Ashok Kumar Singh

प्रो. अशोक कुमार सिंह महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के इतिहास विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं पूर्व अध्यक्ष हैं। वे भारत सरकार की इंडियन हिस्टोरिकल रिकॉर्ड्स कमेटी के सदस्य तथा भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् (ICHR), नई दिल्ली के वरिष्ठ अकादमिक फेलो रह चुके हैं।

उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में एम.ए. एवं पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त उन्होंने उर्दू, फ़ारसी एवं अरबी भाषाओं में भी विशेष अध्ययन किया है, जिससे मध्यकालीन भारतीय इतिहास के मूल स्रोतों के अध्ययन में उन्हें विशिष्ट विशेषज्ञता प्राप्त हुई।

प्रो. सिंह 70 से अधिक शोध-पत्र, आलेख, पुस्तक-समीक्षाएँ, संस्मरण एवं पुस्तक-प्रस्तावनाएँ लिख चुके हैं। उन्हें श्री नटनागर शोध संस्थान, सीतामऊ (मध्य प्रदेश) द्वारा प्रतिष्ठित महाराजकुमार डॉ. रघुबीर सिंह राष्ट्रीय इतिहासकार पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

उनकी प्रमुख कृतियों में सल्तनत काल में हिन्दू प्रतिरोध, इतिहासकार एवं साहित्यकार : रघुबीर सिंह, भारतीय साहित्य के निर्माता : रघुबीर सिंह, तुगलककालीन इतिहासकार एवं इतिहास-लेखन, सल्तनतकालीन इतिहासकार एवं इतिहास-लेखन, मध्यकालीन भारतीय इतिहास : स्रोत एवं लेखन, मध्यकालीन भारत में हिन्दू प्रतिरोध (भाग 1 एवं 2) तथा मध्यकालीन भारतीय इतिहास के कतिपय पहलू (भाग 1 एवं 2) जैसी महत्वपूर्ण कृतियाँ सम्मिलित हैं। मध्यकालीन भारतीय इतिहास, इतिहास-लेखन एवं स्रोत-अध्ययन के क्षेत्र में उनका योगदान व्यापक रूप से मान्य एवं सम्मानित है।

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  • Sale! Saltantakalin Itihaskar Evam Itihas-Lekhan

    Saltantakalin Itihaskar Evam Itihas-Lekhan

    Original price was: ₹350.00.Current price is: ₹315.00.

    Saltantakalin Itihaskar Evam Itihas-Lekhan भारतीय वाङ्मय में इस्लाम की सबसे बड़ी देन इतिहास-लेखन के रूप में है। डॉ. अशोक कुमार सिंह की यह कृति सल्तनतकालीन इतिहास लेखकों—हसन निजामी, मिनहाज सिराज, अमीर खुसरो, जियाउद्दीन बरनी—की कृतियों की विवेचना करती है। यह फारसी इतिहास-लेखन परंपरा के प्रभावों और इस काल के इतिहास-लेखन के गुण-दोषों पर प्रकाश डालती है।

  • Sale! Afghan Itihaskar aur Itihas-Lekhan

    Afghan Itihaskar aur Itihas-Lekhan

    Original price was: ₹800.00.Current price is: ₹599.00.

    मध्यकालीन भारत के इतिहास में लोदी एवं सूर वंश के नेतृत्व में अफगान शासकों ने लगभग एक शताब्दी तक उत्तर भारत पर शासन किया। भारतीय इतिहास की इस महत्त्वपूर्ण अवधि को समझने के लिए समकालीन अफगान इतिहासकारों के लेखन का विशेष महत्व है। यद्यपि इन दोनों अफगान राजवंशों का कोई पूर्ण एवं निर्विवाद समकालीन इतिहास-ग्रन्थ उपलब्ध नहीं है, फिर भी विभिन्न अफगान इतिहासकारों द्वारा लिखित ग्रन्थ इस काल के राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास के अध्ययन के प्रमुख स्रोत हैं।

    इस पुस्तक में हसन अली, शेख रिज्कुल्लाह मुश्ताकी, अब्बास खाँ सरवानी, मुहम्मद कबीर, अहमद यादगार, अब्दुल्ला तथा ख्वाजा नियामतुल्ला जैसे प्रमुख अफगान इतिहासकारों के व्यक्तित्व, कृतित्व एवं इतिहास-लेखन का विस्तृत एवं आलोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, मुगल इतिहासकार निजामुद्दीन अहमद, अब्दुल कादिर बदायूँनी तथा अबुल फ़ज़ल द्वारा अफगानों के संबंध में व्यक्त विचारों की संक्षिप्त समीक्षा भी सम्मिलित की गई है।

    मध्यकालीन भारतीय इतिहास, इतिहास-लेखन (Historiography) तथा ऐतिहासिक स्रोतों के अध्ययन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों एवं इतिहास के अध्येताओं के लिए यह पुस्तक एक उपयोगी एवं प्रामाणिक संदर्भ ग्रन्थ है।

  • Sale! Tuglak Kaleen Itihaskar avam Itihas

    Tuglak Kaleen Itihaskar avam Itihas

    Original price was: ₹500.00.Current price is: ₹450.00.

    Tuglak Kaleen Itihaskar avam Itihas भारतीय वाङ्मय में इस्लाम की सबसे बड़ी देन इतिहास-लेखन के रूप में है। डॉ. अशोक कुमार सिंह की यह कृति तुगलक वंश (1320-1414 ई.) के शासकों के समय हुए मुस्लिम इतिहास-लेखन पर प्रकाश डालती है, जिसमें अमीर खुसरो से लेकर शम्स सिराज अफीफ तक के लेखकों की कृतियों का गंभीर विवेचन किया गया है।

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