₹600.00Original price was: ₹600.00.₹480.00Current price is: ₹480.00.
वैदिककालीन अर्द्ध-नारीश्वर की अवधारणा से पोषित नारी की गौरवशालिनी परम्परा में घोषा, अपाला, सूर्या और मंत्रदृष्टा ऋषिकाएँ थीं। तो मध्यकाल में भारत के राजनीतिक पटल पर अहिल्याबाई, रज़िया सुल्तान या लक्ष्मीबाई जैसी जांबाज़ वीरांगनाएँ उदित हुईं। धार्मिक परिदृश्य पर भी लल्लेश्वरी, आण्डाल या मीरां जैसे हिमालयी व्यक्तित्व सम्पन्न साधिकाओं ने इस देश में नव- जागरण…
₹300.00Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
मनुष्य प्राचीनकाल से ही सागरों के बारे में जानकारी एकत्रित करने के लिये प्रयासरत रहा है। प्रारम्भिक काल में वैज्ञानिक प्रगति कम होने के कारण सागरों के जैविक परिवेश की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाई। लेकिन बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में उच्च स्तरीय वैज्ञानिक उपकरणों के विकास से हम सागरों के काफी समीप आ गये…
₹350.00Original price was: ₹350.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
आज के विश्व मानव समाज में महिला को मानवीयोचित न्याय नहीं मिल रहा है। पुरुष की अहंकारी मनोवृत्ति ने नारी को सदा पीछे धकेला है किन्तु आज के भौतिक अर्हताओं से चमत्कृत रूप पहले इस संसार में पुरुष नारी के सहयोग के बिना सुख व शान्ति व सन्तोष का जीवन नहीं जी सकता है। अब…
₹450.00Original price was: ₹450.00.₹360.00Current price is: ₹360.00.
प्रबन्ध एक गहन और गूढ़ विषय है। इसकी सम्पूर्ण जानकारी और इसे व्यावहारिक रूप प्रदान करने की प्रबन्धकीय क्षमता तभी विकसित हो सकती है जबकि प्रबन्ध-वर्ग इसे सही परिप्रेक्ष्य में ग्रहण करें; इसकी प्रकृति, क्षेत्र और सीमाओं से पूरी तरह से परिचित हों; आधुनिकतम प्रबन्धकीय विचारधाराओं का ज्ञाता हो, सभी प्रबन्धकीय कार्यों को सुनियोजित ढंग…
₹250.00Original price was: ₹250.00.₹200.00Current price is: ₹200.00.
श्री भट्ट जी ने संविधान के हर पहलू पर अत्यन्त गूढ़ अध्ययन करने के पश्चात् एक विहंगम दृष्टि डाली है तथा पाठकों को संविधान की रचना से अन्तिम संशोधन तक समझाने के लिए प्राचीन ऋषि-मुनियों एवं मनीषियों द्वारा लिखित स्मृतियों का विवेचन करते हुए तथा कौटिल्य के अर्थशास्त्र का हवाला देते हुए पूरे भारतीय इतिहास…
₹500.00Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
मेरे प्रिय लेखक हिन्दी व्यंग्य में दो तरह के लोग व्यंग्य लिख रहे हैं-एक वे, जिन्हें व्यंग्य की व्याकरण तथा सौन्दर्यशास्त्र की समझ है और दूसरे वे, जिन्हें इस चीज की कोई समझ नहीं। इसी दूसरे वर्ग में आप एक उपवर्ग उन लोगों का भी कर सकते हैं, जिन्हें खुद तो समझ है नहीं पर…
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
संवेदनहीनता से जड़ होती जिन्दगी की असंगत धारणाओं को कहानियों में पिरोने का एक सफल प्रयास है यह संकलन। सभी कहानियाँ देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में स्थान पा चुकी हैं। भाषा में प्रवाह होने से पठनीयता का दायरा बढ़ा है। लेखिका का अनुभव क्षेत्र बड़ा होने से कहानियों का कथ्य भी नयेपन के साथ आया…
₹800.00Original price was: ₹800.00.₹640.00Current price is: ₹640.00.
आज प्रेस कानून ‘मीडिया कानून’ का रूप ले चुका है। मीडिया कानून का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक एवं प्रभावी है। उल्लेखनीय है कि भारत में मीडिया कानून (प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया) संख्या में कम होते हुए भी अपने प्रभाव-क्षेत्र में व्यापक हैं, इसलिए इनकी जानकारी न केवल मीडियाकर्मी के लिए बल्कि आम जनता के लिए…
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
प्रस्तुत पुस्तक ‘सचित्र पर्यावरण विश्वकोश’ आज के मानव जगत की पर्यावरण के बारे में जिज्ञासाओं का सरल एवं प्रामाणिक समाधान प्रस्तुत करती है जिसमें वैश्विक पर्यावरण के सभी घटकों की प्रामाणिक चित्रों, आरेखों एवं आंकड़ों के साथ विस्तृत विवेचना की गई है। पुस्तक में सौर मण्डल के विभिन्न ग्रहों, उपग्रहों, क्षुद्र ग्रहों, पृथ्वी, चन्द्रमा आदि…
₹600.00Original price was: ₹600.00.₹480.00Current price is: ₹480.00.
वैज्ञानिक शोधों, आविष्कारों एवं औद्योगिक क्रान्ति के कारण आज उपभोग वस्तुओं एवं सेवाओं की सूची में निरन्तर वृद्धि हो रही है। नित्य नयी- नयी चीजों का आविष्कार हो रहा है। इसके साथ हीं उपभोक्ता का शोषण भी बढ़ता जा रहा है। निर्माता/विक्रेता द्वारा अधिक धन कमाने के लालच ने मानवता की सारी हदें तोड़ दी…
₹300.00Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
समाज समस्या है समाधान नहीं? यह एक चिरंतन प्रश्न है। किन्तु इसके उत्तर में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि समाज का मूल चरित्र तो समस्याधर्मी है। अपने आदिम रूप से लेकर आज के उन्नत रूप तक समाज की समस्याओं में निरन्तर इजाफा ही हुआ है। आज के उन्नत समाज में अपराध के बड़े सूक्ष्म…
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
प्रस्तुत पुस्तक “विज्ञान सबके लिये : रसायन विज्ञान” में रसायन विज्ञान (Chemistry) से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार की वैज्ञानिक जिज्ञासाओं को शान्त करने का प्रयास किया गया है। इस पुस्तक में मानव मस्तिष्क में रसायन विज्ञान से सम्बन्धित क्या, क्यों और कैसे जैसी उठने वाली जिज्ञासाओं का जवाब प्रमाणिक एवं चित्रों सहित दिया गया है। इस…
₹800.00Original price was: ₹800.00.₹640.00Current price is: ₹640.00.
1885 ई. में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना से भारत में एक नये युग का सूत्रपात होता है। काँग्रेस में उदारवादियों की नीतियों की प्रतिक्रियास्वरूप उग्रवाद का उदय तथा क्रान्तिकारी आन्दोलनों ने भारतीयों के मन में एक नवीन चेतना का संचार किया। गाँधीजी के नेतृत्व में काँग्रेस का राष्ट्रीय आन्दोलन, एक जन- आन्दोलन के रूप…
₹600.00Original price was: ₹600.00.₹480.00Current price is: ₹480.00.
मछली रीढ़धारी, ठण्डे खून वाला एक ऐसा जलचर है, जो गलफड़ों में साँस लेता है। कुछ मछलियों के फेफड़े जैसे अंग विकसित हो गये हैं। ये अपने गलफड़ों के साथ ही फेफड़ों से भी साँस लेती हैं तथा ऑक्सीजन की कमी वाले भागों- कीचड़, दलदल में भी सरलता से रह सकती हैं। मछलियों की शारीरिक…
₹350.00Original price was: ₹350.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
मृदा एवं जल पृथ्वी तल के मूलभूत संसाधन हैं जहाँ जीव-जगत का अस्तित्व उत्पन्न होता है। लेकिन दुनिया की आबादी सात अरब को पार कर गई है, ऐसे में मृदा एवं जल संसाधनों का संरक्षण कर बढ़ती जनसंख्या को खाद्य एवं पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना मुख्य चुनौती है। प्रस्तुत पुस्तक में इसी समस्या को ध्यान…
₹300.00Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
प्रस्तुत कृति में मध्यकालीन भारतीय इतिहास के सल्तनतकालीन और मुगलकालीन इतिहासकारों के संक्षिप्त परिचय के साथ-साथ उनके द्वारा रचित कृतियों की विशेषताओं का समालोचनात्मक विवेचन किया गया है। साथ ही उनकी कृतियों में सन्निहित सामग्री की भी स्पष्ट झलक मिलती है। मध्यकाल में भारत में बहुत से विदेशी यात्री आए, उन्होंने यहाँ रहकर इस देश…
₹250.00Original price was: ₹250.00.₹200.00Current price is: ₹200.00.
लोकमान्य तिलक का भारत के स्वातंत्र्य संग्राम में अतुल योगदान एवं समर्पित दायित्वपूर्ण भूमिका का अनुकरणीय निर्वहन रहा। उनका सम्पूर्ण जीवन भारत माँ की स्वतंत्रता की वेदी पर न्यौछावर हो गया था। लगभग सौ वर्ष पूर्व उन्होंने कहा था-“स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और उसे हम लेकर रहेंगे।” उनके इन शब्दों ने करोड़ों व्यक्तियों के…