Gandhi Aavdarhna mein nayi Taleem
गांधी अवधारणा में नई तालीम
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Gandhi Aavdarhna mein nayi Taleem डॉ. प्रवेश कुमार और मधुर श्रीवास्तव की यह पुस्तक गांधीजी की बुनियादी शिक्षा की संकल्पना और ‘नई तालीम’ के महत्व पर केंद्रित है। यह संस्कृति निर्माण, कर्म के माध्यम से शिक्षा, हस्त कौशल के विकास, और स्वावलम्बन के महत्व को दर्शाती है। यह कृति बताती है कि सच्ची शिक्षा से ही सच्चा ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है और कैसे बुनियादी शिक्षा भारत को बेरोजगारी से मुक्ति दिला सकती है।
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नई तालीम को हिन्दुस्तानी तालीम संघ के नाम से जाना जाता था। उसके बाद जैसे- जैसे स्वरूप बदलता गया, वैसे-वैसे नाम भी बदल गया। 1937 में वर्धा में हुए कांग्रेस सम्मेलन में बुनियादी शिक्षा की संकल्पना आई तो इसका सभी ने स्वागत किया। इस अधिवेशन में सरदार पटेल, विनोबा भावे, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, महात्मा गाँधी, काका साहेब कालेकर, आचार्य जे.बी. कृपलानी आदि सभी लोग उपस्थित थे।
बुनियादी शिक्षा का मूल आधार संस्कृति का निर्माण है और गाँधीजी के अनुसार संस्कृति मानव आत्मा का एक गुण है, जो उसके समस्त व्यवहारों में व्याप्त रहता है। सच्ची शिक्षा से ही सच्चा ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है और सच्चा ज्ञान की प्राप्ति के लिए कर्म के माध्यम से शिक्षा देना अनिवार्य है, जिसमें मानव के हस्त कौशल के विकास के साथ-साथ बुद्धि और आत्मा का विकास अनिवार्य है।
बुनियादी शिक्षा का मूल भाव स्वावलम्बन है और इसके बिना शोषण से मुक्ति नहीं पायी जा सकती है। वर्तमान शिक्षा पद्धति में सर्वत्र इसका अभाव दृष्टिगोचर होता है।
नई शिक्षा पद्धति के अन्दर अवश्य ही कुछ भाव स्वावलम्बन का डाला है किन्तु यथार्थ में इसकी कितनी क्रियान्विति संभव हो पाती है। यह भविष्य पर निर्भर होती है।
यह अवश्य है कि आजादी के पश्चात् यदि गाँधी के बुनियादी शिक्षा को अपनाया जाता तो अवश्य ही भारत जो बेरोजगारी, अर्द्ध बेरोजगारी सर्वत्र दृष्टिगोचर होती है वह नहीं होती।
| Weight | 325 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 15 × 1.5 cm |
| Textbook Genre |







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