Nari Jeevan : Sulagte prashn
नारी जीवन: सुलगते प्रश्न
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Nari Jeevan : Sulagte prashn नारी का जीवन सुलगते प्रश्नों का पर्याय है। एम. ए. अंसारी की यह कृति पितृसत्तात्मक समाजों में नारी की दयनीय स्थिति और उसके शोषण पर अंगुली उठाती है। यह नारी मुक्ति की तीव्र स्फुरण को रेखांकित करती है, जो नारी को पुरुष के बनाए विधान की सीमाओं को लांघने का प्रयास करने लगी है, और नारी जीवन के भयावह अतीत तथा संघर्षशील वर्तमान का समग्र चित्र प्रस्तुत करती है।
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नारी का जीवन सुलगते प्रश्नों का पर्याय है- ऐसा क्यों है? विश्व की लगभग सभी संस्कृतियाँ पितृसतात्मक और पुरुष वर्चस्ववादी रही हैं तथा अनादि काल से नारी को पुरुष ने भोग्या (वस्तु) के रूप में स्थापित कर उसे शारीरिक सुख का माध्यम माना है। अवयव की कोमलता तथा जैविक विवशताओं के चलते नारी ने भी अपनी दयनीय स्थिति को स्वीकार कर उसे अपनी नियति मान लिया है। इसी नियति से अभिशप्त नारी हर युग में प्रश्नों की दहकती आग पर चलने को विवश हुई। हर बार उसे ही अग्नि परीक्षा देनी पड़ी है और हर बार उसे अपनी शुचिता का प्रमाण देना पड़ा है।
‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता’ कहने वाले मनीषियों ने भी नारी को कोरे शब्द जाल से बहलाया है। उसका शोषण किया है तथा अपने बनाये विधान के जाल में उसे फंसाये रखा है। उसे ‘अबला’ का दर्जा देकर समाज में उसे दूसरे दर्जे की नागरिकता दी है। उसे सभी प्रकार के सामाजिक या आध्यात्मिक अधिकारों से महरूम कर नर ने नारी को देह से आगे नहीं बढ़ने दिया है।
लेकिन समय ने करवट ली है। नारी अपनी देह से निकलकर पुरुष के बनाये विधान की सीमाओं को लांघने क प्रयास करने लगी है। उसमें भी मुक्तिकामी चेतना का तीव्र स्फुरण हो रहा है। इसलिए वह उन प्रश्नों पर चोट करने लगी है जो उनकी नियति से चिपका दिये गये हैं।
प्रस्तुत कृति में संवेदनशील लेखक नारी जीवन के बहुआयामी संघर्ष को रेखांकित करते हुए नारी जीवन से जुड़ी विद्रूपताओं पर अंगुली उठाता है। कृति नारी जीवन की आंतरिक और बाह्य सभी प्रकार की समस्याओं की बुनियाद में जाकर नारी- मुक्ति के आयामों की पड़ताल करती है। लेखक का यह प्रयास नारी जीवन के भयावह अतीत और संघर्षशील वर्तमान का समग्र चित्र प्रस्तुत करता है।
| Weight | 450 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |





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