₹80.00Original price was: ₹80.00.₹72.00Current price is: ₹72.00.
Lala Gokulchand Kr̥ta Begama Samru Ka Itihas लाला गोकुलचंद कृत बेगम समरू का इतिहास, ब्रिटिश लाइब्रेरी की फारसी पांडुलिपियों से लिया गया एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज है। महेंद्र नारायण शर्मा और राकेश कुमार शर्मा द्वारा प्रस्तुत यह कृति सरधना रियासत की सफल शासिका बेगम समरू के अनछुए प्रसंगों को उजागर करती है, और मुगल साम्राज्य के पतन तथा साम्राज्यवादी इतिहास-लेखन को समझने में सहायक है।
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Saltantakalin Itihaskar Evam Itihas-Lekhan भारतीय वाङ्मय में इस्लाम की सबसे बड़ी देन इतिहास-लेखन के रूप में है। डॉ. अशोक कुमार सिंह की यह कृति सल्तनतकालीन इतिहास लेखकों—हसन निजामी, मिनहाज सिराज, अमीर खुसरो, जियाउद्दीन बरनी—की कृतियों की विवेचना करती है। यह फारसी इतिहास-लेखन परंपरा के प्रभावों और इस काल के इतिहास-लेखन के गुण-दोषों पर प्रकाश डालती है।
₹300.00Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
समकालीन प्रशासनतंत्र न केवल समाज की सर्वांगीण स्थिति को प्रभावित करता है अपितु अन्त में वह इसी का अंग बन जाता है। मुग़ल शासन प्रणाली मोटे रूप से मध्य एशियाई, तुर्की तथा ईरानी परम्पराओं पर आधारित थी परन्तु भारतीय व्यवस्था के सम्पर्क में आने के बाद यह सम्भव नहीं था कि ये उससे अछूती रह…
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1858 के बाद के भारत का परिदृश्य पिछली शताब्दी से सर्वथा भिन्न था। इस युग का केन्द्रीय विषय भारतीय बौद्धिक मन पर पाश्चात्य प्रभाव है। 1857 के पूर्व ही भारत में एक राष्ट्रीय चेतना का जन्म हो चुका था जो एक लम्बी प्रक्रिया का परिणाम थी। अंग्रेजी शिक्षा के माध्यम से भारतीय विचारों में जो…
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किसी भी सुदृढ़ साम्राज्य की सततता के लिए स्थायी, दृढ़ और जनकल्याण उत्प्रेरक नीतियों की स्थापना अनिवार्य प्रक्रिया है। दूरदर्शी अकबर ने मुगल साम्राज्य को जो राजनीतिक और सांस्कृतिक गौरव प्रदान किया था वह औरंगजेब और उसके उत्तराधिकारियों के युग में धराशायी हो गया। मुगलों में उत्तराधिकार की स्थायी और निश्चित परम्परा न होने से…
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मुगलों के पतन के पश्चात् एक शताब्दी का इतिहास तीन शक्तियों-मराठा, उत्तर मुगल और अंग्रेज के मध्य सत्ता संघर्ष का इतिहास है। अट्ठारहवीं शताब्दी में अब्दाली के आक्रमण और मुगल अमीरों और सामन्तों के पारस्परिक झगड़ों के कारण मुगल साम्राज्य का अखिल भारतीय स्वरूप समाप्त हो गया। वह केवल दिल्ली का राज्य मात्र रह गया।…
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इतिहासकारों के अथक् प्रयत्नों से प्राचीन भारत का राजनीतिक इतिहास, मूल स्त्रोतों के क्षीण होते हुए भी, अब स्थूल आकार-प्रकार में रेखांकित किया जा सकता है। हड़प्पा सभ्यता की अन्वेषण से वैदिक साहित्य के अर्थ पर नया प्रकाश पड़ा है। अभिलेखों ने कलियुग की पौराणिक वंशावलियों की सत्यता का समर्थन किया है। पौराणिक इतिहास वैदिक…
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1920 के बाद का भारतीय इतिहास गांधीवादी युग से सम्बन्धित है। इस युग में गांधीजी के व्यक्तित्व और विचारों के अनुसार ही राष्ट्रीय आन्दोलन प्रगतिमान हुआ। भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन गांधीजी की उपलब्धियों का इतिहास है। गांधीजी के पूर्व विश्व में सशस्त्र क्रान्ति ही स्वतन्त्रता प्राप्ति का एक मात्र मार्ग माना जाता था। गांधीजी ने इस…
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मुगल सम्राटों में बाबर से लेकर शाहजहां तक का युग मुगल साम्राज्य के उत्थान के रूप में स्मरण किया जाता है। मुगल सम्राट्-बाबर, हुमायूँ, अकबर, जहांगीर और शाहजहां में अकबर को छोड़कर शेष सम्राट् बहुत अधिक बुद्धिमान या दूरदर्शी नहीं थे। बाबर और हुमायूँ तो इस देश की भूमि से जुड़ ही नहीं पाये। भारत…
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सातवीं शताब्दी में वर्द्धन साम्राज्य के पतन के पश्चात् से लगभग ग्यारहवीं शताब्दी के प्रारम्भ तक उत्तर भारत में गुर्जर प्रतीहार, चाहमान, चालुक्य, चन्देल, परमार, गहड़वाल, पाल, सेन तथा गंग जैसे अनेक राजवंशों का उदय हुआ जिन्होंने अपनी शक्ति को बढ़ाकर सम्पूर्ण उत्तरी भारत पर अधिकार करने का प्रयत्न किया। इस प्रयत्न में गुर्जर, प्रतीहार…
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कुषाणोत्तर भारतीय इतिहास में गुप्त सम्राज्य का काल केन्द्रीय आकर्षण का युग है। प्रायः भारतीय इतिहास में गुप्तकाल को राजनीतिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों की दृष्टि से ‘स्वर्ण काल’ और ‘क्लासिकल काल’ आदि नामों से अभिहीत किया जाता है। गुप्त युग के साम्राज्य को चरमोत्कर्ष पर ले जाने के लिए समुद्रगुप्त और चन्द्रगुप्त द्वितीय जैसे सम्राटों…
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Bharat Ka Itihas Avm Sanskriti (Praramb se 1526 E.) विश्व-इतिहास में भारतीय इतिहास एवं संस्कृति एक दैदीप्यमान नक्षत्र है, जिसे अमर और अनंत कहा जा सकता है। डॉ. कालूराम शर्मा और डॉ. प्रकाश व्यास की यह पुस्तक भारत के प्रारम्भ से 1526 ई. तक के इतिहास और संस्कृति का क्रमबद्ध विवेचन करती है। यह मुगल आक्रमणों, मध्यकालीन भक्ति आंदोलन, और हिंदू-मुस्लिम संस्कृतियों में समन्वय के प्रयासों को संक्षेप में बताती है, जो जिज्ञासु भारतीयों को अपने गौरवपूर्ण अतीत को समझने में मदद करेगी।
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Bharat Ka Itihas Avm Sanskriti (1527-1947) भारत का मध्यकाल एवं आधुनिक काल हमारी गौरवमयी धरोहर है। डॉ. कालूराम शर्मा और डॉ. प्रकाश व्यास द्वारा लिखित यह पुस्तक मुगल साम्राज्य की स्थापना, पतन, और शिवाजी के नेतृत्व में मराठों के अभ्युत्थान जैसी घटनाओं का विवेचन करती है। यह ब्रिटिश सत्ता के अभ्युदय, भारतीयों के प्रतिरोध, और स्वाधीनता संग्राम में उत्पन्न देश की एकता पर प्रकाश डालती है, जो युवा पीढ़ी में देश प्रेम और राष्ट्रीयता की भावना को प्रस्फुटित करती है।
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Rajasthan Ke Pramukh Shaktipeeth ‘राजस्थान के प्रमुख शक्तिपीठ’ नामक इस पुस्तक में तीस से अधिक प्राचीन देवी मंदिरों का इतिहास, लोकमान्यता, स्थापत्य, और कलात्मक महत्व को उजागर किया गया है। डॉ. राघवेन्द्र सिंह मनोहर द्वारा लिखित यह कृति शक्तिपूजा की प्राचीन परंपरा और लोक आस्था के केंद्रों का ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ सहज और रोचक ढंग से वृतांत प्रस्तुत करती है।
₹300.00Original price was: ₹300.00.₹270.00Current price is: ₹270.00.
Bhartiya Svatantrata Sangram भारतीय स्वाधीनता संघर्ष का 1857 से 1950 तक का वृत्तांत, डॉ. वी. एस. भार्गव द्वारा प्रस्तुत। यह पुस्तक 1857 के संघर्ष, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना, गांधीजी के जन-आंदोलनों और देश के विभाजन जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं का निष्पक्ष विश्लेषण करती है, साथ ही सुभाषचंद्र बोस और महिलाओं के योगदान पर भी प्रकाश डालती है।
₹300.00Original price was: ₹300.00.₹270.00Current price is: ₹270.00.
Mughal kalin Bharat ke Pramukh Itihaskar मुगलकालीन भारत के प्रमुख इतिहासकारों द्वारा तत्कालीन सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और राजनीतिक स्थिति के विवरणों का संग्रह। डॉ. दिनेश मांडोत की यह कृति मुगल बादशाहों के व्यक्तिगत चरित्र, प्रशासनिक व्यवस्था, साम्राज्य विस्तार के युद्धों, और आर्थिक-सामाजिक सुधारों जैसी विविध पक्षों की महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान करती है।
₹275.00Original price was: ₹275.00.₹220.00Current price is: ₹220.00.
This book is a study of the Agrarian Movement in Rajasthan from 1913 to 1947 A.D. The peasants in Rajasthan had to groan under a dual slavery, that of the Jagirdar, and of the Ruler, Many were the taxes, and cesses together with begar which the peasant had to bear along with a constant increase…