Rajendra Shankar Bhatt

राजेन्द्र शंकर भट्ट भारत के मूर्धन्य पत्रकार, वरिष्ठ साहित्यकार एवं जनसम्पर्क विशेषज्ञ हैं। इलाहाबाद, अजमेर, दिल्ली और जयपुर से संचालित प्रमुख संवाद-समितियों, दैनिकों व साप्ताहिकों में आपने संपादक, संवाददाता व संचालक के रूप में पत्रकारिता को दिशा दी। सन् 1943 में पत्रकारों की आर्थिक स्थिति के अध्ययन हेतु गठित देश की पहली सर्वपक्षीय समिति के आप संयोजक रहे। पत्रकारिता के क्षेत्र में भारत सरकार के दोनों शीर्ष सम्मान—भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार (1984) एवं गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार (1996)—प्राप्त करने वाले वे देश के विरले पत्रकारों में अग्रगण्य हैं।

प्रशासनिक क्षेत्र में उन्होंने जयपुर रियासत तथा स्वतंत्रता व एकीकरण के बाद राजस्थान राज्य के जनसम्पर्क विभाग का लगातार 25 वर्षों तक यशस्वी नेतृत्व किया, जो देश भर में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के भाषा विभाग के निदेशक, शासन में दो बार परामर्शदाता तथा राजस्थान विधानसभा में विशेषाधिकारी का दायित्व भी निभाया। जनसम्पर्क विधा पर उनकी पुस्तक ‘जनसम्पर्क के प्रत्यक्ष प्रयोग’ तथा पत्रकारिता पर ‘पत्र, पत्रकार और पत्रकारिता’ अत्यंत प्रतिष्ठित कृतियाँ हैं।

साहित्यिक अवदान के अंतर्गत नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) द्वारा उनकी लिखित ‘महाराणा प्रताप’ और ‘सवाई जयसिंह’ जैसी प्रामाणिक जीवनियाँ प्रकाशित की गईं। शब्द-चित्र विधा में उनकी कृति ‘कश्मीर चित्रण’ को राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार (1982) से अलंकृत किया गया। इसके अतिरिक्त ‘मेवाड़ के महाराणा और शाहंशाह अकबर’ (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा पुरस्कृत), ‘सुभाष बोस’ तथा ‘1989 लोकसभा निर्वाचन’ उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं।

वे हिन्दी साहित्य सम्मेलन (प्रयाग) तथा राजस्थान साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष रहे हैं। साथ ही उन्होंने केन्द्रीय साहित्य अकादमी में पाँच वर्षों तक राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया तथा ‘ऑथर्स गिल्ड ऑफ इण्डिया’ की आरंभिक कार्यसमिति में सक्रिय रहे। समृद्ध साहित्यिक व वैचारिक सेवाओं के लिए आपको ‘साहित्य मार्तण्ड’, ‘साहित्य शास्त्री’ एवं ‘हिन्दी मनीषी’ की मानद उपाधियों से विभूषित किया जा चुका है।

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