Madhyekalin Hindi Kavita
₹120.00यह पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार की गई है, जिससे विद्यार्थियों को विषय की स्पष्ट, व्यवस्थित एवं परीक्षा-उपयोगी समझ प्राप्त हो सके।
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यह पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार की गई है, जिससे विद्यार्थियों को विषय की स्पष्ट, व्यवस्थित एवं परीक्षा-उपयोगी समझ प्राप्त हो सके।

यह पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार की गई है, जिससे विद्यार्थियों को विषय की स्पष्ट, व्यवस्थित एवं परीक्षा-उपयोगी समझ प्राप्त हो सके।

यह पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार की गई है, जिससे विद्यार्थियों को विषय की स्पष्ट, व्यवस्थित एवं परीक्षा-उपयोगी समझ प्राप्त हो सके।

विषय-सूची अध्याय अंग्रेजों के आगमन के समय भारत की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति भारत में यूरोपीय शक्तियों का प्रवेश – पुर्तगालियों का प्रवेश, डचों का प्रवेश, अंग्रेजों का आगमन, फ्रांसीसियों का आगमन। भारत की राजनीतिक स्थिति- औरंगजेब के अयोग्य उत्तराधिकारी, स्वायत्तशासी राज्यों का उदय- हैदराबाद, बंगाल, बिहार और उड़ीसा, अवध, गुजरात, मालवा, पंजाब और राजस्थान,…

विषय-सूची अध्याय 1. भारतीय संस्कृति (अर्थ, आदर्श और विविधता में एकता) संस्कृति का अर्थ; संस्कृति का उद्भव; संस्कृति का स्वरूप; सभ्यता और संस्कृति में भेद; भारतीय संस्कृति की मूलभूत विशेषताएँ; संस्कृति का निर्माण। 2. सैन्धव धर्म एवं समाज सभ्यता का विस्तार क्षेत्र; सभ्यता का काल; सभ्यता के निर्माता; सैन्धव धर्म के आधार; परमपुरुष प्रजापति की…

विषय-सूची अध्याय 1. सामान्तवाद का उदय एवं पतन सामन्तवाद का अर्थ, सामन्तवाद का उदय: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामन्तवाद का विकास, सामन्तवाद के विकास के कारण, सामन्ती कार्य विधि, सामन्तों के कर्तव्य, सामन्ती समाज और आर्थिक जीवन-कृषि का विकास, मेनर व्यवस्था, सामन्तवाद के पतन के कारण, सामन्त प्रथा के लाभ, सामन्त प्रथा के दोष। 2. पुनर्जागरण ऐतिहासिक…

विषय-सूची अध्याय राजस्थान का भौगोलिक परिचयभौगोलिक स्थिति; पर्वतीय प्रदेश; पठारी प्रदेश; मैदानी भाग; रेगिस्तानी क्षेत्र; राजस्थान में नदियाँ; जयवायु और वनस्पति; जन-जीवन पर प्रभाव; पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान के मुख्य राज्य। राजस्थान के इतिहास के मुख्य स्त्रोतमुख्य साधनों का वर्गीकरण; पुरातात्त्विक स्त्रोत- बिजौलिया शिलालेख; नेमीनाथ (आबू) के मन्दिर की प्रशस्ति; चीरवे का शिलालेख; श्रृंगी ऋषि…

विषय-सूची मध्यकालीन भारतीय इतिहास के महत्त्वपूर्ण स्त्रोतसल्तनतकालीन भारतीय इतिहास के स्त्रोत; मुगलकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत; लिखित स्रोतों की समीक्षा। तुर्क सत्ता की स्थापना : तुर्कों की सफलता एवं उपलब्धियाँ (कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश, रजिया, बलबन तथा सल्तनत एवं मंगोल) कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210) – ऐबक द्वारा कठिनाइयों पर विजय; ऐबक का मूल्यांकन; आरामशाह; इल्तुतमिश – प्रारम्भिक…

विषय-सूची इतिहास के स्त्रोत : इतिहास पर भूगोल का प्रभाव इतिहास के स्रोत – भारतीय धर्मग्रन्थ – ब्राह्मण धर्म ग्रन्थ, बौद्ध धर्म ग्रन्थ, जैन धर्म ग्रन्थ। ऐतिहासिक और समसामयिक ग्रन्थ। पुरातत्त्वसम्बन्धी साक्ष्य- अभिलेख या उत्कीर्ण लेख, कलाकृतियाँ, स्मारक और भग्नावशेष, मिट्टी के बर्तन व मुद्रायें, सिक्के। विदेशियों के विवरण-यूनानी लेखक, चीनी लेखक, तिब्बती लेखक,…

वृद्धावस्था जीवन की सांध्य बेला है। यह दिन ढले शाम की तरह है जो धीरे-धीरे रात्रि के गहन अंधकार में तब्दील होता है और अन्ततः मृत्युरूपी रात्रि के सन्नाटे में विलीन हो जाता है। वृद्धावस्था का समापन तो चिरनिद्रा में सोने पर ही होता है। वृद्धावस्था जीवन का अन्तिम पड़ाव है, आखिरी बेला है। इस…

मेडिकल विज्ञान की दृष्टि से मस्तिष्क की पीयूष ग्रंथि द्वारा विशेष हार्मोन्स का निर्माण होने पर प्यूबर्टी या किशोरावस्था आरम्भ होती है। ये हार्मोन्स जननेन्द्रियों का विकास करते हैं, इन्हीं के कारण किशोरावस्था में शारीरिक- भावात्मक बदलाव होते हैं। इस समय में माता-पिता की भूमिका किशोर बच्चों की समस्याओं को समझकर सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार से उनमें…

बालक प्रकृति की, भगवान् की सर्वश्रेष्ठ कृति है, अद्भुत देन है, उपहार है। वे अबोध होते हैं, निश्छल होते हैं, उनका व्यवहार कृत्रिम नहीं होता, वे अपने व्यवहार में बनावटीपन नहीं लाते हैं। बालमन सदैव ही जटिलताओं से परिपूर्ण रहा है। उनका व्यवहार सदैव ही अनबूझा रहा है, पहेली रहा है। कोई नहीं कह सकता,…


बालक देश के कर्णधार हैं। सृष्टि के अनुपम वरदान हैं। भारत के भविष्य हैं। विश्व के कीर्तिमान हैं। बालक ही समय के साथ पल-बढ़कर किशोर, युवा, प्रौढ़ बनते हैं तथा समस्त जिम्मेदारियों को निभाते हुए देश को प्रगति के पथ पर ले जाते हैं। अतः उनकी देखभाल, पालन-पोषण, शिक्षा-दीक्षा की समुचित व्यवस्था बाल्यकाल से ही…

पहला सुख निरोगी काया’, यह कोरी कहावत नहीं अपितु शत-प्रतिशत सच है। स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन को प्रसन्नतापूर्वक जी सकता है तथा कठिन परिस्थितियों में भी शांत चित्त होकर जटिल-से-जटिल समस्याओं को सुलझा सकता है। वह विद्यार्जन, ज्ञानार्जन एवं धनार्जन कर देश को उन्नति के शिखर तक ले जा सकता है तथा विकास का परचम…

कला मनुष्य की भावाभिव्यक्ति का एक सुन्दर, श्रेष्ठ एवं सशक्त माध्यम है। कला ही व्यक्ति के जीवन में वह ऊर्जा, ऊष्मा, उमंग, तरंग, उल्लास, उत्साह का संचार करता है जिससे पुष्पित पल्लवित होकर व्यक्ति प्रगति के पथ पर अग्रसर होते हुए अपने लक्ष्यों एवं उद्देश्यों की प्राप्ति करता है तथा परिवार सहित आनंदपूर्वक जीवन व्यतीत…

उत्तम शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यावश्यक है “उपयुक्त मकान”, चाहे वह निजी हो, सरकारी हो अथवा किराये का। मकान व्यक्ति की अनिवार्य आवश्यकता है जिसमें वह परिवार सहित रहकर पारिवारिक लक्ष्यों की पूर्ति करते हुए अपने विकास का परचम सम्पूर्ण संसार में लहराता है। परन्तु मकान हेतु भूखंड कैसा होना चाहिए,…

हमारे शास्त्रों में मनुष्य के स्थूल शरीर के साथ एक सूक्ष्म शरीर की कल्पना की गयी है। स्थूल शरीर की रचना पाँच तत्त्वों से हुई मानी गई है तो सूक्ष्म शरीर की पाँच कोशों से। इनमें सबसे पहला अन्नमय कोश है। वह आधारभूत कोश है-प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश तथा ज्ञानमय कोश उसके ही…

आहार विज्ञान एवं पोषण (Aahar Vigyan avam Poshan) एक मानक हिंदी पाठ्यपुस्तक है, जिसमें भोजन एवं पोषण के मूल सिद्धांत, संतुलित आहार, विटामिन, खनिज, विभिन्न आयु वर्गों के लिए पोषण, आहार नियोजन तथा उपचारात्मक पोषण जैसे विषयों को पाठ्यक्रमानुसार प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक गृह विज्ञान एवं पोषण से संबंधित पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है।

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