प्रबन्ध
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प्रबन्ध एक गहन और गूढ़ विषय है। इसकी सम्पूर्ण जानकारी और इसे व्यावहारिक रूप प्रदान करने की प्रबन्धकीय क्षमता तभी विकसित हो सकती है जबकि प्रबन्ध-वर्ग इसे सही परिप्रेक्ष्य में ग्रहण करें; इसकी प्रकृति, क्षेत्र और सीमाओं से पूरी तरह से परिचित हों; आधुनिकतम प्रबन्धकीय विचारधाराओं का ज्ञाता हो, सभी प्रबन्धकीय कार्यों को सुनियोजित ढंग से सम्पादित करे, उचित समय पर सही और प्रभावी निर्णय ले, संगठन के सिद्धान्तों का उसे ज्ञान हो, एक सुदृढ़ और प्रभावी संगठन संरचना सृजित करने की क्षमता हो, अधिकारों का उचित प्रत्यायोजन कर स्वयं को नैत्यिकी कार्यों से मुक्त रख अधिक महत्त्वपूर्ण प्रबन्धकीय क्रियाओं पर अपना ध्यान और शक्ति केन्द्रित करे। सभी सांठनिक क्रियाओं में प्रभावी समन्वय स्थापित करने और उसे बनाये रखने के लिये प्रभावी कदम उठाये। साथ ही सहकर्मियों की जिज्ञासा जानने, उन्हें पूरी तरह से अभिप्रेरित कर, उनमें संस्था के प्रति निष्ठा भावना उत्पन्न कर उनमें संस्थागत कार्यों के लिये समर्पित भाव उत्पन्न कर सके। कुशल प्रबन्ध द्वारा ये सभी क्रियाएँ आसानी से सम्पन्न की जा सकती हैं। प्रस्तुत पुस्तक में इन सभी पहलुओं की सरल, स्पष्ट, रोचक और धाराप्रवाह भाषा में विस्तृत विवेचना की गई है।
| Weight | 515 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 15 × 2.5 cm |





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