मातृकला एवं शिशु कल्याण
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यह पुस्तक मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित विषयों का शैक्षणिक अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें गर्भावस्था, प्रसव, प्रसवोत्तर अवस्था, शिशु पोषण, रोग प्रतिरोध, तथा मातृ एवं बाल कल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं का विवेचन है। विषयवस्तु स्वास्थ्य, गृह विज्ञान अथवा संबंधित पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है। पुस्तक की भाषा हिंदी है तथा आवश्यक स्थानों पर अंग्रेज़ी शब्दावली का प्रयोग किया गया है।
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📘 विषय-सूची (Table of Contents)
1. मातृत्व की उपयुक्तताएँ (Fitness for Motherhood)
जैविक उपयुक्तता, लैगिक उपयुक्तता, प्रजनन की उपयुक्तता, सुजननिकी उपयुक्तता, आर्थिक उपयुक्तता, मनोवैज्ञानिक उपयुक्ता, प्रश्न
2. प्रजनन संस्थान (Reproductive System)
यौवनावस्था, रजोनिवृत्ति, पुरुष प्रजनन अंग-वृषण, शुक्रवाहिका, अधिवृषण, शुक्राशय, प्रोस्टेट ग्रंथि, शिश्न, शुक्राणु। स्त्री प्रजनन अंग-बाह्य जनन अंग व आन्तरिक जनन अंग का विस्तृत वर्णन, ऋतु-स्राव, निषेचन, प्रसव, भ्रूण का विकास।
3. गर्भकालीन विकास (Prenatal Development)
गर्भाधान, गर्भकालीन विकास की विशेषताएँ, निषेचित अंडाणु का आरोपन एवं वृद्धि, अपरा के कार्य, गर्भकालीन विकास की अवस्थाएँ, (1) डिम्ब अवस्था, (2) भ्रूणावस्था, भ्रूणावस्था का महत्त्व, (3) गर्भास्थ शिशु की अवस्था, गर्भकालीन अवस्था में क्रियात्मक विकास, गर्भकालीन विकास को प्रभावित करने वाले कारक, प्रश्न
4. गर्भावस्था के कष्ट एवं उनका उचित उपचार (Common Discomforts during Pregnancy and their Treatment)
प्रातः वमन, कब्ज, छाती में जलन, अपच, निद्रा, बवासिर, पेशीय ऐंठन, बार-बार मूत्र उत्सर्जन, कमर एवं पीठ में दर्द, शारीरिक सूजन, शिराओं का फूल जाना, योनि स्राव, अल्प श्वास, आहार के प्रति घृणा या प्रेम।
5. गर्भवती स्त्री की देखभाल (Care of Expectant Mothers)
आहार आराम व निद्रा, पोशाक, व्यायाम, स्वच्छ वायु व सूर्य प्रकाश, शारीरिक स्वच्छता, स्तनों की देखभाल, सहवास, आँतों का स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, वजन में वृद्धि। प्रसव पूर्व सेवा केन्द्र तथा उनका महत्त्व। प्रसव पूर्व सेवा केन्द्रों की कार्य प्रणाली।
6. गर्भकालीन विषाक्तता (Toxaemia of Pregnancy)
लक्षण, निदान व देखभाल।
7. गर्भपात एवं विफल प्रसव (Miscarriage and Abortion)
विफल प्रसव, गर्भपात के कारण, गर्भपात के प्रकार, लक्षण व उनके उपचार।
8. प्रसवता तथा नवजात शिशु के आगमन की तैयारी (The Confinement and arrival of New Born)
प्रसव पीड़ा के कारण, प्रसव पीड़ा की अवस्थाएँ, प्रसव के प्रकार, प्रसव के लक्षण, प्रसव की अवधि, असामान्य प्रसव, शिशु के आगमन की तैयारी, प्रसूता की तात्कालिक देखभाल एवं परिचर्या, प्रसव के समय के लिए आवश्यक तैयारी, शिशु के वस्त्र।
9. प्रतिकारिता एवं प्रतिरक्षण (Immunity and Immunization)
प्रतिकारिता का वर्गीकरण, प्रतिरक्षण, भेद व सारणी।
10. प्रसव के बाद की सेवाएँ (Care During Puerperium)
आहार, विश्राम एवं निद्रा, मल-मूत्र का निष्कासन, स्तनों की देखभाल, शिशु को स्तनपान कराना, व्यायाम, प्रसूतिकाल की विषाक्तता, स्तनों का संक्रमण, चूचुक का फटना, धँसे हुए चूचुक।
11. नवजात शिशु की देखभाल (Care of New Born)
शिशु का कृत्रिम पोषण, दूध पिलाने वाले बर्तनों की सफाई एवं रख-रखाव, शैशवावस्था में होने वाले रोग व उनका उपचार – अतिसार, कब्ज, वायु विकार, कोलिक नैपकिन का घाव, आँखों का संक्रमण, नाभि का संक्रमण, स्तनों का सूजन, पीलिया, कुपोषण, मैरास्मस (सूखा रोग)।
12. शैशवावस्था में पोषण (Nutrition During Infancy)
शैशवावस्था में पौष्टिक तत्त्वों की आवश्यकता, नवजात शिशु का आहार, सर्वश्रेष्ठ है माता का दूध, जानवरों के दूध के प्रकार, फार्मूला तैयार करना, बोतल की सफाई, बोतल से दूध पिलाने से हानियाँ, शिशु को दूध कब पिलायें, पूरक आहार, शिशु को पूरक आहार देते समय ध्यान रखने योग्य बातें, वीनिंग, 6 माह के शिशु के लिए एक दिन की आहार तालिका, एक वर्ष के शिशु के लिए एक दिन की आहार तालिका।
13. बालकों एवं माताओं में होने वाले रोग (Disease that Effect Mothers & Children)
कारण, संचरण के साधन, उद्भवन काल, लक्षण, उपचार एवं प्रतिरोध के उपाय- (अ) जल भोजन तथा दुग्ध वाहित रोग-हैजा, टायफॉइड, डिप्थीरिया। (ब) वाइरस तथा वायुरहित रोग- चेचक, छोटी माता, काली खाँसी, क्षय रोग, पोलियो। (स) कीट व जीव-जन्तुओं द्वारा उत्पन्न रोग- मलेरिया। (द) प्रत्यक्ष सम्पर्क द्वारा फैलने वाले रोग- जलसंत्रास, गुप्त रोग या यौन रोग, एड्स, टिटनस। (य) कृमि रोग-निम्नलिखित कृमियों के जीवन चक्र की पहचान, लक्षण तथा रोगों के निरोधक उपाय- (अ) गोल कृमि, (ब) अंकुश कृमि, (स) डोरे कृमि, (द) एन्टअमीबा हिस्टोलिटिका।
14. मातृ-शिशु मृत्यु (Maternai Infantile Mortality)
मातृ शिशु मृत्यु से अभिप्राय, शिशु मृत्यु दर ज्ञात करना, मातृ-शिशु मृत्यु के कारण, मातृ-शिशु मृत्यु को रोकने के उपाय, शिशु एवं माताओं के कल्याण के लिए विभिन्न कार्यक्रम – व्यापक प्रतिरक्षण कार्यक्रम, पोषण कार्यक्रम, बाल अंधता निरोधक कार्यक्रम, विशेष पोषाहार कार्यक्रम, पोषण रक्तहीनता निरोधक कार्यक्रम, व्यावहारिक पोषाहार कार्यक्रम, डायरिया नियंत्रण कार्यक्रम, घेघा नियंत्रण कार्यक्रम, प्रश्न।
15. मातृ रक्षा और बाल कल्याण कार्यक्रम (Maternal Care and Child Welfarfe Programme)
मातृ एवं शिशु कल्याण कार्यक्रम से अभिप्राय, मातृ-शिशु कल्याणकारी सेवाओं का वर्गीकरण, मातृ शिशु कल्याणकारी संस्थाएँ, मातृ एवं बाल कल्याण के लिए स्वास्थ्य सेवायें- भारतीय शिशु कल्याण समिति, केन्द्रीय समाज कल्याण समिति, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, अस्पताल, भारत में स्वयंसेवी स्वास्थ्य संगठन, भ्रमणशील स्वास्थ्य इकाइयाँ, मानसिक चिकित्सालय, क्षय रोग चिकित्सालय, रेडक्रास सोसायटी, विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष, राष्ट्रीय जनसहयोग एवं बाल विकास, यू.एस.ए.आई.डी., केयर, खाद्य एवं कृषि संगठन।
16. परिवार नियोजन (Family Planning)
बढ़ती जन्मदर के कारण, परिवार नियोजन का महत्त्व, परिवार नियोजन की विधियाँ, अस्थायी विधियाँ, स्थायी विधियाँ, पुरुष नसबंदी, महिला नसबंदी।
| Weight | 368 g |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 × 2 cm |
| पाठ्यक्रम प्रणाली | |
| विश्वविद्यालय | ब्रज विश्वविद्यालय, भरतपुर, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर, मत्स्य विश्वविद्यालय, अलवर, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर, कोटा विश्वविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर |
| Textbook Genre |















वायु प्रदूषण एवं प्रबन्धन
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