Bharat Ka Itihas (1200-1760)
भारत का इतिहास (1200-1760)
Author(s): Dr. Kaluram Sharma, Dr. Prakash Vyas
University: JNVU (Jodhpur)
Semester / Year: Year 2
Language: Hindi
Format: Paper Back
Pages: 456
Publisher: Panchsheel Prakashan
ISBN:
81-7056-289-9
Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
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विषय-सूची
- मध्यकालीन भारतीय इतिहास के महत्त्वपूर्ण स्त्रोत
सल्तनतकालीन भारतीय इतिहास के स्त्रोत; मुगलकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत; लिखित स्रोतों की समीक्षा। - तुर्क सत्ता की स्थापना :
तुर्कों की सफलता एवं उपलब्धियाँ (कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश, रजिया, बलबन तथा सल्तनत एवं मंगोल) कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210) – ऐबक द्वारा कठिनाइयों पर विजय; ऐबक का मूल्यांकन; आरामशाह; इल्तुतमिश – प्रारम्भिक जीवन; इल्तुतमिश की कठिनाइयाँ; समस्याओं का समाधान; इल्तुतमिश की मृत्यु; इल्तुतमिश की सफलता के कारण; इल्तुतमिश का चरित्र एवं मूल्यांकन; रूक्नुद्दीन फिरोजशाह; सुल्ताना रजिया – अमीरों के विद्रोह का दमन; नवीन नियुक्तियाँ; रजिया के समय की मुख्य घटनाएँ; रजिया के पतन के कारण; बहरामशाह; अलाउद्दीन मसूदशाह; नासिरूद्दीन महमूद; गयासुद्दीन बलबन-प्रारम्भिक जीवन; बलबन की समस्याएँ; बलबन का राजत्व सिद्धान्त; केन्द्रीय शासन को सुदृढ़ बनाना; सेना का पुनर्गठन; न्याय व्यवस्था; गुप्तचर व्यवस्था; राज्य की वित्तीय व्यवस्था; तुर्क अमीरों का दमन; उपद्रवकारी तत्त्वों का दमन; बंगाल की समस्या और तुगरिल का विद्रोह; मंगोल संकट और सीमान्त नीति; बलबन की मृत्यु; बलबन का चरित्र एवं मूल्यांकन; कैकूबाद और क्यूमर्स; मंगोल तथा सल्तनत; तुर्कों की सफलता के कारण। - खलजी वंश
(अलाउद्दीन खलजी – विजयें, प्रशासनिक एवं आर्थिक सुधार) खलजियों का परिचयः खलजी क्रान्ति; जलालुद्दीन फिरोज खलजी; अलाउद्दीन खलजी; उत्तर भारत की विजयें; गुजरात; रणथम्भौर; चित्तौड़; रानी पद्मिनी की कहानी; मालवा; सिवाना और जालौर; दक्षिण भारत की विजयें-वारंगल; देवगिरी; तैलंगाना; होयसल राज्य; पाड्य राज्य; देवगिरी; अलाउद्दीन की दक्षिण नीति की समीक्षा; मंगोल संकट-उत्तर- पश्चिम सीमान्त नीति; प्रशासनिक व आर्थिक सुधार; उलाउद्दीन का मूल्यांकन; शिहाबुद्दीन उमर; नासिरुद्दीन खुसरोशाह; खलजी वंश के पतन के कारण। - तुगलक वंश (मुहम्मद बिन तुगलक और फिरोज तुगलक )
गियासुद्दीन तुगलक – प्रारम्भिक जीवन; प्रारम्भिक कठिनाइयाँ; गियासुद्दीन की गृह नीति; विदेश नीति- साम्राज्य का पुनः विस्तार; गियासुद्दीन का मूल्यांकन; मुहम्मद बिन तुगलक – राज्यारोहण; मुहम्मद तुगलक का राजत्व सिद्धान्त; गृह नीति-सुधार और नवीन प्रवर्तन; विदेश नीति; विद्रोह; विजयनगर के हिन्दू राज्य की नींव; बहमनी राज्य की नींव; गुजरात का विद्रोह और सुल्तान की मृत्युः मुहम्मद तुगलक और अमीर वर्ग; मुहम्मद तुगलक का चरित्र एवं मूल्यांकन; फिरोजशाह तुगलक-फिरोज का राज्यारोहण; फिरोज के उत्तराधिकार को चुनौति; गृह-नीति; धार्मिक नीति; विदेश नीति; फिरोज का चरित्र एवं मूल्यांकन; फिरोज के उत्तराधिकारी । - प्रान्तीय राज्यों का उद्भव
केन्द्रीय शक्ति का पराभव; बंगाल, गुजरात, मालवा; खानदेश; कश्मीर; जौनपुर; सिन्ध और मुल्तान; मेवाड़; मारवाड़; आमेर; उड़ीसा; कामरूप; आसाम; विजयनगर और बहमनी राज्य; निष्कर्ष। - तैमूर का आक्रमण और तुगलक साम्राज्य का पतन
तैमूर द्वारा राज्य विस्तार; भारत पर तैमूर के आक्रमण के कारण; तैमूर का आक्रमण; दिल्ली की ओर प्रस्थान; तैमूर का सुल्तान मुहम्मद से युद्ध; दिल्ली की लूट और कत्लेआम; तैमूर का स्वदेश लौटना; तैमूर आक्रमण का परिणाम; तैमूर के आक्रमण का प्रभाव; तुगलक साम्राज्य के पतन के कारण। - भक्ति आन्दोलन और सूफी मत
भक्ति आन्दोलन की पृष्ठभूमिः भक्ति आन्दोलन और इस्लाम; भक्ति आन्दोलन के कारण; भक्ति का स्वरूप; भक्ति आन्दोलन के प्रवर्तक सन्त-रामानुजाचार्य, निम्बार्क, मध्वाचार्य, रामानन्द, वल्लभाचार्य, चैतन्य महाप्रभू, नामदेव, रैदास, दादू, कबीर, गुरू नानक, सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई; भक्ति आन्दोलन की विशेषताएँ; भक्ति आन्दोलन का महत्त्व और प्रभाव; सूफी मत- उत्पत्ति और विकास; भारत में सूफी सम्प्रदाय; सूफी दर्शन और सिद्धान्त; सूफी धर्म के विभिन्न सम्प्रदाय; सूफी मत का समाज पर प्रभाव । - मुगलों का आगमन और द्वितीय अफगान साम्राज्य
बाबर-प्रारम्भिक जीवन; समरकन्द पर आक्रमण; बाबर द्वारा भारत पर आक्रमण; पानीपत का प्रथम युद्ध; युद्ध के परिणाम; बाबर की सफलता के कारण; पानीपत के बाद बाबर की समस्याएँ; खानवा का युद्ध; राजपूतों की पराजय के कारण; खानवा-युद्ध के परिणामः चन्देरी पर आक्रमण; घाघरा का युद्ध; बाबर के अन्तिम दिन और मृत्यु, बाबर का मूल्यांकन; हुमायूँ – हुमायूँ की गद्दीनशीनी; आन्तरिक कठिनाइयाँ; बाह्य कठिनाइयाँ; हुमायूँ की भूलें; हुमायूँ और अफगान; हुमायूँ का पलायन; हुमायूँ की असफलता के कारण; हुमायूँ द्वारा पुनः सिंहासन प्राप्त करना; हुमायूँ का मूल्यांकन; द्वितीय अफगान साम्राज्य – शेरशाह सूर- प्रारम्भिक जीवन; जागीर प्रबन्धक के रूप में; मुगलों की सेवा में; बिहार का डिप्टी गवर्नर; चुनार पर अधिकार; हुमायूँ से प्रारम्भिक संघर्ष, शेरखाँ का बंगाल अभियान; रोहतासगढ़ पर शेरखाँ का अधिकार; बंगाल पर मुगलों का अधिकार; चौसा का युद्ध; बिलग्राम का युद्ध; शेरखाँ का राज्याभिषेक; हुमायूँ का पीछा किया जाना; गक्खर प्रदेश की विजय; बंगाल में व्यवस्था स्थापित करना; मालवा की विजय; रायसीन की विजय; मुल्तान और सिन्ध की विजय; मारवाड़ पर विजय; मेवाड़ विजय और राजपूताना पर नियंत्रण; कालिंजर विजय; शेरशाह का मूल्यांकन; शेरशाह के उत्तराधिकारी। - राज्य और समाज (राजनैतिक एवं प्रशासनिक संस्थाएँ व शासकीय वर्ग)
शेरशाह से पूर्व राजनैतिक एवं प्रशासनिक संस्थाएँ (सल्तनतकालीन); शेरशाह द्वारा स्थापित राजनैतिक एवं प्रशासनिक संस्थाएँ; केन्द्रीय प्रशासन; प्रान्तीय शासन; परगनों की शासन व्यवस्था; न्याय प्रशासन; पुलिस प्रशासन; गुप्तचर विभाग; व्यापार-वाणिज्य; ग्राम शासन व्यवस्था; भूमिकर व्यवस्था; सैन्य प्रबन्ध; मुद्रा व्यवस्था; सार्वजनिक कार्य; मध्यकालीन भारतीय समाज। - अर्थव्यवस्था वाणिज्य व्यापार व नगरीय केन्द्र
उपज; प्रौद्योगिकी; कृषि; उद्योग धन्धे- वस्त्र उद्योग; धातु उद्योग; कागज उद्योग; चमड़ा उद्योग; चीनी उद्योग; अन्य उद्योग; व्यापार तथा वाणिज्य; विदेशी व्यापार; समुद्री व्यापार; थल मार्ग से व्यापार; व्यापार सन्तुलन; विदेशी तथा भारतीय व्यापारी; आन्तरिक व्यापार; परिवहन के साधन; अन्तर्प्रादेशिक व्यापार; नगरीय केन्द्र; सारांश। - मुगल कला, स्थापत्य एवं साहित्य
पृष्ठभूमि; सल्तनतकालीन स्थापत्य कला; खलजी स्थापत्य कला; तुगलककालीन स्थापत्य कला; सैयद और लोदी काल की इमारतें; सूर वंश की इमारतें; मुगल कला, स्थापत्य और साहित्य-स्थापत्य कला; बाबर और हुमायूँकालीन स्थापत्य कला; अकबरकालीन स्थापत्य कला; जहाँगीरकालीन इमारतें; मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल; पतनोन्मुख स्थापत्य कला; चित्रकला; अन्य ललित कलाएँ; मध्यकालीन साहित्य। - साम्राज्य का सुदृढ़ीकरण एवं क्षेत्रीय विस्तार और संयुक्त शासकीय वर्ग का उदय
अकबर- प्रारम्भिक कठिनाइयाँ, पानीपत का दूसरा युद्ध; प्रतिद्वन्द्वियों का अन्त; बैरामखाँ का पतन; हरम का प्रभाव और उससे मुक्ति; अकबर द्वारा साम्राज्य विस्तार; अकबर की राजपूत नीति; सलीम का विद्रोह; अकबर की मृत्युः अकबर का व्यक्तित्व; जहाँगीर-शासन नीति; खुसरो का विद्रोह; साम्राज्य विस्तारः नूरजहाँ खुर्रम का विद्रोह; महाबतखाँ का विद्रोह; जहाँगीर के अन्तिम दिन; जहाँगीर का मूल्यांकन; शाहजहाँ- राज्यारोहण; खानजहाँ लोदी का विद्रोह; बुन्देलखण्ड का विद्रोह; पुर्तगालियों का दमन; मध्य एशिया विषयक नीति; दक्षिण नीति; शाहजहाँ के अन्तिम दिन; शाहजहाँ का मूल्यांकन; औरंगजेब- उत्तराधिकार संघर्ष; राज्यारोहण, खजुवा का युद्ध; देवराई का युद्ध; पूर्वोत्तर सीमान्त नीति; पश्चिमोत्तर सीमान्त नीति; औरंगजेब की दक्षिण नीति; औरंगजेब की राजपूत नीति; औरंगजेब के अन्तिम दिन; औरंगजेब का मूल्यांकन; मुगल साम्राज्य में संयुक्त शासकीय वर्ग। - मुगल साम्राज्य-1707 ई.
मुगलों का राजपूतों, सिक्खों, दक्षिणी राज्यों, मराठों, फारस व मध्य एशिया से सम्बन्ध मुगल साम्राज्य : 1707 ई.; मुगल-राजपूत एवं सिक्ख सम्बन्ध; बाबर- राजपूत सम्बन्धः हुमायूँ-राजपूत सम्बन्धः अकबर-राजपूत सम्बन्ध; जहाँगीर-राजपूत सम्बन्धः शाहजहाँ-राजपूत सम्बन्ध; औरंगजेब-राजपूत सम्बन्ध; मुगल-राजपूत सम्बन्धों की समीक्षा; मुगल-सिक्ख सम्बन्ध; जहाँगीर और सिक्ख सम्प्रदाय; शाहजहाँ और सिक्ख सम्प्रदाय; औरंगजेब और सिक्ख सम्प्रदाय; मुगलों का दक्षिणी राज्यों व मराठों से सम्बन्ध-अकबर के पूर्व स्थिति; अकबर और दक्षिण के राज्य; जहाँगीर और दक्षिण के राज्य; शाहजहाँ और दक्षिण के राज्य; औरंगजेब और दक्षिण के राज्य; मुगल-मराठा सम्बन्ध- शिवाजी का मुगलों से संघर्ष; मुगलों का मध्य एशिया व फारस से सम्बन्ध- अकबर की काबुल विजय; बलख व बदख्शा पर आक्रमण; कन्धार पर आक्रमण। - उत्तर-मुगलकालीन भारत (1707-1760)
मुगल साम्राज्य का विघटन; मुगल साम्राज्य का पतन कारण; औरंगजेब के उत्तराधिकारी; मुगल दरबार में दलबन्दी; विभिन्न शक्तियों का प्रबल होना; यूरोपीय जातियों का आगमन। - मुगल शासन व्यवस्था एवं संस्थाएँ
सम्राट; मुगल शासन के मुख्य अधिकारी; प्रान्तीय शासन व्यवस्था; मुगलों की सैनिक व्यवस्था; वित्त एवं राजस्व व्यवस्था; न्याय व्यवस्था; मुगल शासन व्यवस्था का मूल्यांकन; भूमि सम्बन्धी व्यवस्थाएँ; मुगलों की भू- राजस्व व्यवस्था का मूल्यांकन; मनसबदारी प्रथा; जागीरदारी प्रथा। - राजपूत : प्रशासनिक संरचना एवं संस्थाएँ
शासक वर्ग; सामन्त वर्ग; मुत्सद्दी वर्ग; मन्त्रिमण्डल; स्थानीय प्रशासन; नगर प्रशासन; ग्राम प्रशासन; पंचायत व्यवस्था; राजस्व प्रशासन; न्याय प्रशासन; सैनिक प्रशासन । - राजपूत राज्यों में समाज और अर्थव्यवस्था
समाज-विविध जातियाँ और व्यवसाय; सामाजिक जीवन; समाज में धर्म; अर्थव्यवस्था-कृषि; व्यापार-वाणिज्य; प्रमुख मार्ग; प्रमुख व्यापारिक केन्द्र; परिवहन एवं मार्गों की सुरक्षा; निर्यात व्यापार; आयात व्यापार; व्यापारियों के कार्य; चुंगी एवं राहदारी शुल्क; मुद्रा; ब्याज तथा हुण्डी प्रथा; उद्योग-धन्धे।
| Weight | 410 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| University |















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