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Ekla Chalo Re

एकला चलो रे

Author(s): Shyam Jangid
Language: Hindi
Format: Hardcover
Pages: 136
Edition: First, 2007
ISBN: 978-81-7056-402-7

Original price was: ₹150.00.Current price is: ₹135.00.

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Ekla Chalo Re समकालीन हिन्दी कहानी के विकास में श्याम जांगिड़ एक सुपरिचित नाम है। उनकी कहानियाँ न शैल्पिक-घटाटोप से आक्रांत हैं न भाषा के दिखावटी विलास से, बल्कि उनमें ज़िन्दगी की विद्रूपताएँ और अभावग्रस्तता के बावजूद जीवन के प्रति मोह का स्पंदन है। ‘एकला चलो रे’ संग्रह की कहानियाँ ‘हंस’, ‘कथादेश’ जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं और पाठक को चकित, झंकृत और व्याकुल करती हैं।

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समकालीन हिन्दी के विकास में जिन कहानीकारों ने बिना शोर-शराबे के अपनी कहानियों के द्वारा अपनी विशिष्ट पहचान बनायी है, उनमें श्याम जांगिड़ एक सुपरिचित नाम है। उनकी कहानियाँ न शैल्पिक-घटाटोप से आक्रांत हैं न भाषा के दिखावटी विलास से। श्याम जांगिड़ को उनके चारों ओर फैली ज़िन्दगी की विद्रूपताएँ कहानी लिखने को विवश करती हैं। इसलिए उनकी कहानियाँ किसी बने-बनाये शास्त्रीय ढांचे में नहीं अटतीं। इन कहानियों में जीवन का ऐसा स्पंदन है जो सारी अभावग्रस्तताओं के बावजूद जिन्दगी के प्रति मोह को टूटने नहीं देती। संकलन की सभी कहानियाँ ‘हंस’, ‘कथादेश’, ‘वर्तमान साहित्य’ जैसी प्रसिद्ध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं हैं तथा चर्चित रही हैं। श्याम जांगिड़ ने इन कहानियों में जिन्दगी के विद्रूप को सादगी और आत्मीयता के साथ अभिव्यक्ति दी है, इसीलिए इन कहानियों को पढ़ते समय पाठक को महसूस होता है कि वह स्वयं इन कहानियों का अंतरंग हिस्सा है। ये कहानियाँ पाठक को चकित, झंकृत और व्याकुल करती हैं क्योंकि कहानीकार ने इन्हें पूरी विश्वसनीयता प्रदान की है।

इन कहानियों में संघर्षशील जीवन का स्वाभाविक स्पंदन है। इन कहानियों के पात्र श्याम जांगिड़ ने अपने आसपास से उठाये हैं। उनकी जिजीविषा जीवन की अभावग्रस्तता से टकराती है और अपनी जीवंतता का परिचय देती है।

Weight300 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 1.5 cm
Genre

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