Hamara Swadhinata Sangharsh
हमारा स्वाधीनता संघर्ष
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Hamara Swadhinata Sangharsh भारत के स्वाधीनता संघर्ष (1857-1947) का अध्ययन, प्रो. योगेश चन्द्र शर्मा द्वारा प्रस्तुत। यह पुस्तक गांधीजी के अहिंसा आंदोलन, भगतसिंह जैसे क्रांतिकारियों के बलिदान, और ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ भारतीयों के प्रतिरोध को रेखांकित करती है। यह देश की सामाजिक समस्याओं—अशिक्षा, अंधविश्वास, गरीबी, शोषण—से भी जूझने की गाथा है, जो राष्ट्रभक्ति के जज्बे से भरपूर है।
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भारत का स्वाधीनता संघर्ष भारतीय इतिहास में ऐसा कालखण्ड है, जिसका अध्ययन प्रत्येक भारतवासी के लिए प्रेरणा और ज्ञानवर्धन का अक्षय कोश है। औपचारिक रूप से हम यह मानते हैं कि भारत का स्वाधीनता संग्राम 1857 में आरम्भ हुआ और 90 वर्ष के दुर्धर्ष संघर्ष के पश्चात् 1947 में हमें आजादी मिली, किन्तु इस संघर्ष में सक्रिय धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक आदि अनेक प्रकार की धाराएँ पूरे वेग के साथ प्रवाहित रही थीं। अगर गांधीजी के अहिंसा आन्दोलन ने इस संघर्ष को नयी पहचान दी तो भगतसिंह जैसे क्रान्तिकारियों के बलिदान ने इस देश की जनता को राष्ट्रभक्ति के जज्बे से आपूरित किया। अगर साधारण जन ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ आजादी के लिए लड़ रहे थे तो ब्रिटिश सेना में भर्ती भारतीय सैनिक भी स्वतंत्रता की भावना से ओतप्रोत थे।
हमारे स्वाधीनता संग्राम का पूरा परिदृश्य बहुआयामी था क्योंकि स्वाधीनता के लिए ब्रिटिश सत्ता से लड़ने के साथ ही इस देश में व्याप्त अशिक्षा, अंधविश्वास, गरीबी, शोषण, सामाजिक असमानता, जातिवाद, धर्मांधता, सामंतवाद जैसी अनेक भयानक समस्याओं से भी रू-ब-रूथे।
इस दृष्टि से हमारे स्वाधीनता संघर्ष का इतिहास बहुत रोचक और बलिदान की कथाओं से भरपूर है। प्रस्तुत कृति भारतीय स्वाधीनता संग्राम की इन विविध छवियों का रागात्मकता के साथ अंकन करती है और पाठकों को राष्ट्र की समस्याओं से जोड़ती है।
| Weight | 440 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |





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