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Mundak Upanishad

मुंडक उपनिषद

Language: Hindi
Format: Hardcover
Pages: 352
Edition: First, 2013
ISBN: 978-81-7056-598-7

Original price was: ₹700.00.Current price is: ₹630.00.

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Mundak Upanishad ऋषि शौनक ने ब्रह्मर्षि अंगिरस से परा-विद्या और अपरा-विद्या का ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रार्थना की। अर्जुन देव आर्य ‘विषम’ द्वारा प्रस्तुत यह मुण्डक उपनिषद् ब्रह्म-विद्या के ज्ञान का एक महत्वपूर्ण अंश है। इसमें अथर्ववेद के माध्यम से ईश्वर-जीव और प्रकृति के ज्ञान द्वारा सृष्टि निर्माण, जीवात्मा का मोक्ष, और जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति प्राप्त करने का विस्तृत ज्ञान दिया गया है, जो पाठक को मोक्ष मार्ग पर अग्रसर होने में सहायक है।

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प्रस्तुत उपनिषद् ब्रह्म-विद्या के ज्ञान का एक महत्त्वपूर्ण अंश है। ऋषि शौनक ने ब्रह्म-विद्या का ज्ञान प्राप्त करने के लिये ब्रह्मर्षि अंगिरस से प्रार्थना की कि वे उन्हें परा-विद्या और अपरा-विद्या का ज्ञान दें और ब्रह्म तथा ब्रह्मा में क्या अन्तर है। ब्रह्मर्षि अंगिरस ने अथर्ववेद का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया था। वैसे तो वे चारों वेदों के महा पण्डित थे परन्तु अथर्ववेद के माध्यम से ब्रह्म-विद्या पर उनका विशिष्ट ज्ञान था। ईश्वर-जीव और प्रकृति के ज्ञान के द्वारा उन्होंने बताया कि वह परम पिता परमेश्वर कैसे, क्यों और कब सृष्टि का निर्माण करता है। जीवात्मा कब मोक्ष प्राप्त कर सकता है। क्यों बार- बार कृत कर्मों के फल भोगने हेतु जन्म-मरण के बन्धनों में बँधा रहता है। ईश्वर का तृतीय गुण ‘आनन्द’ कब प्राप्त कर सकता है और क्या ‘आनन्द’ गुण प्राप्त कर वह भी सच्चिदानन्द परमेश्वर बन जाता है? इन सभी पर विस्तृत ज्ञान इस पुस्तक में अंगिरस द्वारा शौनक को प्रदान किया है। पाठक पढ़कर अपने जीवन में, व्यवहार में उतार लें तो निस्सन्देह वे भी मोक्ष मार्ग पर कदम आगे बढ़ा सकेंगे।

Weight470 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 2 cm
Genre

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