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Gopal Krishna Gokhale: Vyaktitva Evam Krutitva

गोपाल कृष्ण गोखले: व्यक्तित्व एवं कृतित्व

Author(s): Manisha Gupte
Language: Hindi
Format: Hardcover
Pages: 272
Edition: Second, 2012
Published Year: 2005
ISBN: 978-81-7056-299-3

Original price was: ₹600.00.Current price is: ₹540.00.

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Gopal Krishna Gokhale: Vyaktitva Evam Krutitva भारतीय इतिहास में नवजागरण और स्वाधीनता आंदोलन में गोपालकृष्ण गोखले का नाम अग्रणी है। मनीषा गुप्ते की यह कृति उनके बहुआयामी व्यक्तित्व—एक शिक्षक, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य, चिंतक और कर्मठ कार्यकर्ता—का वस्तुपरक आकलन करती है। यह पुस्तक उनके प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण, वित्तीय नीति, जनस्वास्थ्य, और नौकरशाही में सुधार जैसे व्यापक कर्मक्षेत्र पर प्रकाश डालती है, जो हिंदी भाषा में गोखले पर पहला महत्वपूर्ण ग्रंथ है।

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भारतीय इतिहास में नवजागरण और स्वाधीनता आन्दोलन में जिन महान विभूतियों ने अपने देश-प्रेम, त्याग, अदम्य साहस, आत्म सम्मान के साथ देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित होकर कार्य किया उनमें गोपालकृष्ण गोखले का नाम अग्रणी इतिहास-पुरुषों में है। गोखले जैसे दिव्य और भव्य चरित्र वाले व्यक्तित्व का आकलन अपने आप में चुनौतीभरा कार्य होता है, क्योंकि उनके बहुआयामी व्यक्तित्व की वस्तुपरक व्याख्या बहुत कठिन होती है। भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में गोपालकृष्ण गोखले कार्य क्षमता और व्यावहारिक नीतियों के कारण अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं।

गोपालकृष्ण गोखले का कर्मक्षेत्र बहुत व्यापक था। वे अनेक मोर्चों पर एक साथ लड़ रहे थे-एक शिक्षक के रूप में वे भारतीय समाज के पिछड़ेपन और अशिक्षित मानसिकता के अवरोध को दूर करने के लिए समाज- सुधारों की मशाल लेकर चले, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य और अध्यक्ष के रूप में उदारवादी और अहिंसक राजनीति के प्रणेता थे, एक चिंतक और कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण, स्वस्थ वित्तीय नीति, जनस्वास्थ्य की योजनाओं, उचित कृषि नीति, अकाल तथा महामारियों के दौरान जन रक्षा की योजनाओं, नौकरशाही में सुधार जैसे सवालों पर सक्रिय रहे।

गोपालकृष्ण गोखले ने डेंकन सभा की स्थापना की और गाँधीजी के कार्य को आगे बढ़ाया। उन्होंने सामाजिक और धार्मिक क्षेत्रों में अपने विचारों से क्रान्तिकारी प्रभाव उत्पन्न किये। स्पष्ट है कि गोखले का व्यक्तित्व असाधारण था और प्रस्तुत कृति में उनके व्यक्तित्व के सभी आयामों का सम्यक् उद्घाटन किया गया है। यह कृति हिन्दी के पाठकों के लिए विशेष महत्त्व रखती है, क्योंकि अब तक गोपालकृष्ण गोखले के व्यक्तित्व और कृतित्व पर जितने भी कार्य हुए हैं वे या तो अँग्रेजी में हुए हैं या मराठी में। हिन्दी भाषा में गोपालकृष्ण गोखले पर यह पहला महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है, इसलिए इसका महत्त्व और अधिक बढ़ जाता है।

Weight410 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 2 cm
Genre

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