज का भंग किया जाना। सुभाषचन्द्र बोस द्वारा आजाद हिन्द फौज का पुनर्गठन। युद्ध के मोर्चे पर। सुभाष के अन्तिम दिन। क्या सुभाष फासिस्ट थे?
- संविधान का निर्माण
संविधान सभा का अर्थ। भारतीय संविधान सभा का निर्माण। संविधान सभा का कार्य। भारतीय संविधान के मुख्य स्रोत। भारतीय संविधान की प्रस्तावना। भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएँ- लिखित एवं निर्मित संविधान, लोकप्रिय प्रभुसत्ता पर आधारित, विशाल एवं व्यापक संविधान, सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न लोकतांत्रिक गणराज्य, संसदीय प्रणाली, कठोरता एवं लचीलेपन का सम्मिश्रण, एकात्मक लक्षणों सहित संघात्मक शासन, एकल नागरिकता, न्यायपालिका की सर्वोच्चता सहित संसदीय प्रभुता, मौलिक अधिकार, मूल अधिकारों की आलोचना, राज्य नीति के निर्देशक तत्त्व, वयस्क मताधिकार, लोककल्याणकारी राज्य, स्वतन्त्र न्यायपालिका तथा अन्य उपकरण, विविध विशेषताएँ।
- भारतीय राज्यों का विलय : कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ की समस्या
स्वतन्त्रता के पूर्व की स्थिति। स्वतन्त्रता के समय की स्थिति। सरदार पटेल और देशी राज्य। जूनागढ़ की समस्या। हैदराबाद की समस्या। जम्मू-कश्मीर की समस्या। देशी रियासतों में प्रजातन्त्रीय व्यवस्था। एकीकृत राजस्थान का निर्माण।
अभ्यास के लिये प्रश्न
| Weight | 540 g |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14.5 × 2 cm |
| University |















Shah Alam
Begam Hazrat Mahal
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