गृह निर्माण एवं धन व्यवस्थापन
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उत्तम शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यावश्यक है “उपयुक्त मकान”, चाहे वह निजी हो, सरकारी हो अथवा किराये का। मकान व्यक्ति की अनिवार्य आवश्यकता है जिसमें वह परिवार सहित रहकर पारिवारिक लक्ष्यों की पूर्ति करते हुए अपने विकास का परचम सम्पूर्ण संसार में लहराता है। परन्तु मकान हेतु भूखंड कैसा होना चाहिए, इसका निर्माण किस तरह से किया जाना चाहिए, भवन निर्माण सामग्री कैसी होनी चाहिए, वास्तुशास्त्र को ध्यान में रखकर भवन निर्माण किस दिशा में किया जाना चाहिए, मकान का डिजाइन कैसा होना चाहिए, धन की व्यवस्था कहाँ से करनी चाहिए, भवन निर्माण में कितनी लागत आएगी आदि विषयों पर गहन एवं योजनाबद्ध रीति से विचार किया जाना जरूरी है। तभी सभी सुविधाओं से युक्त एक न्यारा-सा बंगला बन सकेगा। अन्यथा वह ईंट, चूना, गारा, सीमेंट आदि से निर्मित मकान का ढांचा मात्र ही होगा। ऐसा निर्मित मकान परिवार की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर सकेगा और न ही वह परिवार के सदस्यों की रुचियों के अनुकूल ही होगा। उसमें निवास करने वाले लोगों को मानसिक तृप्ति नहीं मिलेगी और न ही वे सामंजस्य व शांति महसूस कर सकेंगे। अतः ऐसे भवन निर्माण से केवल धन, समय, शक्ति एवं ऊर्जा का ही अपव्यय होगा।
प्रस्तुत पुस्तक में इन्हीं विषयों पर गहन अध्ययन करके विस्तारपूर्वक चर्चा की गई है जो एक आरामदायक, ऐश्वर्यशाली, सुन्दर, आकर्षक, मनोहारी एवं अनोखे भवन निर्माण के लिए जरूरी है। विश्वास है यह पुस्तक न केवल गृह विज्ञान के विद्यार्थियों, बल्कि गृहिणियों एवं जन सामान्य के लिए भी काफी उपयोगी एवं लाभदायी सिद्ध होगी।
| Weight | 510 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Textbook Genre |
















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