Machaliyeon ka Rochak evam Vilakshan Sansar
मछलियों का रोचक एवं विलक्षण संसार
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Machaliyeon ka Rochak evam Vilakshan Sansar मछलियों का संसार बड़ा रोचक और रहस्यमय है, जिसमें शारीरिक संरचना और आदतों में विलक्षण विशेषताएँ पाई जाती हैं। डॉ. परशुराम शुक्ला की यह पुस्तक फेफड़ा मछली, वृक्षों पर चढ़ने वाली पर्च, और वीणापुच्छ मछली जैसी अद्भुत मछलियों का परिचय देती है। यह समागम नृत्य, स्वजाति भक्षण, और लिंग बदलने जैसी आश्चर्यजनक जानकारियाँ प्रदान करती है।
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मछलियों का संसार बड़ा रोचक और रहस्यमय है। इनकी शारीरिक संरचना तथा भोजन और प्रजनन सम्बन्धी आदतों और व्यवहारों में ऐसी विलक्षण विशेषताएँ पायी जाती हैं, जिन पर सरलता से विश्वास नहीं किया जा सकता।
सामान्यतया मछलियों को पानी के बाहर जमीन पर लाया जाए तो वे शीघ्र ही मर जाती हैं, किन्तु फेफड़ा मछली, वृक्षों पर चढ़ने वाली पर्च आदि अनेक ऐसी मछलियाँ हैं, जो जमीन पर लम्बे समय तक जीवित रहती हैं। कुछ मछलियाँ तो ऐसी हैं, जो गर्मियों में तालाब का पानी सूख जाने पर तल में गड्ढा तैयार करती हैं और उसी के भीतर लम्बी ग्रीष्मकालीन निद्रा लेती हैं। वीणापुच्छ मछली ऐसी ही मछली है। कुछ मछलियाँ तालाब का पानी सूख जाने पर जमीन पर आ जाती हैं और नये तालाबों की खोज करती हैं।
सामान्यतया प्रजनन हेतु नर पानी में शुक्राणु छोड़ता है और मादा अण्डे देती है। शार्क जैसी कुछ मछलियाँ समागम (मेटिंग) करती हैं। ये प्रायः बच्चों को जन्म देती हैं। धरती पर कुछ ऐसी मछलियाँ भी पायी जाती हैं, जो भ्रामक समागम करती हैं। इन्हें देखने पर ऐसा लगता है कि नर- मादा समागम कर रहे हैं, किन्तु इनके प्रजनन अंग समागम के योग्य नहीं होते। हेडाक, शैड, सफरी आदि ऐसी ही मछलियाँ हैं।
इस पुस्तक में इसी प्रकार की मछलियों से सम्बन्धित रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारियाँ दी गयी हैं।
| Weight | 410 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |















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