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  • Sale! Baal Vikas : Samasya aur Samadhan

    Baal Vikas : Samasya aur Samadhan

    Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹200.00.

    Baal Vikas : Samasya aur Samadhan बालक के जीवन में बचपन के पहले सात-आठ साल बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। डॉ. जमनालाल बायती द्वारा संपादित ‘बाल विकास: समस्या और समाधान’ बालक के सम्यक् विकास में परिवार, समाज और सरकार की भूमिका का विश्लेषण करती है। यह कृति बाल-मन पर पड़ने वाले घात-प्रतिघातों और सुख-सुविधाओं के प्रभावों पर प्रकाश डालती है, जो माता-पिता, शिक्षाविदों और योजनाकारों के लिए उपयोगी है।

  • Sale! Madan Mohan Malviya : Vyaktitva avam Krititva

    Madan Mohan Malviya : Vyaktitva avam Krititva

    Original price was: ₹300.00.Current price is: ₹270.00.

    महामना पण्डित मदनमोहन मालवीय भारत की ऐसी विरल विभूति थे, जो भारतीय मानस के साकार रूपक थे। स्वच्छ धवल वस्त्रों से सज्जित, सिर पर साफा, ललाट पर चन्दन की सुन्दर बिन्दी, इकहरा बन्दन सात्विकता से उद्भासित मुखमण्डल-यह उनका पार्श्व रूप था तथापि मूलतः वे एक आदर्श, संवेदनशील और उदार हृदय हिन्दू थे। पत्रकारिता को कला…

  • Sale! Charnam Sharnam Gachaami

    Charnam Sharnam Gachaami

    Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹180.00.

    चरणम् शरणम् गच्छामि’ अजय अनुरागी के विविधता एवं नवीनता से युक्त प्रभावी व्यंग्यों का ऐसा संग्रह है जिसमें उपेक्षित एवं आम आदमी की पीड़ा को जुबान मिली है। इन व्यंग्यों में विज्ञापन जगत की अस्थायी चकाचौंध से लेकर राजनीति के झूठे झांसों व वादों के अभ्यस्तों, समाज की वैषम्यपूर्ण सोच से लेकर वैयक्तिक नैतिक पतन…

  • Sale! Sanskriti Shiksha aur Cinema

    Sanskriti Shiksha aur Cinema

    Original price was: ₹300.00.Current price is: ₹270.00.

    संस्कृति, शिक्षा और सिनेमा के अंतरसंबंधों पर हेतु भारद्वाज के बेबाक आलेखों का संग्रह। यह पुस्तक अपने समय के सवालों, मानवीय संघर्षों और समाज की विसंगतियों पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है, जो पाठक को सोचने पर विवश करती है।

  • Sale! Sanskriti aur Sahitya

    Sanskriti aur Sahitya

    Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹180.00.

    Sanskriti aur Sahitya डॉ. हेतु भारद्वाज की यह कृति संस्कृति पर निष्पक्ष भाव से विचार करती है, जो सांस्कृतिक संकट और अहमवादी पढ़ाकूपन से मुक्त है। यह संग्रह स्त्री अस्मिता, शिक्षा, भाषा, राजनीतिक संकीर्णता और साहित्य की प्रासंगिकता पर तार्किक विचार-पद्धति से हस्तक्षेप करता है, मानवीय राग और अग्रगामिता से ओत-प्रोत है।

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