₹300.00Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
इन्टरनेट की सहायता से एक जगह बैठे-बैठे विश्व के किसी भी कोने से आवश्यकता की सूचनाओं को प्राप्त किया जा सकता है। इसी उद्देश्यों से पुस्तकालयों में इन्टरनेट तकनीक की शुरूआत हुई तथा इस तकनीक की सहायता से देश-विदेश के पुस्तकालयों को नेटवर्क की सहायता से जोड़ा गया। इस विषय पर अंग्रेजी भाषा में तो…
₹500.00Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
प्रस्तुत पुस्तक “भारतीय ज्योतिष” में लेखक ने ज्योतिष विषय को क्रमबद्ध एवं तर्कसंगत रूप प्रदान करने का अथक् प्रयास किया है। इस पुस्तक के माध्यम से पाठकगण तिथि, वार, नक्षत्र, करण, नौ ग्रह, द्वादश भाव एवं द्वादश राशियों के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त ज्योतिष सम्बन्धी जानकारी रखने वाले व्यक्तियों द्वारा,…
₹250.00Original price was: ₹250.00.₹200.00Current price is: ₹200.00.
विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर को विश्व में जो ख्याति मिली, वह प्रत्येक भारतवासी के लिए गौरव की बात है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर अप्रतिम मेधा और प्रतिभा के धनी थे तथा उनका कृतित्व एक पूरे युग का प्रतिनिधित्व करता है। संगीत, कला, साहित्य, दर्शन, शिक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में उनकी प्रतिभा के तेजस् आलोक ने पूरी मानवता को…
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
14 सितम्बर, 1949 को संविधान सभा ने यह प्रस्ताव पारित किया कि भारतीय गणराज्य की राजभाषा, देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी होगी। इसके बाद इस सम्बन्ध में राष्ट्रपति ने 1952, 1955 तथा 1960 में तीन आदेश जारी किए तथा 1963 में राजभाषा अधिनियम पारित किया गया, जिसका संशोधन 1967 में हुआ तथा 1968 में एक…
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
प्रस्तुत पुस्तक “प्राथमिक उपचार” में मानव शरीर में होने वाली सामान्य बीमारियों के उपचार के बारे में जानकारियाँ प्रदान की गईं हैं। मानव शरीर के सभी तन्त्रों जैसे पाचन तंत्र, तंत्रिका तंत्र, श्वसन तंत्र, कंकाल तंत्र, जनन तंत्र की रक्षा प्राथमिक उपचार की सहायता से ही की जा सकती है। प्राथमिक उपचार की जानकारी प्रत्येक…
₹550.00Original price was: ₹550.00.₹440.00Current price is: ₹440.00.
यह पुस्तक “राजस्थान के प्रजामंडल आंदोलनों में महिलाओं की भूमिका” पर आधारित एक महत्वपूर्ण कृति है, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महिलाओं के योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक उन वीरांगनाओं के साहस, त्याग और संघर्ष को उजागर करती है, जिन्हें इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया।
₹300.00Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
आलोच्य कृति ‘सामाजिक विचारक’ समाजशास्त्र के छः विचारकों-तीन पश्चिम के और तीन भारतीय-की जीवनी, शिक्षा, इन पर अन्य विद्वानों का प्रभाव, प्रमुख रचनाएँ, मूल विचार, उद्देश्य, अभिग्रह, पद्धति, परिप्रेक्ष्य, उपागम, सिद्धान्तों और योगदान आदि का क्रमबद्ध और व्यवस्थित विवेचन प्रस्तुत करती है। परस्पर सम्बन्धित विचारधाराओं के अनुसार पाठयोजना कार्ल मार्क्स और डी. पी. मुकर्जी, मैक्स…
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₹150.00Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.
प्रायः यह माना जाता है कि ईसा से 2 शताब्दी पूर्व पतंजलि ने सर्वप्रथम योगसूत्र की रचना की तथा योग को ‘योगश्चित्तवृत्ति निरोधः’ रूप में परिभाषित किया। एक ओर जहाँ योग का सम्बन्ध मोक्ष या मुक्ति प्राप्ति से है, वहीं इसका सम्बन्ध शरीर विकास और कायाकल्प से भी है। अब तक पश्चिमी संसार ने भी…
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₹150.00Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.
कर्मभूमि मुंशी प्रेमचंद का एक विचारप्रधान सामाजिक-राजनीतिक उपन्यास है। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन के समय की सामाजिक असमानता, जाति-भेद, नारी-स्थिति और नैतिक संघर्षों को यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह उपन्यास कर्म, त्याग और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देता है।
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₹125.00Original price was: ₹125.00.₹100.00Current price is: ₹100.00.
अनुक्रम हिन्दी भाषा तथा हिन्दी का विकास हिन्दी की उपभाषाएँ तथा बोलियाँ हिन्दी की ध्वनियाँ और उनका विकास हिन्दी शब्द समूह तथा शब्द रचना हिन्दी में वाक्य रचना हिन्दी का अर्थ विज्ञान देवनागरी लिपि : स्वरूप तथा विकास राष्ट्रभाषा हिन्दी का मानकीकरण भारतीय संविधान और हिन्दी हिन्दी : अन्तर्राष्ट्रीय सन्दर्भ संचार माध्यम और हिन्दी
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₹125.00Original price was: ₹125.00.₹100.00Current price is: ₹100.00.
विश्वविद्यालय की स्थापना जिन कार्यों के निष्पादन के लिए होती है, उनमें शोध कार्य कराना उसका सबसे महत्त्पूर्ण कार्य होता है। शोध का मूल अर्थ है-ज्ञान के उस अनुषंग को प्रकाश में लाना जिसके विषय में हम अभी तक अभिज्ञ हैं। संसार का सारा वैज्ञानिक तथा ज्ञानात्मक विकास मनुष्य के शोध कार्यों का ही परिणाम है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग अपने-अपने विषय में शोध कराते हैं। इस तरह वे अपने क्षेत्र की ज्ञान सम्पदा को प्रकाश में लाते हैं और इस दिशा में आगे की पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
शोध एक वैज्ञानिक और वैधानिक प्रक्रिया है जो सतत् साधना, योजनाबद्ध कार्य तथा एक सुनिश्चित विधान की अपेक्षा रखती है। हिन्दी में शोध कार्य का इतिहास बहुत पुराना नहीं है तथा देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के हिन्दी तथा भाषा विभागों में लम्बे अरसे से शोध कार्य हो रहे हैं।
शोध कार्यों की परम्परा-समृद्धि के साथ-साथ हिन्दी में शोध-प्रविधि पर सैद्धान्तिक ग्रन्थों का प्रणयन भी होता रहा है। विकास की इस प्रक्रिया में शोध का शास्त्र ही विकसित हो गया है। डॉ. मनमोहन सहगल की प्रस्तुत कृति हिन्दी में शोध-तंत्र के सैद्धान्तिक और व्यावहारिक पक्षों का गम्भीर और विशद् आख्यान करती है। पुस्तक के सैद्धान्तिक विवेचन में विद्वान लेखक ने शोध की परिभाषा, शोध के प्रकार, पाठ-शोध विधि, शोध की पद्धतियाँ आदि का विस्तृत विवेचन किया है तो द्वितीय खण्ड में शोध के व्यावहारिक पक्षों का सम्यक् उद्घाटन किया गया है। शोध-शास्त्र को समझने तथा शोधकर्ताओं के लिए यह एक अपरिहार्य पुस्तक है।
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₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.
रीतिकालीन मुक्त काव्य धारा के अग्रणी कवि घनानंद का रीतिकाल के कवियों में विशिष्ट स्थान है, क्योंकि घनानंद के काव्य में हृदय की कोमल भावनाओं और प्रेम की पीर की सहज और मार्मिक अभिव्यक्ति हुई है। उनके कवित्तों को पढ़कर लगता है कि घनानंद ने अपने हृदय की घनीभूत पीड़ा को अपने कवित्तों में उंडेल दिया है। कृष्ण भक्त कवि घनानंद मूलतः प्रेम के कवि हैं और प्रेम में भी विप्रलम्भ की हृदयस्पर्शी व्यंजनाओं के क्षेत्र में वे अप्रतिम हैं। मन की गहराई से निकली घनानंद की कविता में ब्रजभाषा का जो स्वाभाविक और परिष्कृत रूप प्रवाहित हुआ है, वह उन्हें काव्य के क्षेत्र में सबसे अलग पहचान देता है। घनानंद के कवि व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले कवित्तों में गहरी वेदना, तीक्ष्ण उपालम्भ तथा प्रेम-विवशताजन्य असहायता के जैसे चित्र उकेरे गये हैं, वे अन्यत्र नहीं मिलते।
प्रस्तुत कृति में लेखक ने आचार्य विश्वनाथ मिश्र द्वारा सम्पादित ‘घनानंद कवित्त’ के प्रथम सौ कवित्तों का भाष्य तथा घनानंद की काव्यगत विशेषताओं का विस्तृत आकलन किया है। यह कृति घनानंद के पाठकों की घनानंद काव्य-विषयक जिज्ञासाओं का सम्यक् समाधान करेगी।
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₹300.00Original price was: ₹300.00.₹270.00Current price is: ₹270.00.
वृद्धावस्था जीवन की सांध्य बेला है। यह दिन ढले शाम की तरह है जो धीरे-धीरे रात्रि के गहन अंधकार में तब्दील होता है और अन्ततः मृत्युरूपी रात्रि के सन्नाटे में विलीन हो जाता है। वृद्धावस्था का समापन तो चिरनिद्रा में सोने पर ही होता है। वृद्धावस्था जीवन का अन्तिम पड़ाव है, आखिरी बेला है। इस…
₹150.00Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.
मेडिकल विज्ञान की दृष्टि से मस्तिष्क की पीयूष ग्रंथि द्वारा विशेष हार्मोन्स का निर्माण होने पर प्यूबर्टी या किशोरावस्था आरम्भ होती है। ये हार्मोन्स जननेन्द्रियों का विकास करते हैं, इन्हीं के कारण किशोरावस्था में शारीरिक- भावात्मक बदलाव होते हैं। इस समय में माता-पिता की भूमिका किशोर बच्चों की समस्याओं को समझकर सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार से उनमें…
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
बालक प्रकृति की, भगवान् की सर्वश्रेष्ठ कृति है, अद्भुत देन है, उपहार है। वे अबोध होते हैं, निश्छल होते हैं, उनका व्यवहार कृत्रिम नहीं होता, वे अपने व्यवहार में बनावटीपन नहीं लाते हैं। बालमन सदैव ही जटिलताओं से परिपूर्ण रहा है। उनका व्यवहार सदैव ही अनबूझा रहा है, पहेली रहा है। कोई नहीं कह सकता,…