

रानी लक्ष्मी कुमारी चूंडावत (24 जून 1916 – 24 मई 2014) राजस्थानी भाषा एवं साहित्य की शीर्षस्थ लेखिका, लोक-संस्कृति की मर्मज्ञ, इतिहासकार तथा प्रख्यात राजनीतिज्ञ थीं। उन्हें राजस्थानी लोकगाथाओं, पारंपरिक कथाओं और शौर्य-इतिहास को आधुनिक गद्य में जीवंत करने के लिए जाना जाता है।
उनका जन्म मेवाड़ (राजस्थान) के देवगढ़ राजघराने में हुआ था। सामंती परिवेश और पर्दा प्रथा की बेड़ियों को तोड़ते हुए उन्होंने राजस्थानी और हिन्दी साहित्य में अप्रतिम योगदान दिया। वे राजस्थान विधानसभा की सदस्य (MLA) तथा राज्यसभा की सांसद (MP) भी रहीं। उन्होंने लुप्तप्राय राजस्थानी लोक-परंपराओं, प्रेम-गाथाओं और ऐतिहासिक वृत्तांतों का गहन अध्ययन कर उन्हें मानक गद्य रूप में लिपिबद्ध किया। साहित्य और समाजसेवा में उनके विशिष्ट योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री (1984) तथा राजस्थान सरकार द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘राजस्थान रत्न’ (2012) से सम्मानित किया गया।
प्रमुख राजस्थानी कृतियाँ: हूँकारो दो सा, बागो भारमली, मांझल रात, अमोलक वांतां, मूमल, देवनारायण बगड़ावत महागाथा, गिर ऊँचा ऊंचा गढ़ां, कैरवां रो पाछो, गजबण, सूंठ
ऐतिहासिक एवं अन्य ग्रंथ: सांस्कृतिक राजस्थान, राजस्थान के रीति-रिवाज, हिन्दुकुश के उस पार, शांति के लिए संघर्ष, लैनिन री जीवनी, रूसी लोक-वार्ताएँ
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राजस्थान के सांस्कृतिक लोकगीत
₹300.00Original price was: ₹300.00.₹270.00Current price is: ₹270.00.Rajasthn ke Sanskritik Lokgeet लोक-साहित्य में लोकगीतों का विशिष्ट स्थान है, जिनके पीछे एक समृद्ध संस्कृति है। लक्ष्मी कुमारी चूण्डावत का यह संग्रह गर्भावस्था से लेकर विवाह, विदा, गृहस्थ जीवन और दाम्पत्य सुख-दुःख तक के मानवीय पहलुओं पर मार्मिक अभिव्यक्ति प्रस्तुत करता है। यह पुस्तक राजस्थान के लोकगीतों को सुरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
