Subhashchandra Ghayal

डॉ. सुभाष चन्द्र धायल हिन्दी साहित्य के विद्वान, शोधकर्ता एवं शिक्षाविद् हैं। उनका जन्म 5 जून 1978 को राजस्थान के सीकर जिले के घसीपुरा गाँव में हुआ। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की तथा डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से पीएच.डी. की उपाधि अर्जित की। वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नेट-जेआरएफ परीक्षा तथा राजस्थान राज्य पात्रता परीक्षा (सेट) भी उत्तीर्ण कर चुके हैं।

हिन्दी भाषा एवं साहित्य के अध्ययन, अध्यापन और शोध के क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर अध्यापन कार्य करते हुए विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाई है। शोध एवं अकादमिक गतिविधियों में उनकी विशेष रुचि रही है, जिसके परिणामस्वरूप उनके अनेक शोधालेख देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।

डॉ. धायल ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों, सेमिनारों एवं अकादमिक सम्मेलनों में शोध-पत्र प्रस्तुत किए हैं। साहित्यिक पत्रकारिता से भी उनका जुड़ाव रहा है और उन्होंने लेखन एवं संपादन के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दिया है। वे साहित्यिक पत्रिकाओं एवं वैचारिक विमर्शों से निरंतर जुड़े रहे हैं तथा समकालीन हिन्दी साहित्य के विविध विषयों पर नियमित लेखन करते रहे हैं।

शोध, अध्यापन, संपादन एवं साहित्यिक लेखन के माध्यम से डॉ. सुभाष चन्द्र धायल ने हिन्दी साहित्य के अध्ययन और प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी अकादमिक एवं साहित्यिक गतिविधियाँ हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करती हैं।

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    Aadhunik Hindi Upanyas aur Stri Vimarsh

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    Aadhunik Hindi Upanyas aur Stri Vimarsh बीसवीं सदी के अंतिम दशकों में उभरे स्त्री विमर्श ने साहित्य के परिदृश्य को बदला। सुभाषचंद्र घायल की ‘आधुनिक हिन्दी उपन्यास और स्त्री विमर्श’ कृति इस विमर्श के विविध आयामों, स्त्री अस्मिता, पारिवारिक व सामाजिक हैसियत, शोषण और अधिकारों की प्रासंगिकता का वस्तुपरक विश्लेषण करती है। यह पुस्तक हिन्दी उपन्यासों द्वारा स्त्री विमर्श को दिए गए विस्तार और स्त्री की स्थिति को प्रदान की गई महत्ता को गंभीरता से विचार करती है।

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