Gandhi Aur Manavadhikar
Original price was: ₹350.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
You Save 20%
In stock
गाँधीजी को मानवाधिकारों का प्रवर्तक कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन मानवता और मानव के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया था। गाँधीजी अपने प्रारम्भिक जीवन से रंगभेद, उपनिवेशवाद और गैर बराबरी मिटाने के लिए सतत् रूप से कार्य करते रहे। मानव अधिकार अक्षुण्ण हैं, उनका हनन गाँधीजी अनुचित मानते रहे। उनका मानना था कि मानव जाति एक है, क्योंकि नैतिक नियम सब पर समान रूप से लागू होते हैं और वे कहते थे कि ईश्वर की दृष्टि में जब सभी समान हैं तो आपसी भेदभाव क्यों? लोक कल्याणकारी राज्य एवं न्याय की स्थापना के लिए यह अत्यन्त आवश्यक है कि गाँधीजी का वैचारिक आधार भाव को हम भली-भांति समझें। मानव अधिकार की बात वैसे तो प्राचीनकाल से होती रही है, लेकिन समय-समय पर युगदृष्टाओं ने इन्हें विवेचित किया, उनमें गाँधीजी अग्रणी हैं।
वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने जो चार्टर दिया है, वह भी गाँधीजी के विचारों के अत्यन्त निकट है और इसीलिए गाँधीजी विश्व मानवता का पर्याय बने हुए हैं। हमारे देश में मानवाधिकार आयोग की सम्पूर्ण अवधारणा में भी गाँधीवादी विचारों की भावभूमि है। गाँधीजी ने मजदूरों, किसानों, महिलाओं और यहाँ तक कि अपराधियों के अधिकारों की भी पैरवी दृढ़ता के साथ की है। प्रस्तुत पुस्तक की विषय वस्तु मानव मन में गाँधीजी और उनके जीवन के साथ-साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था में मानवाधिकारों के प्रति विश्वास को और अधिक दृढ़ करती है।
| Weight | 300 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1 cm |





Reviews
There are no reviews yet.