एक हंसी की उम्र
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Ek Hansi Kee Umer डॉ. लक्ष्मी शर्मा की कहानियाँ विचित्र मानसिक संघर्षों से जूझते पात्रों को पूरी विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करती हैं। ‘एक हंसी की उम्र’ संग्रह की रचनाएँ कथाकारों, समीक्षकों और पाठकों का ध्यान आकृष्ट करती हैं, जो मानवीय आवेश से पाठक को मुक्त नहीं होने देतीं। यह संग्रह डॉ. लक्ष्मी शर्मा को हिन्दी के कहानीकारों की अग्रिम पंक्ति में विशिष्ट पहचान देगा।
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कहानीकार के रूप में डॉ. लक्ष्मी शर्मा का उदय धूमकेतु की तरह हुआ तथा उनकी ‘कथन’, ‘अक्सर’ आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित कहानियों ने कथाकारों, कथा समीक्षकों तथा पाठकों का ध्यान सहसा आकृष्ट किया। जब उनकी ‘अक्सर’ में ‘ख़ते मुतवाज़ी’ कहानी प्रकाशित हुई तो उनके करीबी लोगों को ही विश्वास नहीं हुआ कि लक्ष्मी शर्मा के पास इतनी तराशी हुई उर्दू तथा मार्मिक अभिव्यक्ति है। लक्ष्मी शर्मा की कहानियों के पात्र विचित्र मानसिक संघर्ष, जो बहुत वास्तविक एवं स्वाभाविक लगता है, से जूझ रहे होते हैं। उनकी यह जूझन पाठकों को अपने आवेश में भर लेती है और कहानी के समापन तक पाठक इस आवेश से मुक्त नहीं हो पाता। उनकी कहानियों की यही प्रभावशीलता उन्हें हिन्दी के कहानीकारों की अग्रिम पंक्ति में ला खड़ा करती है। इस संग्रह की रचनाएँ इस तथ्य की गवाह है कि लक्ष्मी शर्मा अपनी कहानियों के रचाव को बराबर मांजती चलती हैं। उनका यही प्रयास उनकी हर रचना को पूर्णता प्रदान करता है। उनकी कहानियों की प्रभावशीलता उनकी रचनादृष्टि का परिणाम है। उनकी कहानियों के पात्र अपने जीवन की स्थितियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, क्योंकि वे इन पात्रों के साथ पूरी रागात्मकता के साथ जुड़ती हैं। निश्चय ही इस संकलन की कहानियाँ डॉ. लक्ष्मी शर्मा को विशिष्ट पहचान देंगी।
| Weight | 310 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |




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