शाह आलम
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Shah Alam सुरेन्द्र कांत का उपन्यास ‘शाहआलम’ मुगल खानदान के गौरव के क्षरण की त्रासद कथा है, जहाँ मुगल शाहजादे विलास में डूबे निस्तेज और जर्जर हो रहे थे। यह कृति शाहआलम के देशभक्त और बहादुर सिपाही के रूप में भारत के राजाओं को जोड़कर दिल्ली के पुराने गौरव को प्राप्त करने के प्रयास को दर्शाती है, जो अपनी चारित्रिक दृढ़ता और पराक्रमशीलता से महान बनता है।
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इतिहास को उपन्यास में ढालना बहुत कठिन कार्य है क्योंकि किसी ऐतिहासिक आख्यान को रचना का रूप देते समय लेखक को तथ्य और कल्पना, वास्तविकता और भावना के द्वन्द्व से गुजरना पड़ता है। ‘शाहआलम’ सुरेन्द्र कान्त की एक ऐसी कृति है जिसमें लेखक ने इस द्वन्द्व को बड़ी कुशलता से साधा है। यह उपन्यास मुगल खानदान के गौरव के क्षरण की त्रासद कथा है। यह उस काल की कथा है जिसमें बाबर, अकबर, जहांगीर, शाहजहां यहाँ तक कि औरंगजेब के शासन की चूलें हिल रही हैं।
यह उस काल की कहानी है जब मुगल खानदान में जन्म लेना भी अभिशाप बन गया था। मुगल शाहजादे विलास में डूबे निस्तेज और जर्जर हो रहे थे। औरंगजेब के पश्चात् दिल्ली का सिंहासन भी डांवाडोल हो गया था। शाहंशाहे हिन्दुस्तान आलमगीर द्वितीय, नाम का शाहंशाह और नाम का रह गया था उसका हिन्दुस्तान। उसे भी छल से मार दिया गया।
उसके बाद शाहजादा अली गौहर दिल्ली का शासक बना जिसे शाहआलम नाम दिया गया। शाहआलम एक देशभक्त और बहादुर सिपाही था, जिसने भारत के राजाओं को जोड़कर दिल्ली के पुराने गौरव को प्राप्त करने का प्रयास किया और काफी सीमा तक सफल भी हुआ। शाहआलम ही इस कृति का नायक है जिसकी चारित्रिक दृढ़ता, पराक्रमशीलता और देशभक्ति उसे महान बनाती है। यह उपन्यास शाहअलाम के सतत् संघर्ष की गाथा है।
उपन्यास बहुत रोचक है तथा अपनी पठनीयता में बेजोड़ है। इसकी भाषा ने इस कृति को नयी भंगिमा प्रदान की है जिसने मुगलकाल के जीवन को जीवंत कर दिया है।
| Weight | 295 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |







आचार्य चाणक्य (ऐतिहासिक उपन्यास)
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