Mewar Ke Maharana Aur Shahnshan Akbar
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पंडित राजेन्द्र शंकर भट्ट द्वारा रचित ऐतिहासिक कृति ‘मेवाड़ के महाराणा और शाहंशाह अकबर’ स्वाधीनता, शौर्य और स्वाभिमान के अमर इतिहास का प्रामाणिक दस्तावेज़ है। मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा श्रीमान भगवत सिंह मेवाड़ के प्राक्कथन से सुशोभित यह पुस्तक दर्शाती है कि मेवाड़ का संघर्ष किसी एक राजघराने का नहीं, बल्कि स्वधर्म और आज़ादी की रक्षा के लिए समूचे समाज के सामूहिक आत्मोत्सर्ग की गौरवगाथा है।
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पंडित राजेन्द्र शंकर भट्ट की पुस्तक ‘मेवाड़ के महाराणा और शाहंशाह अकबर’ भारतीय इतिहास के उस गौरवशाली अध्याय को उजागर करती है जहाँ एक ओर विशाल मुगल साम्राज्य का विस्तार था, तो दूसरी ओर मेवाड़ का अडिग स्वाभिमान और स्वतंत्रता का संकल्प।
पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ:
सामूहिक स्वाधीनता का दर्शन: यह ग्रंथ स्पष्ट करता है कि मेवाड़ का इतिहास किसी एक जाति, धर्म या घराने विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सभी परिवारों और वीरों के आत्मोत्सर्ग का प्रतीक है जिन्होंने मिलकर स्वाधीनता की ज्योति को जलाए रखा।
प्रामाणिक परिप्रेक्ष्य: मेवाड़ के महाराणा श्रीमान भगवत सिंह जी की विशेष सम्मति और प्राक्कथन (‘स्वाधीनता की ज्योति’) से समृद्ध, जो पुस्तक की ऐतिहासिक विश्वसनीयता को प्रमाणित करता है।
ऐतिहासिक द्वंद्व का सजीव चित्रण: मेवाड़ के स्वाभिमानी महाराणाओं और मुगल बादशाह अकबर के बीच चले कूटनीतिक व सैन्य संघर्षों का तथ्यपरक विश्लेषण।
प्रेरक गाथा: शौर्य, त्याग और स्वदेशाभिमान की यह गाथा आज भी हर देशवासी के हृदय में राष्ट्रप्रेम और आत्मसम्मान का भाव जगाती है।
इतिहास प्रेमियों, शोधार्थियों और भारतीय गौरव-गाथा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह एक अत्यंत संग्रहणीय पुस्तक है।
| Weight | 800 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 15 × 3 cm |








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