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कला शिक्षा और भावी परिप्रेक्ष्य

Language: हिंदी
Pages: 224
Edition: First, 2016
ISBN: 978-81-7056-619-9

Original price was: ₹500.00.Current price is: ₹450.00.

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कला शिक्षा के वर्तमान स्वरूप, उद्देश्यों और भविष्य के परिप्रेक्ष्य पर एक बहुमूल्य विश्लेषण। यह पुस्तक संगीत, चित्रकला, नाट्य कला और दृश्य कला जैसे विभिन्न ललित कला संकायों में सुधार और रोजगारोन्मुखी कला के विकास पर विचार करती है।

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वर्तमान कला-शिक्षा उद्देश्यहीन होती जा रही है। कला-शिक्षा में व्यापक सुधार करने की अति आवश्यकता है। उसे सार्थक दिशा प्रदान करने हेतु ही इस पुस्तक- लेखन को बहुमूल्य विचारों के साथ आकार दिया गया है। कला को समर्पित कला-मनीषी एवं कलाविद् के विचारों का लाभ एवं बहुमूल्य दिशा-निर्देश प्राप्त करने का यह पुस्तक सार्थक उपक्रम है।
ललित कला संकाय में संगीत, चित्रकला, नाट्य कला तथा दृश्य कला विभाग सम्मिलित हैं। इन सभी क्षेत्रों से सम्बद्ध कला-मनीषियों एवं भारत देश के विभिन्न राज्यों में स्थित विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अध्यापन-कार्य का लम्बा व गहरा अनुभव रखने वाले कला-शिक्षकों के लेखों को भी सम्मिलित किया गया है, जिसके द्वारा कला-शिक्षा के विकास, कला-शिक्षा के प्रारूप, कला-शिक्षा का भविष्य, कला-शिक्षा का महत्त्व, कला-शिक्षा में आगत गुण-दोष और उनका निवारण एवं सार्थक दिशा-निर्देश के अतिरिक्त रोजगारोन्मुख कला आदि का विशद अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इसके साथ ही कला के आधुनिक एवं प्रासंगिक स्वरूप का भी विवेचन किया गया है।
हमें विश्वास है कि इस पुस्तक के सारगर्भित लेखों से कला-क्षेत्र के कला-साधक, कला-शिक्षक, कला- विद्यार्थी एवं कला-जिज्ञासु सभी लाभान्वित होंगे।

Weight380 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 1.5 cm
Textbook Genre

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About the Authors

मधु भट्ट तैलंग

डॉ. मधुभट्ट तैलंग भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रतिष्ठित विदुषी, शोधकर्ता एवं लेखिका हैं। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से हिन्दी एवं संगीत विषयों में स्नातकोत्तर उपाधियाँ तथा पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। संगीत विषय के अध्ययन, शोध एवं लेखन में उनकी…

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सत्यवती शर्मा

डॉ. सत्यवती शर्मा भारतीय शास्त्रीय संगीत की विदुषी, शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता हैं। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से संगीत विषय में एम.ए. एवं पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। संगीत के अध्ययन, अध्यापन एवं शोध के क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा…

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