Sale!

Hindi Upanyason mein moolyabhodh

हिन्दी उपन्यासों में मूलबोधः

Language: Hindi
Format: Hardcover
Pages: 200
Publisher: Jyoti Prakashan
Edition: First, 2014
ISBN: 978-81-87988-46-5

Original price was: ₹400.00.Current price is: ₹360.00.

You Save 10%

हिंदी उपन्यासों में मूल्यबोध की प्रक्रिया और उसके अंतरंग विश्लेषण। यह पुस्तक उपन्यास की रचना-प्रक्रिया, जीवन मूल्यों के उद्घाटन और स्थापन को गहराई से समझाती है, जो पाठक को मानव जीवन की भावनात्मकता और दिशा का अहसास कराती है।

In stock

Share:
GUARANTEED SAFE CHECKOUT
  • Visa Card
  • MasterCard

उपन्यास गद्य की ऐसी विधा है जिसने महाकाव्य का स्थान ले लिया है। मानव जीवन का जितना अंतरंग, वैविध्यपूर्ण और विश्वसनीय चित्रण महाकाव्य में होता था उससे कहीं अधिक यथार्थवादी चित्रण उपन्यास में होता है। उपन्यास ऐसी सशक्त गद्य विधा है जो मानव जीवन का साक्षात् पाठक के समक्ष रख देता है और पाठक स्वयं को उसका अंग ही समझने लगता है। कला के दो प्रमुख लक्ष्य माने गये हैं- मनोरंजन तथा हितोपदेश। उपन्यास ऐसा कला रूप है जो पाठक के मन को बाँध लेता है। वह पाठक के मानसिक संसार में प्रवेश कर मनुष्यता की भावनात्मकता की प्रतीति कराता है। उसे इच्छानुसार दिशा में मोड़ता है। आधुनिक शब्दावली में इस प्रक्रिया को मूल्यबोध कहते हैं। आज कोई कलाकृति सीधे-सीधे उपदेश देकर महान् नहीं बन सकती। महान् कृति पाठक को उपदेशात्मकता के माध्यम से प्रकाशित नहीं करती प्रत्युत उसके मानसिक संसार को अपेक्षित दिशा में उद्वेलित करती है। उद्वेलन की यह प्रक्रिया ही पाठक को जीवन मूल्यबोध का अहसास कराती है। प्रस्तुत प्रबंध में डॉ. रजनीश भारद्वाज ने कला और मूल्यबोध की इस प्रक्रिया को गहराई से समझा है तथा उपन्यास और मूल्यबोध के अंतः संबंधों को विश्लेषित किया है। कोई साहित्यिक कृति अपनी रचना-प्रक्रिया में किस प्रकार जीवन मूल्यों का उद्घाटन और स्थापन करती है, इसका सम्यक् विवेचन इस कृति में किया गया है। एक ओर इसमें हम उपन्यास की रचना प्रक्रिया को समझते हैं तो दूसरी ओर उसके उदात्त लक्ष्य को।

Weight310 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 1.5 cm
Genre

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Hindi Upanyason mein moolyabhodh”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Need help?