Adhunik Hindi Kavita Ka Vikas
आधुनिक हिंदी कविता का विकास
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भारतेन्दु काल से लेकर वर्तमान तक आधुनिक हिंदी कविता के विकास का समग्र रेखांकन। यह कृति कविता के विभिन्न पड़ावों, वैचारिक मोड़ और शिल्पगत परिवर्तनों का विश्लेषण करती है, छात्रों और साहित्य प्रेमियों के लिए एक पूर्ण मार्गदर्शिका।
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आधुनिकता शब्द केवल कालसूचक ही नहीं है बल्कि एक विशेष चिंतनसरणि का परिचायक भी है। भारतीय इतिहास आधुनिक काल में अपनी पारम्परिक जड़ताओं से मुक्ति के लिए छटपटाता दिखायी देता है। हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल में भी हमें यही प्रवृत्ति दिखायी देती है और लगता है जैसे खड़ी बोली और गद्य का आविष्कार हिन्दी साहित्य को नयी तथा वैविध्यपूर्ण दिशाओं की ओर ले जाते हैं।
आधुनिक हिन्दी कविता का आरम्भ भारतेन्दु काल से ही होता है जहाँ हमें सहज ही आधुनिकता के उन्मेष का आभास हो जाता है। भारतेन्दु ब्रजभाषा का मोह नहीं छोड़ पाते किन्तु उन्हें लगने लगता है कि कविता भी खड़ी बोली में ही लिखी जाएगी। श्रीधर पाठक, अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध जैसे कवियों के प्रयासों से हिन्दी कविता का माध्यम खड़ीबोली बनती है तो मैथिलीशरण गुप्त, रामधारीसिंह दिनकर जैसे कवि हिन्दी को नयी रवानी प्रदान करते हैं। छायावादी कवि हिन्दी भाषा को सर्वथा नयी अभिव्यक्ति भंगिमाओं से लैस कर हिन्दी की क्षमताओं को उजागर करते हैं। बच्चन आदि जिस गीतिकाव्य परम्परा को समृद्ध करते हैं उससे हिन्दी कविता लोकप्रिय बनती है। राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत कविता भी लोगों की जबान पर चढ़ती है। प्रगतिवादी कविता से हिन्दी कविता के विकास में एक नया वैचारिक मोड़ आता है तो प्रयोगवाद और नयी कविता आधुनिक हिन्दी कविता को फिर नयी दिशाएँ प्रदान करते हैं।
नयी कविता के पश्चात् भी हिन्दी कविता नयी-नयी दिशाओं में विकास कर रही है। आधुनिक हिन्दी कविता का परिदृश्य बहुत वैविध्यपूर्ण है और इसे एक साथ समझना एक दुष्कर कार्य है। प्रस्तुत कृति में लेखकद्वय ने आधुनिक हिन्दी कविता के विकास को उसकी समग्रता में रेखांकित करने का प्रयास किया है ताकि पाठक आधुनिक हिन्दी कविता के विभिन्न पड़ावों और रंगों को समझ सकें। यह कृति आधुनिक हिन्दी कविता का समग्र परिचय, विकास तथा मूल्यांकन प्रस्तुत करती है।
| Weight | 375 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |















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