Kala Ke Siddhant Evam Antarik GrahSajja
कला के सिद्धांत एवं अंतरिक्ष गृह सज्जा
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कला मनुष्य की भावाभिव्यक्ति का एक सुन्दर, श्रेष्ठ एवं सशक्त माध्यम है। कला ही व्यक्ति के जीवन में वह ऊर्जा, ऊष्मा, उमंग, तरंग, उल्लास, उत्साह का संचार करता है जिससे पुष्पित पल्लवित होकर व्यक्ति प्रगति के पथ पर अग्रसर होते हुए अपने लक्ष्यों एवं उद्देश्यों की प्राप्ति करता है तथा परिवार सहित आनंदपूर्वक जीवन व्यतीत करता है। कला के बगैर तो मानव जीवन ही नीरस, उबाऊ एवं प्राणहीन हो जाता है। प्रस्तुत पुस्तक “कला के सिद्धान्त एवं आंतरिक गृह सज्जा” में इन सभी विषयों पर विस्तृत चर्चा करते हुए वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किया गया है।
साधारण-से-साधारण घर भी सुरुचिपूर्ण सज्जा से चमक उठता है और स्वर्ग का सा आनंद एवं अलौकिक सुख प्रदान करने वाला बन जाता है। वहीं सभी सुख-सुविधाओं से युक्त आलीशान बंगला भी बगैर उपयुक्त सज्जा के “भूत का डेरा” नजर आता है। इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि घर की सज्जा एक-से-बढ़कर एक महँगी, कलात्मक, सुन्दर व अनोखी वस्तुओं से की जाए, बल्कि साधारण चीजों एवं दैनिक प्रयोग में आने वाली सामग्रियों, पुस्तकों, बर्तनों, उपकरणों को भी इस प्रकार से व्यवस्थित करके, क्रमबद्ध तरीके से सजाकर रखा जाए कि वे देखने में सुन्दर, मोहक व आकर्षक लगे। साथ ही पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति भी बिना विलम्ब व अवरोध उत्पन्न हुए होती रहे।
यह पुस्तक गृह विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध होगी। साथ ही कलात्मक. रुचि रखने वाली गृहिणियाँ एवं सामान्य जन भी इससे लाभान्वित होंगे।
| Weight | 450 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 15 × 2.5 cm |
| Textbook Genre |







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