भारत के औषधीय पुष्प
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Bharat ke Aoushdheeya Pushp प्राचीनकाल में भारत ने अकूत ज्ञान-संपदा अर्जित की थी, जिसमें आयुर्वेद का विशेष स्थान है। डॉ. परशुराम शुक्ल की यह पुस्तक विभिन्न प्रकार के फूलों के औषधीय उपयोग की विस्तार से समीक्षा करती है, जो एक विलुप्त किन्तु बहुत उपयोगी ज्ञान शाखा का उद्घाटन करती है। यह पुस्तक जनसामान्य और शोधार्थियों दोनों के लिए लाभकारी है, जो उन्हें प्रकृति के औषधीय गुणों से परिचित कराती है।
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प्राचीनकाल में भारत ने अकूत ज्ञान-सम्पदा अर्जित की थी। जब अमेरिका तथा यूरोप के देशों के लोगों को कपड़े पहनना भी नहीं आता था, तब भारत अध्यात्म, धर्म, भाषा, साहित्य, संगीत आदि क्षेत्रों में उन्नति के शिखर पर था। संस्कृत में उपलबध साहित्य इसका प्रमाण है। यहाँ के ऋषि-मुनियों ने लोक कल्याण की दृष्टि से आयुर्वेद में शरीर विज्ञान, विभिन्न रोग तथा उनकी चिकित्सा को लेकर गम्भीर अध्ययन किया। उन्होंने प्रकृति के गहन और सूक्ष्म अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि धरती पर पाये जाने वाले हर हरित-तृण, पौधे, लता तथा वृक्ष का औषधीय उपयोग है। प्रकृति ने कोई उपादान निरर्थक नहीं बनाया।
किन्तु लम्बी पराधीनता और भोगवादी संस्कृति के आग्रहों ने इस ज्ञान-सम्पदा का तिरस्कार किया और वर्तमान जीवन पद्धति ने आयुर्वेद जैसी चिकित्सा पद्धति को विस्मृत कर दिया। जब आज के युवक अपने चारों ओर लगे पेड़-पौधों को ही नहीं पहचानते तो उनके औषधीय उपयोग को क्या जानेंगे? प्रस्तुत पुस्तक विभिन्न प्रकार के फूलों के औषधीय उपयोग की विस्तार से समीक्षा करती है। प्रकारान्तर से यह पुस्तक एक विलुप्त किन्तु बहुत उपयोगी ज्ञान शाखा का उद्घाटन करती है। पुस्तक में वर्णित सामग्री जनसामान्य के लिए तो उपयोगी है ही शोधार्थियों के लिए भी लाभकारी रहेगी, ऐसा हमारा विश्वास है।
| Weight | 365 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |
















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