Beech Mein Sadak
बीच में सड़क
Original price was: ₹300.00.₹270.00Current price is: ₹270.00.
You Save 10%
Out of stock
“जयपुर तमाशा” के बाद “बीच में सड़क” अजय अनुरागी का दूसरा व्यंग्य उपन्यास है।
एक छोटे मुहल्ले और छोटे लोगों के बसने और बिछुड़ने की त्रासदी की कथा है यह। पलायन और विस्थापन की पीड़ा के बीज इसमें बिखरे हुए हैं।
एक बस्ती के बसने पर सुख-दुख, समस्याएँ- सुविधाएँ, संघर्ष-प्रेम, आत्मीयता-कटुता, समता- विषमता से सजा बहुरंगी संसार आकार पाता है। उसमें स्वप्न और आकांक्षाओं का आकाश झिलमिलाने लगता है। सब एक दूसरे से सामंजस्य करके जीवन का आनन्द खोज लेते हैं। व्यंग्यकार ने इसी में व्यंग्य रस खोज लिया है।
कूड़ा मुहल्ला अविभाजित उल्लास के रूप में उत्पन्न होता है। जिसमें एक सड़क का प्रारूप तो है लेकिन सड़क नहीं होती है। सड़क बनाने के लिए सामूहिक संघर्ष निरन्तर चलता रहता है। दोनों ओर बने मकानों के निवासी परस्पर प्रेम और प्रतिद्वन्द्विता का निर्वाह करते रहते हैं। इन्हीं घटनाओं से व्यंग्य निकलता रहता है।
उपन्यास के पात्र जीवन्त होकर अपने अधिकारों के लिए धरना, प्रदर्शन, आन्दोलन में भाग लेते रहते हैं। सबकी अपनी-अपनी विशेषताएँ हैं जिससे एक आत्मीय दुनिया का सृजन होता है। प्रशासनिक नाकामी के चलते भूमाफिया द्वारा अवैध रूप से बसाया गया कूड़ा मुहल्ला एक दिन “सिटी पार्क” के बहाने “सिटी मॉल” में बदल जाता है और कूड़ा मुहल्ला विस्थापन के दर्द को झेलता हुआ ओझल हो जाता है।
उपन्यास कथा अनेक विषमताओं-विकृतियों को उभारते हुए मनोस्थितियों का भी पर्दाफाश करती चलती है जिसकी रोचकता पठनीयता को प्रमाणित करती है।
| Weight | 260 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |
















Dr. Radhakrishnan : Vyakti aur Vichar
Vishav ke Adbhut Samundree Jeev
Up Samajshastrao Ka Parichya
Aadhunik Bharat ka Itihas
Sanskrit-Vyakaran Evam Nibandh-Rachna
Universe of Knowledge
Sudamacharit
Hindi Ekanki
Composition & Communication Gleanings
Anashwar Geet
Paryavaran Adhayan
Saiddhantik Samajshastra
Shiksha se Betion ke Chaere per Muskan
Soochna Ke Srot
Aadhunik Vishv ka Itihas
Vishv ki Vilakshan Machliyein
Bhartiya Samaj Mudde Aur Samasyan
Gandhi Chintan mein Satyagrah
Prathmik Vidyalya Me Bhasha Shiksha
Jeevan ki Sarthakta (Netikta ke Prernadayak prasang)
Reviews
There are no reviews yet.