Sahitya ke vividh rang aur sarokar
साहित्य के विविध रंग और सरोकार
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Sahitya ke vividh rang aur sarokar भारतेन्दु के भाषा प्रेम और स्वदेशी आंदोलन से प्रेरित, यह कृति हिन्दी भाषा के स्वरूप, व्याकरण और लिपि पर हुए वाद-विवादों को दर्शाती है। डॉ. बीना शर्मा द्वारा लिखित यह पुस्तक हिन्दी को राष्ट्रभाषा का गौरव दिलाने और जनता में राष्ट्रीय चेतना जगाने के प्रयासों को रेखांकित करती है, जो भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की एक बड़ी शक्ति थी।
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इसी कृति से-भारतेन्दु ने ‘निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल’ कहकर भाषा प्रेम को देश प्रेम से जोड़कर देखा। इस युग में भा का कोई निश्चित रूप नहीं बन पाया था। इसलिये इस युग में भाषा के स्वरूप, उसकी प्रकृति, व्याकरण तथा लिपि को लेकर खूब वाद-विवाद हुए। भारतेन्दु ने खड़ी बोली हिन्दी और उसके साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए पत्र-पत्रिकाओं तथा सभा-संस्थाओं की स्थापना की। भारतेन्दु और उनके मंडल के लेखकों ने हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा का गौरव दिया। उनका भाषाई आन्दोलन स्वदेशी आन्दोलन का अंग बन गया जो भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की बहुत बड़ी शक्ति थी। इसलिए उन्होंने अपने लेख “भारत वर्षोन्नति कैसे हो सकती है” में लिखा है ‘परदेसी वस्तु और परदेसी भाषा का भरोसा मत रखो, अपने देश में, अपनी भाषा मे उन्नति करो।’ इस तरह भारतेन्दु और उनके मण्डल के लेखकों ने भाषा- उन्नति को देशोन्नति से जोड़कर देखा। हिन्दी को जनता में राष्ट्रीय चेतना उभारने का सबल माध्यम माना।
| Weight | 275 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1 cm |
| Genre |




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