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Gautamiputra Bhag-1 (Saddharm Ka Mahavat)

गौतमीपुत्र भाग-1 (सद्धर्म का महावत)

Language: Hindi
Format: Hardcover
Pages: 416
Edition: First, 2010
ISBN: 978-81-7056-508-6

Original price was: ₹700.00.Current price is: ₹630.00.

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द्वितीय शताब्दी के संक्रांति काल पर आधारित यह ऐतिहासिक उपन्यास, गौतमीपुत्र सातकर्णि के अपराजेय व्यक्तित्व को चित्रित करता है। यह युग के ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहलुओं को सहजता से अभिव्यक्त करता है।

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यह कृति द्वितीय शताब्दी के उस संक्रान्ति काल पर लिखी गयी है, जिसमें एक ओर शकों तथा कुषाणों के आक्रमण और अतिक्रमण ने पश्चिमोत्तर भारत को एकसाथ अव्यवस्थित कर दिया था, दूसरी ओर यहाँ का आन्तरिक परिवेश भी जीवन-मूल्यों की रक्षा करने में सर्वथा असमर्थ सिद्ध हो रहा था। शैवों और बौद्धों के लिंग-पूजन-विधान तथा यौनाचार की छूट ने सर्वत्र अनेक सामाजिक विकृतियाँ उत्पन्न कर दी थीं।

पर न तो भारत भूमि का अध्यात्म-चिन्तन असिद्ध है और न इसका अंचल ही अनुर्वर है। नैतिक अवमूल्यन से व्याप्त उस क्षितिज को ज्ञान और मुक्ति के आलोक से जगमगाने के लिए इसने गौतमीपुत्र सातकर्णि नाम का एक दीप गढ़ा। इस गौतमीपुत्र की भुजाएँ शेषनाग के समान विशाल, पुष्ट तथा दीर्घ थीं। उसके हाथ अभयोदक-दान में निरन्तर गीले रहते थे, उसका तन-धन सहित मन प्रजा-वर्ग के सुख-दुःख में पूर्णतः साथ रहता था तथा जननी गौतमी और जन्मभूमि भारत की सेवा में प्रतिपल तल्लीन रहता था। उसने क्षहरात वंश का मूलोच्छेद किया था, सातवाहन वंश के यश को पुनः स्थापित किया था तथा अनेक समर-भूमियों में शत्रुओं पर विजय पायी थी।

ऐसा था गौतमी का वह सपूत, जिसके अपराजेय व्यक्तित्व के अंकन का लेखक ने इस कृति में प्रयास किया है। इसमें उस युग के ऐतिहासिक, सामाजिक, भौगोलिक और राजनीतिक ही नहीं, सांस्कृतिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक पटल भी अपने सहज रूप में अभिव्यक्ति पा सके हैं। शैवोपासना के विविध पक्ष, बौद्ध-विहारों की आचार-पद्धति एवं साधना- विधि, ब्राह्मण मत के उन्नयन तथा कर्मकाण्ड का भव्य अंकन इसे अनूठा गौरव प्रदान करता है। सामन्ती शासन-व्यवस्था, आस्थानमण्डपीय गरिमा, सांग्रामिकता, अध्यात्म-जीवन की पावनता आदि की गहन अनुभूति मन को मुग्ध कर देती है। पर्वतीय अंचलों, वन-प्रान्तरों, ऋषि-मुनियों के आश्रमों, शिक्षा तथा उसकी प्राप्ति के मानदण्डों आदि के चित्रण ने इसे जीवन्तता प्रदान की है। देश- प्रेम, राष्ट्रीय एकता, स्वस्थ सामाजिकता तथा जनसाधारण के अन्तरंग जीवन आदि की मार्मिक प्रस्तुतियों ने इस उपन्यास को मनोरम बनाया है।

Weight580 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 2.5 cm
Genre

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