बाल अपराध
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Bal Apradh बालक देश का भावी कर्णधार है, परन्तु बाल अपराध एक विकट और गंभीर समस्या बनी हुई है। डॉ. बृन्दा सिंह की यह पुस्तक बाल अपराध के कारणों, परिणामों और समाज पर पड़ने वाले प्रभावों पर गहन प्रकाश डालती है। यह बालकों की परवरिश और शिक्षा-दीक्षा पर समुचित ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित करती है, जो समाज सुधारकों और गृहिणियों के लिए लाभदायक सिद्ध होगी।
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बालक ईश्वर का दिया हुआ एक अनुपम वरदान है। अमूल्य कृति है। अनमोल निधि है। देश का भावी कर्णधार है। भारत का भावी नागरिक है, जिसके कन्धे पर भारत का भविष्य टिका है, परन्तु यदि बालक का चरित्र ही खराब होगा। यदि वे चोरी, डकैती, लूट-पाट, आगजनी, ड्रग्स सेवन, मद्यपान, धूम्रपान, वेश्यावृत्ति आदि गन्दी आदतों का शिकार होंगे तो निश्चय ही देश विनाश के गर्त में चला जाएगा। इसलिए यह जरूरी है कि बालकों की परवरिश एवं शिक्षा-दीक्षा पर समुचित ध्यान दिया जाए।
वर्तमान में बाल अपराध की समस्या, न केवल माता-पिता एवं परिवारजनों के लिए एक विकट एवं गम्भीर समस्या है, अपितु यह राष्ट्र एवं सम्पूर्ण विश्व के लिए भी एक चुनौती एवं गम्भीर समस्या बनी हुई है। आए दिन समाचार-पत्रों में कोई-न- कोई खबर बाल अपराध से सम्बन्धित पढ़ने-सुनने को मिल ही जाती है। चाहे वह बलात्कार से सम्बन्धित हो, चैन स्नेचिंग, लूटपाट, आगजनी, ट्रेन डकैती से सम्बन्धित हो अथवा हत्या जैसे जघन्य अपराध से। परन्तु यह हर हालत में केवल चिन्तनीय ही नहीं, निन्दनीय भी है।
प्रस्तुत पुस्तक ‘बाल अपराध’ में इन्हीं सब विषयों पर गहन प्रकाश डाला गया है। यह पुस्तक न केवल गृह-विज्ञानियों के लिए अपितु समाज सुधारकों, मनोचिकित्सकों, गृहिणियों एवं जनसामान्य के लिए भी लाभदायक सिद्ध होगी।
| Weight | 435 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |















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