हिन्दी भाषा और साहित्य

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  • Sale! Aachaldas Khichi RI Vachnika

    आचलदास खींची री वचनिका

    Original price was: ₹100.00.Current price is: ₹80.00.
  • Sale! Mahapran Niral:Samagra Moolyankar

    महाप्राण निराला : समग्र मूल्यांकन

    Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹160.00.
  • Sale! Mohan Rakesh Ke Sahitya Me Patra

    मोहन राकेश के साहित्य में पात्र

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    मोहन राकेश अपने पात्रों के माध्यम से जिन्दगी के यथार्थ की बेतरतीब तसवीर प्रस्तुत करते हैं। उनके पात्र, चाहे मिथकीय हों या आधुनिक, अपनी अर्थवत्ता में पूर्णतः समकालीन हैं। जीवन की त्रासदियों, अस्तित्व संकट तथा मूल्य-संक्रमण की स्थितियों से गुजरते हुए ये पात्र अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं के नीचे दबे बिखर-बिखर जाते हैं। तथापि उनकी संवेदनशीलता…

  • Sale! Mishrabandhu Aur Hindi Alochana

    मिश्रबंधु और हिंदी आलोचना

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    शम्भुनाथ ने मिश्रबन्धु के आलोचक व्यक्त्तित्व का पुनर्मूल्यांकन बड़ी निष्ठा, तत्परता और सहानुभूतिपूर्वक किया है। उन्होंने मिश्रबन्धु की इतिहासदृष्टि पर भी नए सिरे से विचार करते हुए परवर्ती इतिहासग्रन्थों पर उसके प्रभाव को भी रेखांकित किया है और इतिहासलेखक आलोचक मिश्रबन्धु की छवि को नयी दीप्ति देने की कोशिश की है। शम्भुनाथ ने निश्चय ही…

  • Sale! Prayojanmoolak Hindi

    प्रयोजनमूलक हिंदी

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    प्रयोजनमूलक हिन्दी का प्रयोग क्षेत्र सामान्यतः राजकाज की हिन्दी भाषा तक ही सीमित मान लिया जाता है, पर वास्तविकता यह है कि वह प्रारूपण एवं टिप्पण लेखन की कार्यालयी भाषा मात्र नहीं है, वह अपने व्यापक अर्थ में कार्यालयेतर विषयों तक अपनी पहुँच बनाती है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इसे समझा और व्यापक रूप से…

  • Sale! Hindi Kavita Me Nari Chetna Ka Vikas

    हिंदी कविता में नारी चेतना का विकास

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    वैदिककालीन अर्द्ध-नारीश्वर की अवधारणा से पोषित नारी की गौरवशालिनी परम्परा में घोषा, अपाला, सूर्या और मंत्रदृष्टा ऋषिकाएँ थीं। तो मध्यकाल में भारत के राजनीतिक पटल पर अहिल्याबाई, रज़िया सुल्तान या लक्ष्मीबाई जैसी जांबाज़ वीरांगनाएँ उदित हुईं। धार्मिक परिदृश्य पर भी लल्लेश्वरी, आण्डाल या मीरां जैसे हिमालयी व्यक्तित्व सम्पन्न साधिकाओं ने इस देश में नव- जागरण…

  • Sale! Rajbhasha Hindi Ka Manak Swaroop

    राजभाषा हिंदी का मानक स्वरूप

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    14 सितम्बर, 1949 को संविधान सभा ने यह प्रस्ताव पारित किया कि भारतीय गणराज्य की राजभाषा, देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी होगी। इसके बाद इस सम्बन्ध में राष्ट्रपति ने 1952, 1955 तथा 1960 में तीन आदेश जारी किए तथा 1963 में राजभाषा अधिनियम पारित किया गया, जिसका संशोधन 1967 में हुआ तथा 1968 में एक…

  • Sale! Subodh Hindi Vyakaran

    सुबोध हिंदी व्याकरण

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  • Sale! Hindi Vyakran Evam Rachna

    हिंदी व्याकरण एवं रचना

    Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹200.00.
  • Sale! Mahakavi Surdas Kr̥it Bhramarageet Sar

    महाकवि सूरदास कृत भ्रमरगीत सार

    Original price was: ₹80.00.Current price is: ₹64.00.
  • Sale! Kavyang Vivecan

    काव्यांग विवेचन

    Original price was: ₹150.00.Current price is: ₹120.00.

    यह पुस्तक काव्य के विभिन्न अंगों—रस, छन्द, अलंकार, रीति आदि—का सरल एवं व्यवस्थित विवेचन प्रस्तुत करती है। इसमें 84 छन्दों, 74 अलंकारों, 14 काव्य दोषों तथा हिन्दी-अंग्रेजी अलंकारिक शब्दों का उदाहरण सहित वर्णन किया गया है। काव्य-शास्त्र को समझने और उसका सही आस्वादन करने के लिए यह एक उपयोगी एवं समग्र कृति है, जो विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होती है।

  • Sale! Kavyang Vivecan

    संस्कृत-व्याकरण एवम्‌ निबन्ध-रचना

    Original price was: ₹125.00.Current price is: ₹100.00.
  • Sale! Kavyang Vivecan

    हिन्दी भाषा : उद्‌भव और विकास

    Original price was: ₹125.00.Current price is: ₹100.00.

    अनुक्रम हिन्दी भाषा तथा हिन्दी का विकास हिन्दी की उपभाषाएँ तथा बोलियाँ हिन्दी की ध्वनियाँ और उनका विकास हिन्दी शब्द समूह तथा शब्द रचना हिन्दी में वाक्य रचना हिन्दी का अर्थ विज्ञान देवनागरी लिपि : स्वरूप तथा विकास राष्ट्रभाषा हिन्दी का मानकीकरण भारतीय संविधान और हिन्दी हिन्दी : अन्तर्राष्ट्रीय सन्दर्भ संचार माध्यम और हिन्दी

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  • Sale! Kavyang Vivecan

    हिन्दी शोध-तन्त्र की रूपरेखा

    Original price was: ₹125.00.Current price is: ₹100.00.

    विश्वविद्यालय की स्थापना जिन कार्यों के निष्पादन के लिए होती है, उनमें शोध कार्य कराना उसका सबसे महत्त्पूर्ण कार्य होता है। शोध का मूल अर्थ है-ज्ञान के उस अनुषंग को प्रकाश में लाना जिसके विषय में हम अभी तक अभिज्ञ हैं। संसार का सारा वैज्ञानिक तथा ज्ञानात्मक विकास मनुष्य के शोध कार्यों का ही परिणाम है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग अपने-अपने विषय में शोध कराते हैं। इस तरह वे अपने क्षेत्र की ज्ञान सम्पदा को प्रकाश में लाते हैं और इस दिशा में आगे की पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

    शोध एक वैज्ञानिक और वैधानिक प्रक्रिया है जो सतत् साधना, योजनाबद्ध कार्य तथा एक सुनिश्चित विधान की अपेक्षा रखती है। हिन्दी में शोध कार्य का इतिहास बहुत पुराना नहीं है तथा देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के हिन्दी तथा भाषा विभागों में लम्बे अरसे से शोध कार्य हो रहे हैं।

    शोध कार्यों की परम्परा-समृद्धि के साथ-साथ हिन्दी में शोध-प्रविधि पर सैद्धान्तिक ग्रन्थों का प्रणयन भी होता रहा है। विकास की इस प्रक्रिया में शोध का शास्त्र ही विकसित हो गया है। डॉ. मनमोहन सहगल की प्रस्तुत कृति हिन्दी में शोध-तंत्र के सैद्धान्तिक और व्यावहारिक पक्षों का गम्भीर और विशद् आख्यान करती है। पुस्तक के सैद्धान्तिक विवेचन में विद्वान लेखक ने शोध की परिभाषा, शोध के प्रकार, पाठ-शोध विधि, शोध की पद्धतियाँ आदि का विस्तृत विवेचन किया है तो द्वितीय खण्ड में शोध के व्यावहारिक पक्षों का सम्यक् उद्घाटन किया गया है। शोध-शास्त्र को समझने तथा शोधकर्ताओं के लिए यह एक अपरिहार्य पुस्तक है।

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  • Sale! Ghananand Kavitt

    घनानन्द कवित्त

    Original price was: ₹100.00.Current price is: ₹80.00.

    रीतिकालीन मुक्त काव्य धारा के अग्रणी कवि घनानंद का रीतिकाल के कवियों में विशिष्ट स्थान है, क्योंकि घनानंद के काव्य में हृदय की कोमल भावनाओं और प्रेम की पीर की सहज और मार्मिक अभिव्यक्ति हुई है। उनके कवित्तों को पढ़कर लगता है कि घनानंद ने अपने हृदय की घनीभूत पीड़ा को अपने कवित्तों में उंडेल दिया है। कृष्ण भक्त कवि घनानंद मूलतः प्रेम के कवि हैं और प्रेम में भी विप्रलम्भ की हृदयस्पर्शी व्यंजनाओं के क्षेत्र में वे अप्रतिम हैं। मन की गहराई से निकली घनानंद की कविता में ब्रजभाषा का जो स्वाभाविक और परिष्कृत रूप प्रवाहित हुआ है, वह उन्हें काव्य के क्षेत्र में सबसे अलग पहचान देता है। घनानंद के कवि व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले कवित्तों में गहरी वेदना, तीक्ष्ण उपालम्भ तथा प्रेम-विवशताजन्य असहायता के जैसे चित्र उकेरे गये हैं, वे अन्यत्र नहीं मिलते।
    प्रस्तुत कृति में लेखक ने आचार्य विश्वनाथ मिश्र द्वारा सम्पादित ‘घनानंद कवित्त’ के प्रथम सौ कवित्तों का भाष्य तथा घनानंद की काव्यगत विशेषताओं का विस्तृत आकलन किया है। यह कृति घनानंद के पाठकों की घनानंद काव्य-विषयक जिज्ञासाओं का सम्यक् समाधान करेगी।

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  • Sale! Abhinav Hindi Vyakran

    अभिनव हिंदी व्याकरण

    Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹180.00.

    हिंदी व्याकरण के नियमों और सिद्धांतों का सरल एवं सुबोध प्रस्तुतीकरण। यह पुस्तक भाषा, वर्ण, शब्द, पद, वाक्य विचार और विराम चिह्नों का विश्लेषण करती है, जो स्नातक स्तर और प्रतियोगी परीक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

  • Sale! Hindi Vyangya : Badlte Pratiman

    हिंदी व्यंग्य: बदलते प्रतिमान

    Original price was: ₹400.00.Current price is: ₹360.00.

    हिंदी व्यंग्य की लंबी यात्रा, उसके विभिन्न रूप-आकारों और बदलते प्रतिमानों का गहन विश्लेषण। यह पुस्तक हास्य-व्यंग्य की भिन्नता, व्यंग्यकार की प्रतिबद्धता और व्यंग्य की शाश्वतता जैसे प्रश्नों की छानबीन करती है, जो व्यंग्यकारों और समीक्षकों के लिए उपयोगी है।

  • Sale! Hindi Nibandh: Udbhav Aur Vikas

    हिंदी निबन्ध: उद्भव और विकास

    Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹180.00.

    हिंदी निबंध की जटिल विधा के उद्भव और विकास का सम्यक् रेखांकन। यह पुस्तक निबंध के स्वरूप, भाषिक संयम और रचनात्मक विन्यास की बारीकियों को सरल भाषा में समझाती है, जो विश्वविद्यालयी और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।

  • Sale! Hindi Upanyason mein moolyabhodh

    हिन्दी उपन्यासों में मूलबोध

    Original price was: ₹400.00.Current price is: ₹360.00.

    हिंदी उपन्यासों में मूल्यबोध की प्रक्रिया और उसके अंतरंग विश्लेषण। यह पुस्तक उपन्यास की रचना-प्रक्रिया, जीवन मूल्यों के उद्घाटन और स्थापन को गहराई से समझाती है, जो पाठक को मानव जीवन की भावनात्मकता और दिशा का अहसास कराती है।

  • Sale! Hindi Lalit Nibhand ki Pehachan : Kubernath Roy

    हिंदी ललित निबंध की पहचान : कुबेरनाथ राय

    Original price was: ₹700.00.Current price is: ₹630.00.

    कुबेरनाथ राय के ललित निबंधों की विशिष्ट पहचान और उनके प्रकांड वैदुष्य का गहन विश्लेषण। यह पुस्तक संस्कृति-बोध, लोक-जीवन और विभिन्न भाषाओं के ज्ञान के अद्भुत संगम को उजागर करती है, जो उन्हें हिंदी के महान ललित निबंधकार बनाते हैं।

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