₹200.00Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
14 सितम्बर, 1949 को संविधान सभा ने यह प्रस्ताव पारित किया कि भारतीय गणराज्य की राजभाषा, देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी होगी। इसके बाद इस सम्बन्ध में राष्ट्रपति ने 1952, 1955 तथा 1960 में तीन आदेश जारी किए तथा 1963 में राजभाषा अधिनियम पारित किया गया, जिसका संशोधन 1967 में हुआ तथा 1968 में एक…
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
प्रस्तुत पुस्तक “प्राथमिक उपचार” में मानव शरीर में होने वाली सामान्य बीमारियों के उपचार के बारे में जानकारियाँ प्रदान की गईं हैं। मानव शरीर के सभी तन्त्रों जैसे पाचन तंत्र, तंत्रिका तंत्र, श्वसन तंत्र, कंकाल तंत्र, जनन तंत्र की रक्षा प्राथमिक उपचार की सहायता से ही की जा सकती है। प्राथमिक उपचार की जानकारी प्रत्येक…
₹550.00Original price was: ₹550.00.₹440.00Current price is: ₹440.00.
यह पुस्तक “राजस्थान के प्रजामंडल आंदोलनों में महिलाओं की भूमिका” पर आधारित एक महत्वपूर्ण कृति है, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महिलाओं के योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक उन वीरांगनाओं के साहस, त्याग और संघर्ष को उजागर करती है, जिन्हें इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया।
राजस्थानी–हिन्दी शब्द कोश एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है, जिसमें राजस्थानी भाषा के शब्दों के साथ उनके हिन्दी अर्थ दिए गए हैं। इस शब्दकोश का संपादन आचार्य बद्री प्रसाद सकरिया तथा प्रो. भूपति राम सकरिया द्वारा किया गया है और इसका प्रकाशन पंचशील प्रकाशन, जयपुर द्वारा किया गया था।
यह ग्रंथ राजस्थानी भाषा और उसकी शब्दावली में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं तथा पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण भाषाई संसाधन है। मुद्रित संस्करण अब उपलब्ध नहीं होने के कारण, इस महत्वपूर्ण संदर्भ कृति के संरक्षण के उद्देश्य से पंचशील प्रकाशन द्वारा इसके खंडों का डिजिटलीकरण किया गया है, ताकि इसे ऑनलाइन पढ़ने के लिए उपलब्ध कराया जा सके।
राजस्थानी–हिन्दी शब्द कोश एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है, जिसमें राजस्थानी भाषा के शब्दों के साथ उनके हिन्दी अर्थ दिए गए हैं। इस शब्दकोश का संपादन आचार्य बद्री प्रसाद सकरिया तथा प्रो. भूपति राम सकरिया द्वारा किया गया है और इसका प्रकाशन पंचशील प्रकाशन, जयपुर द्वारा किया गया था।
यह ग्रंथ राजस्थानी भाषा और उसकी शब्दावली में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं तथा पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण भाषाई संसाधन है। मुद्रित संस्करण अब उपलब्ध नहीं होने के कारण, इस महत्वपूर्ण संदर्भ कृति के संरक्षण के उद्देश्य से पंचशील प्रकाशन द्वारा इसके खंडों का डिजिटलीकरण किया गया है, ताकि इसे ऑनलाइन पढ़ने के लिए उपलब्ध कराया जा सके।
₹175.00Original price was: ₹175.00.₹140.00Current price is: ₹140.00.
“जंगल में दंगल” उपन्यास अपने पर्यावरण के विभिन्न घटकों को जानने एवं समझने की दृष्टि से रोचक शैली में लिखा गया है।
छोटी आयु वर्ग के बच्चों के मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर इस उपन्यास की रचना की गयी है।
जंगल में छोटे-बड़े का भेदभाव दूर करते हुए सामूहिक आनन्दोत्सव में सहभागी बनते पात्रों से जीवंत दृश्यों की उपस्थिति इस कथा की खूबी है।
जंगली जीव-जन्तु केवल डर के प्रतीक नहीं होते, बल्कि वे हमारे दोस्त भी होते हैं। उनके सुख- दुख में शामिल होना हमारा मानवीय कर्त्तव्य भी है। उपन्यास से इस बात की पुष्टि होती है।
यह उपन्यास प्रेम, सद्भाव, सहयोग एवं सामाजिकता के परस्पर सम्बन्धों को उजागर करता है तथा बच्चों में साहस, शौर्य और शक्ति का समावेश करता है।
जंगली पात्रों पर आधारित यह कथा बच्चों के लिए रुचिकर है। इसे पढ़ना प्रकृति से जुड़ने के लिए जरूरी है।
₹150.00Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.
प्रायः यह माना जाता है कि ईसा से 2 शताब्दी पूर्व पतंजलि ने सर्वप्रथम योगसूत्र की रचना की तथा योग को ‘योगश्चित्तवृत्ति निरोधः’ रूप में परिभाषित किया। एक ओर जहाँ योग का सम्बन्ध मोक्ष या मुक्ति प्राप्ति से है, वहीं इसका सम्बन्ध शरीर विकास और कायाकल्प से भी है। अब तक पश्चिमी संसार ने भी…
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