ओमप्रकाश शर्मा ‘महामौनी’ हिन्दी एवं संस्कृत के विद्वान, शिक्षक तथा साहित्यकार रहे हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के हाथरस जनपद स्थित ग्राम नगलामाह में हुआ। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ से हिन्दी एवं संस्कृत विषयों में एम.ए. की उपाधियाँ प्राप्त कीं।
प्रारम्भिक जीवन में ही पिता के निधन के पश्चात उनका पालन-पोषण एवं शिक्षा-दीक्षा परिवार के संरक्षण में सम्पन्न हुई। अध्ययन, चिंतन-मनन एवं साहित्य-सृजन उनके जीवन के प्रमुख आधार रहे। दीर्घकाल तक अध्यापन कार्य से जुड़े रहने के साथ-साथ उन्होंने कथा साहित्य, ऐतिहासिक उपन्यासों तथा अन्य साहित्यिक विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उनकी प्रमुख कृतियों में चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य (चन्द्रोदय, अभिषेक एवं दिग्विजय), चारुमती परिणय तथा गौतमीपुत्र (सद्धर्म का महावर एवं आँचल का दूध) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनके साहित्य में भारतीय इतिहास, संस्कृति, आदर्श चरित्रों तथा मानवीय मूल्यों का सशक्त चित्रण मिलता है।
ओमप्रकाश शर्मा ‘महामौनी’ की कविताएँ, कहानियाँ एवं अन्य रचनाएँ विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। वे सरस्वती जैसी सुप्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका से भी जुड़े रहे और हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की।
अपने अध्यापन, अध्ययन एवं साहित्यिक योगदान के माध्यम से ओमप्रकाश शर्मा ‘महामौनी’ ने हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कृतियाँ इतिहास, संस्कृति और साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए आज भी मूल्यवान हैं।
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹180.00Current price is: ₹180.00.
चारुमती-राजसिंह की प्रेमकथा पर आधारित यह ऐतिहासिक उपन्यास, राजस्थान के शौर्य और पराक्रम की गाथा कहता है। यह एक लंबे कालखंड की घटनाओं को कुशलता से विन्यस्त करते हुए पाठक को इतिहास के जीवंत वातावरण में रमाए रखता है।
₹800.00Original price was: ₹800.00.₹720.00Current price is: ₹720.00.
गौतमीपुत्र सातकर्णि के असाधारण पराक्रम और मातृभूमि के प्रति उनके समर्पण की गाथा। यह ऐतिहासिक उपन्यास शैव, बौद्ध और ब्राह्मण मतों की साधना-पद्धति, सामंती व्यवस्था और तत्कालीन जीवन की गहन अनुभूति को जीवंत करता है।
₹700.00Original price was: ₹700.00.₹630.00Current price is: ₹630.00.
द्वितीय शताब्दी के संक्रांति काल पर आधारित यह ऐतिहासिक उपन्यास, गौतमीपुत्र सातकर्णि के अपराजेय व्यक्तित्व को चित्रित करता है। यह युग के ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहलुओं को सहजता से अभिव्यक्त करता है।
₹300.00Original price was: ₹300.00.₹270.00Current price is: ₹270.00.
Chandragupta Vikramaditya – Digvijay Bhag-3 प्राचीन भारत के गुप्तकाल को स्वर्ण युग माना जाता है। ओमप्रकाश शर्मा ‘महामौनी’ का यह ऐतिहासिक उपन्यास चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के ‘दिग्विजय’ नामक तीसरे खंड में उनके संपूर्ण जीवन, संघर्षों और आशातीत सफलताओं का वर्णन है। यह कृति भारतीय इतिहास के तीसरी से चौथी शताब्दी तक के विस्तृत काल-खंड की राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक हलचलों को महाकाव्यात्मक रूप में प्रस्तुत करती है, जो पाठक को रमाये रखती है।
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹180.00Current price is: ₹180.00.
Chandragupta Vikramaditya – Abhishek Bhag-2 प्राचीन भारत के गुप्तकाल को राजनीतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक और ज्ञान-कला की दृष्टि से स्वर्ण युग माना जाता है। ओमप्रकाश शर्मा ‘महामौनी’ का यह ऐतिहासिक उपन्यास चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के ‘अभिषेक’ नामक दूसरे खंड में उनके पराक्रम कौशल, उदात्त स्वभाव और संवेदनशील व्यवहार से अर्जित आशातीत सफलताओं का वर्णन है। यह कृति भारतीय इतिहास के इस काल-खंड को जीवंत करती है, जिससे पाठक भारत के बहुरंगी अतीत का अनुभव कर सकें।
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹180.00Current price is: ₹180.00.
Chandragupta Vikramaditya – Chandrodai Bhag-1 प्राचीन भारत के इतिहास में गुप्तकाल को स्वर्ण युग माना जाता है। ओमप्रकाश शर्मा ‘महामौनी’ का यह वृहद ऐतिहासिक उपन्यास चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के चरित्र के विविध पक्षों का उद्घाटन करता है। ‘चंद्रोदय’ नामक यह प्रथम खंड भारतीय इतिहास के तीसरी से चौथी शताब्दी तक के विस्तृत काल-खंड की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक हलचलों को रचनात्मक दृष्टि से चित्रित करता है, जो पाठक को भारत के अतीत की चित्रवीथि में प्रवेश कराता है।
₹250.00Original price was: ₹250.00.₹225.00Current price is: ₹225.00.
Sheel Ka Himalaya ओमप्रकाश शर्मा ‘महामौनी’ का पौराणिक उपन्यास ‘शील का हिमालय’ गुरुकुलों में प्रदान की जाने वाली भारतीय प्राचीन शिक्षा प्रणाली और संयमी, सदाचार के श्रेष्ठ प्रतीक कच के चरित्र से परिचित कराता है। यह कृति शील और संयम के अविचल हिमाचल कच के व्रत की दृढ़ता को दर्शाती है।