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Sahitya me Punji Nivesh

साहित्य में पूँजी निवेश

Author(s): Ajay Anuragi
Language: Hindi
Format: Hardcover
Pages: 152
Publisher: Jyoti Prakashan
Edition: First, 2005
ISBN: 81-87988-21-5

Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹180.00.

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व्यंग्य विधा समाज से सीधा सम्बध रखने वाली विधा है। बदलते सामाजिक संदभों में व्यंग्य समाज की जरूरत बन गया है। अजय अनुरागी के व्यंग्य समाज की इसी जरूरत को पूरा करते हैं।

“साहित्य में पूँजी निवेश” में व्यंग्यकार अपने समय की सही और सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करता है, भले ही वह कुरूप और भ‌ट्टी ही क्यों न हो? वह समय के सच का प्रस्तुतीकरण इसलिए भी करता है कि समाज का चेहरा स्वस्थ, सुन्दर एवं निर्मल बना रहे। व्यंग्यकार परिवेश के प्रति जितना सजग होता है व्यंग्य – उतना ही सशक्त होता है। इस पुस्तक के व्यंग्य सिद्ध करते हैं कि व्यंग्यकार की दृष्टि उन गहराइयों तक भी पहुंचने में समर्थ हुई है जिन्हें हम उपेक्षित मानकर किनारे से ही लौट आते हैं। अजय अनुरागी उसी सामान्य और उपेक्षित सागर में डूबकर व्यंग्य की पैनी मार से समाज की सीपी को तोड़ते हुए मोती निकालते हैं।

व्यंग्यकार के पास व्यक्त्ति, राजनीति, साहित्य, धर्म तथा संस्कृति को समझने के अपने अलग मानक हैं, जो व्यंग्य के लिए सर्वथा उपयुक्त हैं। उसके पास विषयों की कमी नहीं है। वह मामूली से मामूली विषय को भी व्यंग्य की कसौटी पर कसता चलता है। इसीलिए कचरे से लेकर कालीन तक के विषय व्यंग्य का हिस्सा बन जाते हैं। इन व्यंग्य रचनाओं में समस्याओं के कारणों की पड़ताल भी हुई है, कि किस तरह व्यक्त्ति स्वयं सुविधा तथा समस्या में तब्दील हो जाता है।

अजय अनुरागी के व्यंग्य में जन प्रतिबद्धता उजागर होती है, जिसमें आम आदमी पूरी ईमानदारी के साथ प्रकट होता है। अनुरागी ने हिन्दी व्यंग्य के क्षेत्र में अपनी पृथक् पहचान बनायी है। प्रस्तुत व्यंग्य संग्रह” साहित्य में पूँजी निवेश” पाठकों की रुचि को परिष्कृत करते हुए उसमें व्यंग्य बोध उत्पन्न करने में सक्षम है।

Weight295 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 2 cm
Genre

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