प्रजातंत्र का तृणमूल स्तर एवं महिला नेतृत्व
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वही राष्ट्र और जाति प्रगति के शिखरों का स्पर्श करते हैं जो अपनी जमीनी वास्तविकताओं को चिन्ता के केन्द्र में रखते हैं। किसी प्रजातन्त्र की नींव तभी मजबूत हो सकती है जब तृणमूल स्तर पर उसकी सक्रियता पूर्ण निष्ठा के साथ हो तथा इस सक्रियता में दूर-दराज फैले अंचलों की महिलाओं की भी भागीदारी हो। हमारी प्रगति की धारा इसीलिए कुंठित रही है कि उससे आधी दुनिया पूरी तरह उदासीन रही है। किन्तु हमारे प्रजातन्त्र के नेतृत्व ने इस अवरोध को हटाकर विकास की धारा को अनवरत प्रवहमान रखने के लिए महिला जागरण के कार्यक्रमों को बराबर प्रश्रय देना आरम्भ कर दिया है। यह शुभ संकेत है कि भारत में महिला जागरण का संकल्प ग्रामीण जीवन से आरम्भ हुआ है। यह संकेत मिल रहे हैं कि हर क्षेत्र में महिला नेतृत्व पूरी सक्रियता से जीवन की कायापलट करने में लगा है। राजनीति तथा प्रशासन में सक्रिय महिलाएँ अपने अधिकारों का सकारात्मक उपयोग कर रही हैं और अपने कर्त्तव्यों को पूरी आस्था से पूरा कर रही हैं। यह प्रक्रिया तृणमूल स्तर से आरम्भ हो रही है और यह निश्चित है कि इसके सुपरिणाम बहुत दीर्घकालिक होंगे और इससे भारतीय समाज यथाशीघ्र एक विकासशील समाज बनेगा। प्रस्तुत पुस्तक महिला जागरण की विभिन्न समस्याओं का विश्लेषण करती हैं तथा महिला नेतृत्व के विविध आयामों का आकलन करती है। भारतीय समाज के विकास में महिला नेतृत्व किस प्रकार तृणमूल स्तर पर अपनी भूमिका अदा कर राष्ट्र निर्माण में योग दे सकता है, इसके विभिन्न पक्षों पर यह कृति सम्यक् प्रकाश डालती है और पाठकों की सक्रियता को प्रेरित करती है।
| Weight | 285 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |




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