Bhasha Vigyan
भाषा विज्ञान
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Bhasha Vigyan हिन्दी शिक्षण की त्रासदी को दूर करते हुए, डॉ. रमेश रावत की यह पुस्तक भाषा-विज्ञान को सरलता के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। यह विषय की उपादेयता को समझाने और विद्यार्थियों में रुचि जगाने पर बल देती है, जिससे वे भाषा-विज्ञान की बारीकियों को समझने में गहरी रुचि ले सकें और हिन्दी में एक अभाव की पूर्ति हो सके।
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हिन्दी शिक्षण की यह त्रासदी रही है कि भाषा- विज्ञान को एक ऐसे विषय के रूप में पढ़ाया जाता है जैसे हिन्दी साहित्य और भाषा से उसका कोई सम्बन्ध नहीं है। जैसे भाषा विज्ञान एक अलग विषय है। जैसे भाषा-विज्ञान बहुत कठिन विषय है। जैसे उसे समझना समझाना सरल कार्य या रुचिकर कार्य नहीं है। इसीलिए विद्यार्थियों में भाषा-विज्ञान के प्रति एक विचित्र किस्म का विराग बना रहता है। यदि भाषा विज्ञान लोकप्रिय नहीं बन पाया तो इसके लिए हिन्दी के शिक्षक अधिक उत्तरदायी हैं। जो पुस्तकें भाषा-विज्ञान पर लिखी गयी हैं उनमें भी इस विषय को बड़े रूखे और अबोधगम्य तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
जबकि सच्चाई यह है कि विद्यार्थियों को भाषा- विज्ञान का अध्ययन स्नातक स्तर से कराये जाने का प्रावधान होना चाहिए ताकि वे एम. ए. तक आते-आते इस विषय की बारीकियों को समझने में गहरी रुचि लेंगे। प्रस्तुत पुस्तक भाषा-विज्ञान को सरलता के साथ प्रस्तुत करने का एक सामान्य सा प्रयास है पर लेखक का बल इस तथ्य पर रहा है कि भाषा-विज्ञान की उपादेयता को शिक्षक और विद्यार्थी समझें और इसके अध्ययन में रुचि लें। यह पुस्तक हिन्दी में एक अभाव की पूर्ति करेगी ऐसी आशा की जाती है।
| Weight | 490 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Genre |



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