Sahriya Janjati : Sahitya Evam Sanskriti
सहरिया जनजाति : साहित्य एवं संस्कृति
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Sahriya Janjati : Sahitya Evam Sanskriti वर्तमान में समाज के सभी वर्गों की जीवन पद्धति में तेजी से परिवर्तन हो रहा है, किन्तु सहरिया जनजाति आज भी अपनी परम्परागत दयनीय जीवन जी रही है। डॉ. रश्मि श्रीवास्तव की यह साहसपूर्ण कृति सहरियाओं के लोक साहित्य, संस्कृति और कलापरक पक्षों का अध्ययन प्रस्तुत करती है, जो इस अल्पज्ञात जनजाति के जीवन की बहुआयामी झांकी दिखाती है।
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वर्तमान समय में समाज के सभी वर्गों की जीवन पद्धति में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। लेकिन आज भी समाज में कुछ ऐसे वर्ग हैं जो अपनी परम्परागत रूढ़िवादी दयनीय तथा स्तरहीन जीवन जी रहे हैं।
सहरिया जनजाति एक ऐसी जनजाति है जिस पर अब तक बहुत अधिक नहीं लिखा गया है। उनके लोक साहित्य, संस्कृति और कलापरक पक्षों का अध्ययन तो और भी कम हुआ है। ऐसे में सहरियाओं की स्थिति एवं उनके जीवन के विभिन्न पक्षों को देखते हुए लेखिका ने सहरियाओं के लोक साहित्य, संस्कृति एवं कला पर लेखन कार्य करने का साहस किया। इस साहसपूर्ण कदम का परिणाम पाठकों के सामने है।
सहरियाओं पर किए गए इस अध्ययन में लेखिका को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, किन्तु संतोष की बात यह है कि लेखिका का यह विनम्र प्रयास इस विषय पर आगे भी कार्य करने की प्रेरणा देगा। फिलहाल तो लेखिका का छोटा- सा सपना साकार हुआ लगता है।
यद्यपि सहरिया जाति के जीवन पर यह अध्ययन पूर्ण नहीं है तथापि यह तो शुभारम्भ मात्र है। ऐसा अध्ययन कभी पूरा नहीं होता है। हम इसमें जितना अधिक डूबेंगे उतना ही अधिक आनंद प्राप्त होगा। निश्चय ही यह अध्ययन इस अल्पज्ञात जनजाति के जीवन की बहुआयामी झांकी प्रस्तुत करेगा।
| Weight | 470 g |
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| Dimensions | 22 × 14.5 × 2 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |




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