Ek Ghadhe ki Udasi
एक गधे की उदासी...
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Ek Ghadhe ki Udasi डॉ. अजय अनुरागी का यह आठवाँ व्यंग्य संग्रह व्यक्ति एवं समाज की विडम्बनाओं, विरोधाभासी प्रवृत्तियों और मन के अंतर्विरोधों का प्रकटीकरण है। इसमें राजनीति के छल-छद्मों और समाज में व्याप्त विसंगतियों पर तीखा प्रहार किया गया है, जो पाठक को संघर्ष की मशाल उठाए प्रकाश बिखेरता हुआ दिखाता है।
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डॉ. अजय अनुरागी का नाम हिन्दी के सशक्त व्यंग्यकारों में गिना जाता है। यह उनका आठवाँ व्यंग्य संग्रह है।
व्यंग्य लेखन एवं व्यंग्य आलोचना कर्म में समान रूप से हस्तक्षेप रखने वाले अजय अनुरागी ने हिन्दी साहित्य में अपनी मुकम्मल पहचान बनायी है। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में व्यंग्य स्तम्भकार के रूप में भी इनकी कलम निरन्तर चलती रही है।
प्रस्तुत व्यंग्य संग्रह में व्यक्ति एवं समाज की विडम्बनाओं का प्रकटीकरण हुआ है। इन व्यंग्यों के माध्यम से व्यक्ति की विरोधाभासी प्रवृत्ति के साथ-साथ मन के अन्तर्विरोधों को भी उभारा गया है। समाज में व्याप्त विसंगतियों पर व्यंग्यकार ने कई तरह से प्रहार किया है। पुस्तक में राजनीति के छल-छद्मों का वह संसार भी है जो किसी-न- किसी रूप में मनुष्य पर प्रभाव डाले बिना नहीं रहता है। इनमें विसंगतियों का दलदल है, पीड़ा का पारावार है जिसमें जनसामान्य निरन्तर संघर्ष की मशाल उठाए प्रकाश बिखेरता है।
व्यंग्य को गम्भीर एवं सार्थक कर्म मानने वाले अजय अनुरागी की लेखनी में धार और पैनापन निरन्तर बना रहता है। सामयिक प्रसंगों को चुटीलेपन एवं रोचकता के साथ प्रस्तुत करना व्यंग्यकार की विशेषता कही जा सकती है। साधारण विषयों को भी असाधारण तरीके से अभिव्यक्ति करके व्यंग्य सामर्थ्य को बढ़ा देने वाला यह व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई एवं शरद जोशी के बीच से अपने लिए रास्ता निर्मित करता प्रतीत होता है।
प्रस्तुत व्यंग्य संग्रह इस कथन का साक्षी है कि अजय अनुरागी के पास भाषायी कौशल है, शब्दों के सटीक प्रयोग की समझ है तथा व्यंग्य को व्यंग्य की तरह प्रस्तुत करने की संश्लिष्ट शैली भी है।
| Weight | 300 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 14.5 × 1 cm |
| Genre |
















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