भारतीय कण्ठभरण चित्रांकन परम्परा
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Bharatiya Kanthabharan Chitrankan Parampara भारत की सांस्कृतिक परंपराओं में भावनाओं से ओत-प्रोत लोकप्रिय आभूषण कण्ठाभरण के अध्ययन की उपयोगिता निर्विवाद है। डॉ. शिवा धमेजा की यह पुस्तक प्राचीन भारत की शिल्पराशि और साहित्यिक संपदा के समीक्षात्मक अनुशीलन द्वारा कण्ठाभरणों के विविध स्वरूपों को सामाजिक, आर्थिक व धार्मिक पृष्ठभूमि के परिप्रेक्ष्य में वर्णित करती है। यह कृति कण्ठाभरणों के कलात्मक और सामाजिक महत्व को उजागर करती है।
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भारत की सांस्कृतिक परम्पराओं के प्रसंग में भावनाओं से ओत-प्रोत लोकप्रिय आभूषण कण्ठाभरण के अध्ययन की उपयोगिता निर्विवाद है। प्राचीन भारत की विपुल शिल्पराशि एवं साहित्यिक सम्पदा के समीक्षात्मक अनुशीलन द्वारा कण्ठाभरणों के विविध स्वरूपों को सामाजिक, आर्थिक व धार्मिक पृष्ठभूमि के परिप्रेक्ष्य में वर्णित किया गया है। पुस्तक में भारतीय श्रृंगार के महत्त्वपूर्ण पक्ष कण्ठाभरण पर चित्रांकन द्वारा सम्बन्धित विविध पक्षों को सुन्दरता से उजागर किया गया है। यह अध्ययन ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में कलात्मक और सामाजिक दृष्टि से किया गया शोध है, जिसमें कण्ठाभरणों के विविध प्रकारों, नामों और धारण करने सम्बन्धी मान्यताओं की समीक्षा प्रस्तुत की गई है। लेखिका ने इस ग्रन्थ में वृहद साहित्यिक एवं पुरातात्विक साक्ष्यों का सम्यक् उपयोग करते हुए, समयानुसार परिवर्तित होते कण्ठाभरणों के स्वरूपों को समायोजित किया है जो अपनी तरह का पृथक्, विस्तृत एवं विलक्षण संग्रह है। चित्रों का वृहद संकलन कण्ठाभरणों के वैविध्य को अच्छी तरह प्रस्तुत करता है एवं रेखाचित्रों का विशाल प्रस्तुतिकरण ने इस अध्ययन को जीवन्त बना दिया है। पुस्तक कला एवं संस्कृति के प्रशिक्षु, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, विद्वानों, पुस्तक अध्येताओं एवं कलाप्रेमियों के लिए नवीन व प्राचीन सभी प्रतिमानों को केन्द्रित करके विषय की गहन जानकारी उपलब्ध करवाने में सहयोगी रहेगी।
| Weight | 375 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |







भारत का इतिहास एवं संस्कृति (प्रारंभ से 1526 ई.)
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